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Sehore: CM शिवराज ने कहा- जो दूसरों को जीते वह वीर, जो स्वयं को जीत ले वह महावीर

Tue, 29 Nov 2022 10:21 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर Published by: अरविंद कुमार Updated Tue, 29 Nov 2022 10:21 PM IST
सार

मध्यप्रदेश के सीहोर जिले में सीएम शिवराज सिंह चौहान बाल विहार मैदान में चल रहे जैन समाज के 1008 मज्जिनेंद्र पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महा महोत्सव और विश्व शांति महायज्ञ कार्यक्रम में शामिल हुए। सीएम ने मुनि संस्कार महाराज के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किए और देश-प्रदेश के सुख समृद्धि की कामना की।

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CM Shivraj Says one who wins others is a veer the one who wins himself is Mahavir
सीहोर में सीएम शिवराज सिंह चौहान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सीहोर में सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा, जो दूसरों को जीते वह वीर और जो स्वयं को जीत ले वह महावीर होता है। जैन समुदाय को परिभाषित करते हुए उन्होंने कहा, जो महावीर वह जितेंद्रीय होता है, जो जितेंद्रीय वह जिन और जो जिन होता है वही जैन होता है। उन्होंने कहा कि अपने आप को जीत लेने वाला ही जैन होता है।

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सीएम ने बड़ा बाजार स्थित मनकामेश्वर मंदिर में भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना की और प्रदेश के सुख समृद्धि की कामना की। इस दौरान कार्तिकेय चौहान, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री तथा जिले के प्रभारी मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी, विदिशा सांसद रमाकांत भार्गव, भोपाल सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, विधायक सुदेश राय, आष्टा विधायक रघुनाथ मालवीय, जिला बीजेपी अध्यक्ष रवि मालवीय, जिला पंचायत अध्यक्ष गोपाल सिंह इंजीनियर और नगर पालिका अध्यक्ष प्रिंस राठौर सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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CM Shivraj Says one who wins others is a veer the one who wins himself is Mahavir
शिवराज सिंह चौहान सहित कई अन्य बीजेपी नेता - फोटो : अमर उजाला

स्वतंत्रता संग्राम के प्रथम योद्धा को नमन किया...
सीहोर नगर के गौरव दिवस के अवसर पर सीएम शिवराज सिंह चौहान ने सीहोर के इंदौर नाका स्थित स्वतंत्रता संग्राम के प्रथम योद्धा अमर शहीद कुंवर चैन सिंह की समाधि पर पहुंचकर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। सीएम सीहोर स्थित चैन सिंह की छतरी पर पहुंचकर उनको पुष्पांजलि अर्पित किए। इस दौरान सीएम ने कहा, हमारे देश के साथ-साथ प्रदेश के लिए गौरव की बात है कि भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 के पहले सीहोर जिले में साल 1824 में आजादी की एक मशाल जल उठी थी। इस मशाल का ज्वालामुखी रूप साल 1857 प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के रूप में पहचाना जाता है। कुंवर चैन सिंह ने अतुलनीय साहस का परिचय देते हुए अपने 41 सैनिकों के साथ आजादी के लिए हजारों अंग्रेजो से लड़ते हुए स्वयं को शहीद कर दिया। सीहोर के इंदौर नाके पर बनी उनकी समाधि के साथ ही उनके विश्वस्त अंगरक्षक शाहिद जनाब हिम्मत खां और बहादुर खां की समाधि भी है।

अंग्रेज जनरल ने सीहोर बुलाया...
इतिहास गवाह है कि नरसिंहगढ़ के कुंवर चैन सिंह को साल 1824 में अंग्रेज जनरल ने सीहोर बुलाया और अंग्रेजों से संधि करने के लिए विवश किया। अंग्रेजों से संधि नहीं करने पर अंग्रेजों की ओर से उन्हें बंदी बनाने की कोशिश की गई। तब स्वतंत्रता की अलख जगाने वाले प्रथम योद्धा कुंवर चैन सिंह ने अंग्रेजों का मुकाबला करना उचित समझा और अपने 41 सैनिकों के साथ अंग्रेजों का वीरता से सामना किया। उनके हमसफर सुरक्षा सैनिक बहादुर खां और हिम्मत खां सहित 41 सैनिकों ने वीरता से लड़ाई लड़ी और वीरगति को प्राप्त हो गए।

CM Shivraj Says one who wins others is a veer the one who wins himself is Mahavir
आर्शीवाद लेते हुए सीएम शिवराज - फोटो : अमर उजाला

सीएम ने शहीद स्थल पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की...
सीएम शिवराज सीहोर नगर के गौरव दिवस के अवसर पर सीहोर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने सर्वप्रथम सैकड़ा खेड़ी स्थित शहीद स्थल पहुंचकर स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि 14 जनवरी 1858 को सीहोर में स्वतंत्रता के प्रथम संग्राम में 356 क्रांतिकारियों ने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया था। इस स्थान पर भव्य स्मारक बनाया जाएगा। सीहोर का यह स्थल हम सबके लिए पवित्र स्थान है। यह स्थान हमें उन वीरों की वीर गाथा याद दिलाता है, जिन्होंने हमारे देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्योछावर करने में जरा भी संकोच नहीं किए। हम सभी का सौभाग्य है कि हमने उस धरती में जन्म लिया, जहां असंख्य क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने गुलामी की जंजीरों को तोड़ने के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।

सीहोर में क्रांति की ज्वाला सुलगी...
उल्लेखनीय है कि अंग्रेजी शासन के खिलाफ मध्य भारत में चल रहे विद्रोह में सीहोर की बरबर्ता पूर्ण घटना को जलियावाला बाग हत्याकांड की तरह देखा जाता है। दस मई 1857 को मेरठ की क्रांति से पहले ही सीहोर में क्रांति की ज्वाला सुलग गई थी। मेवाड़ और उत्तर भारत से होती हुई क्रांतिकारी चपातियां 13 जून 1857 को सीहोर और ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंच गई थी। 14 जनवरी 1858 को अंग्रेजों से बगावत करने वाले 356 क्रांतिकारियों को जनरल ह्यूरोज के आदेश पर सीवन नदी के किनारे सैकड़ा खेड़ी स्थित चांदमारी मैदान में गोलियों से भून दिया गया था। उन वीर क्रांतियों के स्मृति में सैकड़ा खेड़ी रोड के पास चांदमारी मैदान पर शहीद स्मारक बनाया गया है।

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