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Ratlam News: बिल्डिंग पर मदरसे की जगह मिला कब्रिस्तान का बोर्ड, मदरसे का सामान-शिक्षक व बच्चे भी मिले गायब
Thu, 06 Feb 2025 09:33 PM IST
रतलाम ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रतलाम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रतलाम
Published by: रतलाम ब्यूरो
Updated Thu, 06 Feb 2025 09:33 PM IST
सार
रतलाम जिले के उमठपालिया में कब्रिस्तान की जमीन पर अवैध आवासीय मदरसा संचालित हो रहा था। बाल कल्याण आयोग की जांच के बाद मदरसा बंद कर दिया गया, लेकिन पुनः निरीक्षण के दौरान वहां सिर्फ कब्रिस्तान का बोर्ड मिला। बच्चे, शिक्षक और मदरसे का सारा सामान गायब था, जिससे मामला संदिग्ध बन गया।
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इस तरह कब्रिस्तान की जमीन पर बना दी गई अवैध बिल्डिंग
- फोटो : credit
विस्तार
रतलाम जिले की जावरा तहसील के ग्राम उमठपालिया में कब्रिस्तान की जमीन पर अवैध तरीके से आवासीय मदरसे का संचालन हो रहा था। जिसकी जांच के लिए 25 जनवरी को बाल कल्याण आयोग की टीम पहुंची थी। जिसके बाद बाल कल्याण आयोग की टीम ने प्रतिवेदन तैयार कर रतलाम कलेक्टर को जांच के लिए भेजा था। प्रतिवेदन पर जब कलेक्टर द्वारा गठित टीम जांच करने पहुंची तो यहां का नजारा कुछ और ही था। टीम को यहां मदरसे की बजाय कब्रिस्तान का बोर्ड टंगा दिखा। मदरसे में रहने वाले सारे बच्चे और टीचर भी गायब मिले। इतना ही नहीं टीम को मदरसे के अंदर का सारा सामान भी नदारद मिला।
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रतलाम जिले की जावरा तहसील के ग्राम उमठपालिया में कब्रिस्तान की जमीन पर दो साल से अवैध तरीके से आवासीय मदरसे का संचालन किया जा रहा था। इसकी जांच के लिए 25 जनवरी को बाल कल्याण आयोग की टीम पहुंची थी। बाल कल्याण आयोग की टीम को यहां 77 बच्चे मिले। जिन्हें सिर्फ मजहबी तालीम दी जा रही थी। यहां अध्ययनरत बच्चों में 72 नाबालिग और पांच बालिग बच्चे शामिल थे। इनमें मध्यप्रदेश, राजस्थान तथा उत्तर प्रदेश के बच्चे शामिल हैं। टीम ने जांच में पाया कि एक भी बच्चे का स्कूल या शैक्षणिक संस्थान में एडमिशन नहीं है। बाल संरक्षण आयोग की टीम ने मदरसा बंद करवाकर बच्चों को परिजन के पास पहुंचाने के निर्देश दिए थे। मदरसे के प्रिंसिपल मोहम्मद शोएब उत्तर प्रदेश और मोहम्मद शहजाद झारखंड के रहने वाले हैं।
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जिसके बाद बाल कल्याण आयोग की टीम ने प्रतिवेदन तैयार कर रतलाम कलेक्टर को जांच के लिए भेजा था। प्रतिवेदन पर जब कलेक्टर द्वारा गठित टीम जांच करने पहुंची तो यहां का नजारा कुछ और ही था। टीम को यहां मदरसे की बजाय कब्रिस्तान का बोर्ड टंगा दिखा। मदरसे में रहने वाले सारे बच्चे और टीचर भी गायब मिले। इतना ही नहीं टीम को मदरसे के अंदर का सारा सामान भी नदारद मिला।
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बाल आयोग के निरीक्षण के बाद मदरसे में रहने वाले बच्चों के सबंन्ध में बनाए कानूनों के तहत बाल गृह इत्यादि में पहुंचाने के उद्देश्य से मंगलवार को बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष शंभू चौधरी, मनमोहन सिंह और वैदेही कोठारी उमठपालिया पहुंचे थे। इसी के साथ बुधवार को कलेक्टर के द्वारा बनाई टीम जिला शिक्षा अधिकारी अनीता सागर के नेतृत्व में मदरसे पर पहुंचीं, जिसमें सहायक संचालक महिला बाल विकास के रविंद्र मिश्रा एसडीएम त्रिलोचन गौड़ नगर पुलिस अधीक्षक दुर्गेश आर्मो मौजूद थे।
बाल कल्याण समिति के सदस्य वहां पहुंच कर हैरान रह गए। अब यहां मदरसे की जगह अताए रसूल कब्रिस्तान का बोर्ड लगा हुआ था और इस भवन पर ताला लगा हुआ था। समिति के सदस्यों ने पड़ोस में रहने वाले व्यक्ति से चाबी मंगवाकर ताला खुलवाया और जब भीतर जाकर देखा तो वे आश्चर्यचकित रह गए। अभी दस दिन पहले जहां मदरसा चलाया जा रहा था, वहां मदरसे का नामोनिशान गायब कर दिया गया था। जिन कमरों में बच्चों को रखा जाता था, उन कमरों को भी पूरी तरह साफ कर दिया था। प्रिंसिपल रूम से टेबल कुर्सियां तक नदारद थीं। सारे कागजात और ब्लैकबोर्ड व अन्य सामान भी नदारद मिले।
जांच करने पहुंची टीम ने जब मदरसे के प्रिंसिपल मोहमद शोएब से पूछताछ की तो प्रिंसिपल ने बताया कि मदरसे को निरीक्षण के बाद ही बन्द कर दिया था। मो. शोएब ने तो यह मानने से ही इनकार कर दिया कि यहां आवासीय हॉस्टल संचालित था। मो. शोएब ने समिति सदस्यों को कहा कि यहां कोई बच्चा रहता नहीं था, बल्कि सभी बच्चे सिर्फ दो घंटे के लिए आते थे, जबकि बाल आयोग के निरीक्षण के दौरान यह पता चला था कि मदरसे में मध्यप्रदेश के अलावा राजस्थान और उत्तर प्रदेश तक के बच्चों को लाकर रखा गया था। इनमें से दो बच्चे तो लावारिस भी थे। मो. शोएब ने बताया कि मदरसे में तीन शिक्षक थे, जो कि मदरसा बन्द होने के बाद यहां से चले गए हैं। समिति सदस्यों को उसने बताया कि सभी बच्चों को उनके अभिभावकों को सौंप दिया है। जबकि वास्तविकता यह है कि 25 जनवरी के निरीक्षण के बाद बिहार और उत्तर प्रदेश में रहने वाले लोग अपने बच्चों को लेने के लिए इतनी जल्दी आ ही नहीं सकते थे। मदरसे के बच्चों को कहां भेजा गया है, यह गंभीर जांच का विषय है।
जांच में यह भी स्पष्ट हुआ था कि मदरसे की बिल्डिंग कब्रिस्तान की जमीन पर बनी होकर अवैध है। समिति के सदस्यों ने उक्त भूमि के सबन्ध में दस्तावेज देखने की कोशिश की, लेकिन कब्रिस्तान समिति का कोई पदाधिकारी समिति के निरीक्षण के दौरान उपस्थित नहीं हुआ। मदरसे में 12 दिन बाद कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी अनीता सागर के नेतृत्व में टीम बनाकर निरीक्षण के लिए भेजी टीम ने जब मौके पर जाकर निरीक्षण किया तो वहां मदरसा जैसा कुछ भी नहीं मिला। मोहमद शोएब ने निरीक्षण के दौरान टीम को सभी जानकारी उपलब्ध कराई। टीम ने केवल जाकर मौके पर पंचनामा बनाकर रिपोर्ट आगे भेज दी।

इस तरह कब्रिस्तान की जमीन पर बना दी गई अवैध बिल्डिंग- फोटो : credit
