MP Urban Body Elections: महापौर-अध्यक्ष सीधे मतदाता से चुनने की तैयारी, वार्ड आरक्षण कार्यक्रम पर कांग्रेस का सवाल
प्रदेश सरकार नगर निगम में महापौर और नगर पालिका, नगर परिषद में अध्यक्ष का चुनाव सीधे मतदाता यानी प्रत्यक्ष प्रणाली से कराने के लिए अध्यादेश लेकर आ रही है। इसके लिए प्रस्ताव बनाकर विधि विभाग को भेजा गया है। वहीं, नगरीय निकायों के वार्ड परिसीमन का कार्यक्रम जारी किया गया है। इस पर कांग्रेस ने चुनाव कराने की सरकार की मंशा पर ही सवाल खड़े कर दिए है।
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सुप्रीम कोर्ट के बिना ओबीसी आरक्षण के चुनाव कराने आदेश के बाद अब प्रदेश सरकार महापौर और अध्यक्ष का चुनाव सीधे मतदाता यानी प्रत्यक्ष प्रणाली से कराने के लिए अध्यादेश लेकर आ रही है। इसके लिए प्रस्ताव बनाकर विधि विभाग को भेजा गया है। वहीं, नगरीय निकायों के वार्ड परिसीमन का कार्यक्रम जारी किया गया है। इस पर कांग्रेस ने चुनाव कराने की सरकार की मंशा पर ही सवाल खड़े कर दिए है।
सरकार ने नगर निगम में महापौर और नगर पालिका, नगर परिषद में अध्यक्ष को सीधे मतदाता यानी प्रत्यक्ष प्रणाली से कराने की तैयारी कर रही है। इसके लिए प्रस्ताव बनाकर नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने वित्त विभाग को भेजा है। दरअसल 2015 तक महापौर-अध्यक्ष के चुनाव सीधे मतदाता ही चुन रहे थे, लेकिन कमलनाथ सरकार ने अप्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव कराने का निर्णय लिया था। इसके बाद शिवराज सरकार ने कमलनाथ के निर्णय को अध्यादेश लाकर पलट दिया था, लेकिन सरकार ने इसे विधानसभा में पेश ही नहीं किया। इस वजह से अभी भी अप्रत्यक्ष प्रणाली यानी पार्षदों के महापौर और अध्यक्ष चुनने की व्यवस्था है। अब सरकार इसको बदलने की तैयारी कर रही है।
इसके अलावा नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने 6 जिलों बालाघाट, सागर, खंडवा, अनूपपुर, सिंगरौली, रायसेन में वार्ड परिसीमन और आरक्षण की प्रकिया का कार्यक्रम के निर्देश जारी किए है। इन जिलों में 14 जून को वाउर् आरक्षण का प्रक्राशन किया जाएगा। इसको लेकर कांग्रेस नेता सैयद जफर ने सरकार से सवाल किया है कि यदि सरकार नगर निकाय चुनाव कराने के लिए तैयार थी तो अभी तक वार्डों का परिसीमन और आरक्षण क्यों नहीं हो पाया। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निकाय और पंचायत चुनाव को लेकर मध्य प्रदेश की जनता को प्रदेश की सरकार धोखा दे रही है।
विभाग के कार्यक्रम के अनुसार 20 मई को वार्डों की संख्या के निर्धारण एवं वार्ड परिसीमन संबंधी अधिसूचना का प्रकाशन किया जाएगा। 31 मई को दावे/आपत्तियां का निराकरण कर प्रकाशन के लिए आयुक्त नगरीय निकाय को भेजा जाएगा। 3 जून को आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास के परीक्षण के बाद विभाग को भेजा जाएगा। इसके बाद 5 जून को वार्ड विभाजन का अंतिम प्रकाशन किया जाएगा। 10 जून को वार्ड आरक्षण करने के बाद 14 जून को अंतिम प्रकाशन किया जाएगा।
बता दें सुप्रीम कोर्ट ने 10 मई को प्रदेश में पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव के लिए 15 दिन में अधिसूचना जारी करने के आदेश दिए है। साथ ही कोर्ट ने सरकार की ट्रिपल टेस्ट रिपोर्ट को आधी अधूरा बता कर बिना ओबीसी आरक्षण के चुनाव कराने को कहा है। हालांकि सरकार ने कोर्ट से आदेश में मॉडिफिकेशन के लिए आवेदन दिया है। इस पर 17 मई को सुनवाई होनी है। वहीं, राज्य निर्वाचन आयोग ने कोर्ट के आदेश के बाद चुनाव की तैयारी तेज कर दी है। आयोग का कहना है कि जून माह में दोनों चुनाव करा लिए जाएंगे। आयोग ने कहा कि नगरीय निकाय चुनाव ईवीएम और पंचायत चुनाव बैलेट पेपर से आयोजित होंगे।
