Power Cut: सीहोर में बिजली संकट पर भड़का जनाक्रोश, गांव-गांव सड़कों पर उतरे लोग; 48 घंटे का दिया अल्टीमेटम
सीहोर जिले में अघोषित बिजली कटौती से ग्रामीणों का गुस्सा भड़क गया है। बिजौरी समेत कई गांवों में प्रदर्शन हुए। पेयजल संकट, गर्मी, पढ़ाई और सिंचाई प्रभावित है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जल्द सुधार नहीं हुआ तो उग्र आंदोलन और चक्का जाम किया जाएगा।
विस्तार
सीहोर जिले में अघोषित बिजली कटौती अब प्रशासन और बिजली वितरण कंपनी के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। भीषण गर्मी, पेयजल संकट और घंटों बिजली गुल रहने से परेशान ग्रामीणों का गुस्सा अब सड़कों पर उतर आया है। कहीं ग्रामीण विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं तो कहीं किसान कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल रहे हैं।
मंगलवार को बिजौरी गांव में बिजली कटौती के खिलाफ ग्रामीणों का आक्रोश खुलकर सामने आया। घंटों बिजली गुल रहने और लगातार ट्रिपिंग से परेशान ग्रामीणों ने विद्युत विभाग के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। करीब दो घंटे तक चले प्रदर्शन के दौरान जमकर नारेबाजी हुई। पूर्व सरपंच दीपेश राठौर ने कहा कि गांव में बिजली आने-जाने का कोई तय समय नहीं है। लोग पूरी रात जागने को मजबूर हैं। गर्मी से हालात बदतर हैं और बिजली विभाग केवल आश्वासन दे रहा है।
स्थिति तनावपूर्ण होते देख मंडी थाना पुलिस मौके पर पहुंची। टीआई सुनील मेहर ने पुलिस बल के साथ पहुंचकर ग्रामीणों को समझाइश दी। वहीं विद्युत विभाग की ओर से एई सतीश चौहान ने ग्रामीणों से चर्चा कर जल्द व्यवस्था सुधारने का भरोसा दिया। प्रदर्शन में पूर्व सरपंच दीपेश राठौर, जनपद सदस्य जितेंद्र वर्मा, सरपंच प्रतिनिधि राकेश वर्मा, पूर्व सैनिक निकेश मेवाड़ा, पम्पू वर्मा, सोनू राठौर और पदम वर्मा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी कि यदि 48 घंटे में बिजली व्यवस्था नहीं सुधरी तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
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करणी सेना युवा शक्ति ने भी खोला मोर्चा
बिजली संकट को लेकर करणी सेना युवा शक्ति ने भी प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप सिंह राजपूत के नेतृत्व में सोमवार को एक दर्जन गांवों के किसान और ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे और जोरदार प्रदर्शन किया। अलाहाखेड़ी, मोगराराम, हसनाबाद जहांगीरपुर, नयापुरा, धबोटी, धामनखेड़ा, खामलिया, पचामा और थूना समेत कई गांवों के लोगों ने बिजली कंपनी पर ग्रामीण क्षेत्रों के साथ भेदभाव का आरोप लगाया। कुलदीप सिंह राजपूत ने चेतावनी दी कि यदि 72 घंटे के भीतर अघोषित बिजली कटौती बंद नहीं हुई तो जिलेभर में चक्का जाम आंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन और बिजली कंपनी की होगी।
पेयजल संकट, पढ़ाई और सिंचाई पर असर
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली कटौती से पेयजल संकट गहरा गया है। मोटर और पंप नहीं चल पाने से पानी की सप्लाई प्रभावित हो रही है। कई गांवों में महिलाओं को पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है। बिजली कटौती का असर बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र रात में पढ़ाई नहीं कर पा रहे। वहीं किसानों का कहना है कि सिंचाई व्यवस्था चरमरा गई है और फसलें प्रभावित होने लगी हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि दिन में मेंटेनेंस और रात में लोड शेडिंग के नाम पर घंटों बिजली बंद रखी जा रही है। रातभर अंधेरे के कारण चोरी, सांप-बिच्छू और अन्य हादसों का खतरा भी बढ़ गया है।
कलेक्टर ने अधिकारियों की लगाई क्लास
लगातार शिकायतों के बाद कलेक्टर बाला गुरु ने टीएल बैठक में विद्युत विभाग के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में निर्बाध बिजली आपूर्ति सर्वोच्च प्राथमिकता है। कलेक्टर ने कंट्रोल रूम को 24 घंटे सक्रिय रखने, हर शिकायत का रिकॉर्ड बनाने और ट्रांसफार्मर खराब होने, लाइन फॉल्ट जैसी तकनीकी समस्याओं का तत्काल समाधान करने के निर्देश दिए। साथ ही यह भी कहा कि यदि मेंटेनेंस के लिए बिजली बंद करनी पड़े तो इसकी पूर्व सूचना आमजन को दी जाए। इसके बावजूद जिले में हालात जस के तस बने हुए हैं और लोगों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है।
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