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हादसे से डरे नहीं श्रद्धालु, हजारों पहुंचे मंदिर
अमर उजाला, ग्वालियर
Updated Tue, 15 Oct 2013 12:52 AM IST
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नवमी के दिन रतनगढ़ मंदिर में हुए हादसे के बाद भी देवी भक्तों की आस्था कम नहीं हुई है। सोमवार को भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां मत्था टेकने पहुंचे। मंदिर परिसर और रास्ते में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। जगह जगह बेरीकेड भी लगाए गए थे।
रविवार को हुए हादसे का कोई असर श्रद्धालुओं पर नहीं दिखा। सोमवार को भी माता के जयकारे लगाते हुए लोगों की भीड़ मंदिर की ओर बढ़ रही थी। भारी संख्या में माता भक्त जबारे लेकर भी आए और उन्होंने बाकायदा मंदिर परिसर व नदी में जबारे विसर्जित किए।
हालांकि हादसे से सबक लेते हुए प्रशासन ने सिंध नदी के पुल से पहले ही बेरीकेडिंग लगा दी थी। मंदिर परिसर की ओर आने वाले सभी मार्गों पर नाकेबंदी भी कर रखी थी। वाहनों को मंदिर व पुल के पहले ही रोका जा रहा था।
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इसके साथ ही पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने रतनगढ़ माता मंदिर पर जाने के लिए पहाड़ी पर बनी सीढ़ियों पर भी भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर रखा था।
जबकि रविवार को पांच लाख की भीड़ संभालने के लिए मात्र एक दर्जन पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया था। अब हादसे के बाद सोमवार को दो सौ पुलिस कांस्टेबलों के साथ दो एएसपी और चार सीओ तैनात किए गए थे।
इस पर भी नजर रखी जा रही थी कि सिंध नदी के पुल पर ज्यादा भीड़ एकत्रित न हो जाए। इसी को देखते हुए भीड़ को रोक-रोक निकाला जा रहा था।
जान बचाने को साड़ियों की रस्सी बनाकर नदी में कूदीं
रतनगढ़ हादसे के दौरान महिलाओं ने जान बचाने के लिए साड़ियों की रस्सी बनाकर पुल की रेलिंग से बांध लिया और उसे पकड़कर नदी में कूद गई।
जिनको तैरना आता था वह तो बाहर निकल आईं, लेकिन जो तैरना नहीं जानती थीं, वह डूब गई। पुल पर लगभग 40-50 साड़ियां रेलिंग से बंधी थी, लेकिन प्रशासन ने सोमवार को इन साड़ियों को हटवा दिया।
ग्रामीणों ने बताया कि महिलाओं के साथ-साथ कुछ पुरुष भी साड़ियों के सहारे पानी में कूद गए थे।
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रविवार को हुए हादसे का कोई असर श्रद्धालुओं पर नहीं दिखा। सोमवार को भी माता के जयकारे लगाते हुए लोगों की भीड़ मंदिर की ओर बढ़ रही थी। भारी संख्या में माता भक्त जबारे लेकर भी आए और उन्होंने बाकायदा मंदिर परिसर व नदी में जबारे विसर्जित किए।
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हालांकि हादसे से सबक लेते हुए प्रशासन ने सिंध नदी के पुल से पहले ही बेरीकेडिंग लगा दी थी। मंदिर परिसर की ओर आने वाले सभी मार्गों पर नाकेबंदी भी कर रखी थी। वाहनों को मंदिर व पुल के पहले ही रोका जा रहा था।
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इसके साथ ही पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने रतनगढ़ माता मंदिर पर जाने के लिए पहाड़ी पर बनी सीढ़ियों पर भी भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर रखा था।
जबकि रविवार को पांच लाख की भीड़ संभालने के लिए मात्र एक दर्जन पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया था। अब हादसे के बाद सोमवार को दो सौ पुलिस कांस्टेबलों के साथ दो एएसपी और चार सीओ तैनात किए गए थे।
इस पर भी नजर रखी जा रही थी कि सिंध नदी के पुल पर ज्यादा भीड़ एकत्रित न हो जाए। इसी को देखते हुए भीड़ को रोक-रोक निकाला जा रहा था।
जान बचाने को साड़ियों की रस्सी बनाकर नदी में कूदीं
रतनगढ़ हादसे के दौरान महिलाओं ने जान बचाने के लिए साड़ियों की रस्सी बनाकर पुल की रेलिंग से बांध लिया और उसे पकड़कर नदी में कूद गई।
जिनको तैरना आता था वह तो बाहर निकल आईं, लेकिन जो तैरना नहीं जानती थीं, वह डूब गई। पुल पर लगभग 40-50 साड़ियां रेलिंग से बंधी थी, लेकिन प्रशासन ने सोमवार को इन साड़ियों को हटवा दिया।
ग्रामीणों ने बताया कि महिलाओं के साथ-साथ कुछ पुरुष भी साड़ियों के सहारे पानी में कूद गए थे।
