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अनोखी परंपरा: दशहरे पर दशानन की होती है पूजा, प्रतिमा के सामने घूंघट में पहुंचती हैं महिलाएं

Thu, 14 Oct 2021 01:43 PM IST
प्रशांत कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: प्रशांत कुमार झा Updated Thu, 14 Oct 2021 01:43 PM IST
सार

मंदसौर के बारे में कहा जाता है कि प्राचीन समय में इसका नाम मंदोत्तरी हुआ करता था। मान्यता है कि रावण की पत्नी मंदोदरी मंदसौर की थीं। इसी लिहाज से मंदसौर रावण की ससुराल है। मंदसौर में नामदेव समाज की महिलाएं आज भी रावण की प्रतिमा के सामने घूंघट करती हैं।मान्यता है कि पूजा से बीमारियां दूर होती हैं। 

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Ravana worshiped on Dussehra to remove diseases in Mandsaur madhya pradesh
रावण की पूजा - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

देशभर में दशहरा पर रावण दहन या रावन वध की परंपरा है, लेकिन कुछ जगहों पर इस दिन रावण की पूजा करने की भी मान्यता है। मध्यप्रदेश के मंदसौर में रावण की पूजा करने की परंपरा है। मंदसौर के पास रावणग्राम में रावण की पहले पूजा की जाती है, यहां रावण वध या दहन को लेकर कई मान्यताएं हैं। यहां के निवासी रावण को दामाद मानते हैं।

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मान्यता है कि रावण की पत्नी मंदोदरी मंदसौर की रहने वाली थीं। प्राचीन समय में मंदसौर का नाम मंदोत्तरी हुआ करता था, इसीलिए मंदसौर रावण की ससुराल है। मंदसौर में नामदेव समाज की महिलाएं आज भी रावण की प्रतिमा के सामने घूंघट करती हैं। महिलाएं रावण के पैरों पर लच्छा (धागा) बांधती हैं। मान्यता है कि धागा बांधने से बीमारियां दूर होती हैं। यहां दशहरे के दिन रावण की पूजा की जाती है। हर साल दशहरे पर रावण के पूजन का आयोजन मंदसौर के नामदेव समाज द्वारा किया जाता है।
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रावण की प्रतिमा पर गधे का सिर
नामदेव समाज के लोगों के अनुसार खानपुरा में करीब 200 साल से भी पुरानी रावण की प्रतिमा लगी हुई थी। 2006-07 में आकाशीय बिजली गिरने से यह प्रतिमा खंडित हो गई। उसके बाद नगर पालिका ने रावण की दूसरी प्रतिमा की स्थापना कराई। हर साल नगर पालिका प्रतिमा का रखरखाव कराती है। रावण की प्रतिमा पर 4-4 सिर दोनों तरफ व एक मुख्य सिर है। मुख्य सिर के ऊपर गधे का एक सिर है। बुजुर्गों की मांने तो रावण की बुद्धि भ्रष्ट हो गई थी, उसके इसी अवगुण को दर्शाने के लिए प्रतिमा पर गधे का भी एक सिर लगाया गया है।
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इंदौर के परदेशीपुरा में है रावण का मंदिर
इंदौर के परदेशीपुरा में रावण का मंदिर है। यहां लोग मन्नत का धागा भी बांधते हैं। यह मंदिर महेश गौहर ने 2010 में बनवाया था। तब उनके पड़ोसियों ने भी उनके इस मंदिर को लेकर सवाल उठाए थे, लेकिन धीरे-धीरे अब लोगों का मंदिर पर विश्वास बढ़ता जा रहा है। लोग आरती में शामिल होते हैं।

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