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पुलिस की चूक बनी बड़े हादसे की वजह
अमर उजाला, ग्वालियर
Updated Mon, 14 Oct 2013 10:26 AM IST
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पांच साल पहले भी यहां एक बड़ा हादसा हो चुका है, फिर भी व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं थी। अफवाहों को फैलने से रोकने और अफरातफरी की स्थिति को संभालने में व्यवस्था नाकाम रही। फिर वही गलती दोहराई गई।
लाठियां चलाकर व्यवस्था बनाने के पुलिस के प्रयास ने स्थिति और बिगाड़ दी। नतीजतन कुछ मिनटों में यहां मंजर बदल गया। जहां कुछ देर पहले मां के जयकारे गूंज रहे थे, वहां चीख और पुकार मच गई। चारो तरफ लाशें पड़ी थी, लोग लाशों के बीच अपनों को ढूंढ रहे थे।
हर साल रतनगढ़ के माता मंदिर में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान के श्रद्धालु पहुंचते हैं। रेलिंग टूटने की अफवाह के बाद लोगों में भगदड़ मची। इसे रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया।
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इससे भगदड़ रुकने होने के बजाए और बढ़ गई। इसके बाद तो सारा मंजर ही बदल गया। माता मंदिर के नजदीक बह रही सिंध नदी के पुल पर जहां भी नजर जाती लाशों के ढेर व घायल पड़े नजर आ रहे थे।
पुल पर हजारों की संख्या में यात्रियों के झोले, बैग, जूते, चप्पल व उनका सामान बिखरा पड़ा था। घायलों और मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। बदहवासी में लोग अपनों को खोज रहे थे।
इस हादसे में पूरी तरह से प्रशासन की नाकामी सामने आई। मेले में भीड़ को देखते हुए व्यवस्थाएं नहीं थी। भीड़ पूरी तरह से अनियंत्रित थी। न तो मेला सेक्टर बनाए गए थे और न मेला क्षेत्र में मजिस्ट्रेट तैनात थे। पुलिस भी पर्याप्त संख्या में नहीं थी।
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लाठियां चलाकर व्यवस्था बनाने के पुलिस के प्रयास ने स्थिति और बिगाड़ दी। नतीजतन कुछ मिनटों में यहां मंजर बदल गया। जहां कुछ देर पहले मां के जयकारे गूंज रहे थे, वहां चीख और पुकार मच गई। चारो तरफ लाशें पड़ी थी, लोग लाशों के बीच अपनों को ढूंढ रहे थे।
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हर साल रतनगढ़ के माता मंदिर में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान के श्रद्धालु पहुंचते हैं। रेलिंग टूटने की अफवाह के बाद लोगों में भगदड़ मची। इसे रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया।
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इससे भगदड़ रुकने होने के बजाए और बढ़ गई। इसके बाद तो सारा मंजर ही बदल गया। माता मंदिर के नजदीक बह रही सिंध नदी के पुल पर जहां भी नजर जाती लाशों के ढेर व घायल पड़े नजर आ रहे थे।
पुल पर हजारों की संख्या में यात्रियों के झोले, बैग, जूते, चप्पल व उनका सामान बिखरा पड़ा था। घायलों और मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। बदहवासी में लोग अपनों को खोज रहे थे।
इस हादसे में पूरी तरह से प्रशासन की नाकामी सामने आई। मेले में भीड़ को देखते हुए व्यवस्थाएं नहीं थी। भीड़ पूरी तरह से अनियंत्रित थी। न तो मेला सेक्टर बनाए गए थे और न मेला क्षेत्र में मजिस्ट्रेट तैनात थे। पुलिस भी पर्याप्त संख्या में नहीं थी।
