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MP News: सागर में करोड़पति और लखपति 10 दिन के लिए बने थे साधु, श्रावक संस्कार शिविर का हुआ समापन
Wed, 18 Sep 2024 08:20 PM IST
सागर ब्यूरो
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, सागर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, सागर
Published by: सागर ब्यूरो
Updated Wed, 18 Sep 2024 08:20 PM IST
सार
सागर जिले में करोड़पति और लखपति 10 दिन के लिए साधु बने थे। वहीं, श्रावक संस्कार शिविर का समापन हो गया है।
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सागर श्रावक संस्कार शिविर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सागर में पहली बार श्रावक संस्कार शिविर का आयोजन किया गया। निरपायक मुनि सुधा सागर जी महाराज के सानिध्य में भाग्योदय तीर्थ क्षेत्र में हुए इस आयोजन में देश-विदेश के करीब 5,000 श्रद्धालुओं ने शामिल होकर आत्मसाधना की। आठ सितंबर से शुरू हुए शिविर का समापन मंगलवार 17 सितंबर को हुआ, 18 सितंबर को श्री जी की भव्य शोभायात्रा निकाली गई।
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बता दें कि अभी तक 13 राज्यों में ऐसे 30 शिविरों का आयोजन हो चुका है, जिनमें अधिकतम साढ़े तीन हज़ार लोग शामिल हुए हैं। लेकिन सागर में नया कीर्तिमान रचा गया और यहां लगभग पांच हजार श्रद्धालुओं ने श्रावक संस्कार शिविर में साधना की है। इस शिविर में जो लोग शामिल हुए, वह 10 दिन तक केवल धोती और गमछा में रहे न ही इन लोगों ने परिवार वालों से बात की और न ही मोबाइल फोन का उपयोग किया। इनके भोजन के लिए जैन समाज के लोग साधुओं की तरह आहार कराने के लिए अपने घर ले गए
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चालीस लोगों ने दस दिन अन्न जल त्यागा
इस श्रावक संस्कार शिविर में चालीस लोग ऐसे भी शामिल हुए, जिन्होंने दस दिनों तक अन्न जल का त्याग कर कठिन साधना की। अन्न जल त्यागने से उन्हें कष्ट तो हुआ, लेकिन उन्होंने अपनी साधना नहीं छोड़ी। इन साधकों में 20 वर्ष से लेकर 50 वर्ष तक की आयु के लोग शामिल थे। शिविर में क्या करोड़पति, क्या लखपति यह भेद नहीं था, सभी एक जैसी साधना में लिप्त रहे।
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हुआ कष्ट, लेकिन नहीं छोड़ा व्रत
इस निर्जला उपवास के दौरान साधकों और असाध्य कष्ट हुआ, लेकिन उससे पार पाकर वह अपने व्रत को करने में सफल रहे। आगरा निवासी 24 वर्षीय नमन जैन यूएसए में फॉर्मा कंपनी मैें एचआर हैं। उन्होंने बताया कि इसके पूर्व चार साल तक आठ दिनों का निर्जला व्रत कर चुके हैं। लेकिन 10 दिन का पहली बार कर रहे हैं। व्रत करना आपकी मनोस्थिति पर निर्भर करता है। एक बार संकल्प कर लिया तो फिर साधक की साधना सफल होती है। उन्हें 10 दिवसीय निर्जला व्रत के दौरान न भूख लगी, न प्यास। बल्कि स्नान भी मुंह बंद करके करते थे। ताकि पेट में पानी न चला जाए, शरीर की आंतें सिकुड़ने पर पेट पर गीली पट्टी रखी, लेकिन व्रत सफल रहा।
श्रावक संस्कार शिविर में ललितपुर यूपी से आदित्य जैन जिन्होंने नीट क्वॉलीफाई किया है, वह भी आए। उनको इसी दौरान काउंसलिंग का बुलावा आया, लेकिन उन्होंने शिविर में अपनी साधना पूर्ण की। ऐसे ही शिविर में देश-विदेश से अनेक लोग आए, जिन्होंने माया मोह परिवार धन-दौलत तथा बाहरी सांसारिक सुविधाएं छोड़कर दस दिवसीय साधना को पूर्ण किया।
यह था शिविर का उद्देश्य
शिविर का उद्देश्य है कि भारतीय संस्कृति के अनुरुप जीवन जीने, संयम के साथ सात्विक भोजन, सामाजिक व्यवहारिक व राष्ट्रीय मूल्यों के साथ आत्म कल्याण करने के प्रशिक्षण के लिए इस प्रकार के शिविर का आयोजन किया जाता है। भाग्योदय तीर्थ में विराजमान मुनिश्री सुधासागर के ससंघ सानिध्य में सागर के इतिहास में पहली बार 31वें श्रावक संस्कार शिविर पर्वराज पर्यूषण पर्व के अवसर पर ऋषि पंचमी आठ से 17 सितंबर तक मुनि संघ के सानिध्य में आयोजित किया गया। जैन समाज के द्वारा इसकी भव्य तैयारी की गई थी। राज महल की तरह एक भव्य पंडाल बनाया गया था, जिसको तैयार करने बंगाल तथा राजस्थान के कारीगर आए थे।

श्रावक संस्कार शिविर

श्रावक संस्कार शिविर

श्रावक संस्कार शिविर
