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MP: विधायक थाने में, पुलिस ने नहीं लिखी रिपोर्ट, गुस्साए पटेरिया ने कहा- इस्तीफा दूंगा, फिर बयान से पलट गए
Fri, 11 Oct 2024 07:33 PM IST
उदित दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर
Published by: उदित दीक्षित
Updated Fri, 11 Oct 2024 07:33 PM IST
सार
सागर के देवरी से विधायक पटेरिया पहले पद से इस्तीफा देने का ऐलान किया और फिर बाद में पलट गए। उन्होंने कहा कि पूरी पार्टी और मुख्यमंत्री मोहन यादव मेरे साथ हैं। पार्टी के कार्यकर्ता भी मेरे साथ हैं।
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भाजपा विधायक पंडित बृज बिहारी पटेरिया अब नहीं देंगे इस्तीफा।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश के सागर जिले की देवरी से भाजपा विधायक पंडित बृज बिहारी पटेरिया इस्तीफा देने से पीछे हट गए हैं। इससे पहले उन्होंने गुरुवार रात को इस्तीफे देने का ऐलान किया था। इससे सत्ताधारी दल भाजपा में हलचल मच गई थी। हालांकि, अब पटेरिया ने कहा कि उन्होंने तत्कालिक आक्रोश के चलते इस्तीफ देने की घोषणा की थी। वो आक्रोश में उठाया गया दुर्भाग्यपूर्ण कदम था।
जानिए क्या है?
दरअसल, गुरुवार को देवरी विधानसभा के केसली थाना क्षेत्र के ग्राम मेडकी में सांप के काटने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। मृतक के परिजन शव और उस सांप को लेकर अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टर ने रिपोर्ट में सांप के काटने से मृत्यु होने की बात लिखने के लिए 40 हजार रुपये की मांग की थी। इस घटना के साक्ष्य होने के बावजूद केसली पुलिस थाने में डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी। इसकी जानकारी विधायक बृज बिहारी पटेरिया को लगी तो वे एफआईआर दर्ज कराने के लिए केसली थाने पहुंचे। लेकिन, पुलिस ने केस दर्ज करने से मना कर दिया। इससे व्यथित होकर विधायक पटेरिया ने विधानसभा अध्यक्ष के नाम अपने लेटर पैड पर इस्तीफा लिखकर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया और केसली पुलिस थाने के सामने धरने पर बैठ गए। उनका कहना था कि सत्ताधारी दल का विधायक होने के बाद भी, अगर डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर नहीं हो रही है तो इससे शर्मनाक बात और क्या हो सकती है? उन्होंने कहा था कि जब तक डॉक्टर दीपक दुबे के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं होती, वे धरने पर बैठे रहेंगे।
आला अधिकारी पहुंचे केसली
विधायक पटेरिया के इस्तीफे की घोषणा का पत्र सोशल मीडिया पर वायरल होते ही राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया। देर रात 12 बजे के बाद पुलिस और प्रशासन के बड़े अधिकारी केसली पहुंचे और विधायक से बात की। लेकिन, पटेरिया डॉक्टर पर एफआईआर दर्ज कराने की मांग पर अड़े रहे। आखिर में पुलिस ने उनकी बात मानी और डॉक्टर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। इसके बाद विधायक पटेरिया ने कहा कि पूरी पार्टी और मुख्यमंत्री मोहन यादव मेरे साथ हैं। साथ विधायक बनाने वाली पार्टी के कार्यकर्ता भी मेरे साथ हैं।
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पूर्व मंत्री भार्गव ने भी किया पूरी घटना का जिक्र
विधायय पटेरिया के इस्तीफे के ऐलान के बाद पूर्व मंत्री और भाजपा विधायक गोपाल भार्गव ने एक लबा पोस्ट किया था। जिसमें उन्होंने लिखा था-अभी-अभी देर रात जानकारी लगी कि मेरी नजदीकी विधानसभा क्षेत्र देवरी के विधायक बृज बिहारी पटेरिया ने विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र विधानसभा अध्यक्ष को भेजा है और वे केसली थाना में धरने पर बैठ गए हैं। जानकारी लगते ही मैंने वरिष्ठ विधायक पटेरिया से दूरभाष पर चर्चा कर विषय जाना। उन्होंने मुझे जो बताया उसे सुनकर मैं स्तब्ध हूं और सोच पड़ गया। उन्होंने बताया कि उनकी विधानसभा क्षेत्र के मेढ़की ग्राम के व्यक्ति की शर्पदंशसे मृत्यु हुई, मृत्यु उपरांत ग्रामवासी एवं परिवारजन मृत शर्प एवं मृतक के शरीर को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे और चिकित्सक को घटना के संबंध में अवगत कराया। चिकित्सक द्वारा मृतक के परिवारजन से इस आशय का मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के लिए 40000 रुपये की मांग की गई। विधायक पटेरिया ने बताया कि पीड़ित परिवारजन ने जब पूरे प्रकरण की जानकारी दी और सबंधित चिकित्सक के विरुद्ध FIR कराए जाने की कार्रवाई की मांग की, तो मैं स्वयं केसली थाना पहुंचा और चिकित्सक के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने के लिए कहा। परंतु प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। बृज बिहारी पटेरिया द्वारा बताया गया कि साक्ष्यों के उपरांत जब प्राथमिकी दर्ज करने के लिए मुझे पीड़ित पक्ष के साथ धरने पर तक बैठना पड़ा और कार्रवाई नहीं हुई, तो ऐसे पद का क्या मतलब।
उक्त घटनाक्रम दुखद है, किसी व्यक्ति मृत्यु की जैसी घटना पर भी शासकीय कर्मचारियों द्वारा मृत्यु प्रमाण पत्र बनाए जाने के लिए पैसे की मांग की जा रही है। भाजपा की सरकार जो गरीबों के लिए ही दिन रात कार्य कर रही है, ऐसी सरकार में पुलिस के अधिकारियों या चिकित्सकों कोई भी हो जो जनता से चुने विधायक की भी न सुने उनकी ऐसी कार्यप्राणली बर्दास्त नही की जाएगी। मेरे द्वारा विधानसभा देवरी के विधायक एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृज बिहारी पटेरिया से कहा गया है कि, हमें क्षेत्र की जनता ने आशा और विश्वास के साथ चुना है, आप इस्तीफा न दें। मैं स्वयं पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों एवं चिकित्सा विभाग के अधिकारियों से संबंधित पुलिसकर्मी और दोषी चिकित्सक के विरुद्ध कार्रवाई के लिए बात कर रहा हूं। इसके बाद मैंने जिले के अधिकारियों से बात कर संबंधित दोषियों के विरुद्ध अविलंब कार्रवाई करने को कहा है, साथ ही उन्हें बताया कि प्रदेश की भाजपा सरकार आमजन के प्रति बेहद संवेदनशील है, इस प्रकार के गैर जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली एवम व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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जानिए क्या है?
दरअसल, गुरुवार को देवरी विधानसभा के केसली थाना क्षेत्र के ग्राम मेडकी में सांप के काटने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। मृतक के परिजन शव और उस सांप को लेकर अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टर ने रिपोर्ट में सांप के काटने से मृत्यु होने की बात लिखने के लिए 40 हजार रुपये की मांग की थी। इस घटना के साक्ष्य होने के बावजूद केसली पुलिस थाने में डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी। इसकी जानकारी विधायक बृज बिहारी पटेरिया को लगी तो वे एफआईआर दर्ज कराने के लिए केसली थाने पहुंचे। लेकिन, पुलिस ने केस दर्ज करने से मना कर दिया। इससे व्यथित होकर विधायक पटेरिया ने विधानसभा अध्यक्ष के नाम अपने लेटर पैड पर इस्तीफा लिखकर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया और केसली पुलिस थाने के सामने धरने पर बैठ गए। उनका कहना था कि सत्ताधारी दल का विधायक होने के बाद भी, अगर डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर नहीं हो रही है तो इससे शर्मनाक बात और क्या हो सकती है? उन्होंने कहा था कि जब तक डॉक्टर दीपक दुबे के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं होती, वे धरने पर बैठे रहेंगे।
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आला अधिकारी पहुंचे केसली
विधायक पटेरिया के इस्तीफे की घोषणा का पत्र सोशल मीडिया पर वायरल होते ही राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया। देर रात 12 बजे के बाद पुलिस और प्रशासन के बड़े अधिकारी केसली पहुंचे और विधायक से बात की। लेकिन, पटेरिया डॉक्टर पर एफआईआर दर्ज कराने की मांग पर अड़े रहे। आखिर में पुलिस ने उनकी बात मानी और डॉक्टर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। इसके बाद विधायक पटेरिया ने कहा कि पूरी पार्टी और मुख्यमंत्री मोहन यादव मेरे साथ हैं। साथ विधायक बनाने वाली पार्टी के कार्यकर्ता भी मेरे साथ हैं।
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पूर्व मंत्री भार्गव ने भी किया पूरी घटना का जिक्र
विधायय पटेरिया के इस्तीफे के ऐलान के बाद पूर्व मंत्री और भाजपा विधायक गोपाल भार्गव ने एक लबा पोस्ट किया था। जिसमें उन्होंने लिखा था-अभी-अभी देर रात जानकारी लगी कि मेरी नजदीकी विधानसभा क्षेत्र देवरी के विधायक बृज बिहारी पटेरिया ने विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र विधानसभा अध्यक्ष को भेजा है और वे केसली थाना में धरने पर बैठ गए हैं। जानकारी लगते ही मैंने वरिष्ठ विधायक पटेरिया से दूरभाष पर चर्चा कर विषय जाना। उन्होंने मुझे जो बताया उसे सुनकर मैं स्तब्ध हूं और सोच पड़ गया। उन्होंने बताया कि उनकी विधानसभा क्षेत्र के मेढ़की ग्राम के व्यक्ति की शर्पदंशसे मृत्यु हुई, मृत्यु उपरांत ग्रामवासी एवं परिवारजन मृत शर्प एवं मृतक के शरीर को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे और चिकित्सक को घटना के संबंध में अवगत कराया। चिकित्सक द्वारा मृतक के परिवारजन से इस आशय का मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के लिए 40000 रुपये की मांग की गई। विधायक पटेरिया ने बताया कि पीड़ित परिवारजन ने जब पूरे प्रकरण की जानकारी दी और सबंधित चिकित्सक के विरुद्ध FIR कराए जाने की कार्रवाई की मांग की, तो मैं स्वयं केसली थाना पहुंचा और चिकित्सक के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने के लिए कहा। परंतु प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। बृज बिहारी पटेरिया द्वारा बताया गया कि साक्ष्यों के उपरांत जब प्राथमिकी दर्ज करने के लिए मुझे पीड़ित पक्ष के साथ धरने पर तक बैठना पड़ा और कार्रवाई नहीं हुई, तो ऐसे पद का क्या मतलब।
उक्त घटनाक्रम दुखद है, किसी व्यक्ति मृत्यु की जैसी घटना पर भी शासकीय कर्मचारियों द्वारा मृत्यु प्रमाण पत्र बनाए जाने के लिए पैसे की मांग की जा रही है। भाजपा की सरकार जो गरीबों के लिए ही दिन रात कार्य कर रही है, ऐसी सरकार में पुलिस के अधिकारियों या चिकित्सकों कोई भी हो जो जनता से चुने विधायक की भी न सुने उनकी ऐसी कार्यप्राणली बर्दास्त नही की जाएगी। मेरे द्वारा विधानसभा देवरी के विधायक एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृज बिहारी पटेरिया से कहा गया है कि, हमें क्षेत्र की जनता ने आशा और विश्वास के साथ चुना है, आप इस्तीफा न दें। मैं स्वयं पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों एवं चिकित्सा विभाग के अधिकारियों से संबंधित पुलिसकर्मी और दोषी चिकित्सक के विरुद्ध कार्रवाई के लिए बात कर रहा हूं। इसके बाद मैंने जिले के अधिकारियों से बात कर संबंधित दोषियों के विरुद्ध अविलंब कार्रवाई करने को कहा है, साथ ही उन्हें बताया कि प्रदेश की भाजपा सरकार आमजन के प्रति बेहद संवेदनशील है, इस प्रकार के गैर जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली एवम व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
