फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   mp obc reservation 27 percent supreme court caveat madhya pradesh

ओबीसी रिजर्वेशन: एमपी में अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण पर सियासत तेज, सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दायर

Sat, 17 Oct 2026 05:17 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Sat, 17 Oct 2026 05:17 PM IST
सार

मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को लेकर कानूनी और राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। हाई कोर्ट के आदेश के बाद सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दायर की गई है। वहीं, भेड़ाघाट में पिछड़ा वर्ग संगम के दौरान सभी 230 विधानसभा सीटों पर आरक्षण और अधिकारों की मांग उठाने की रणनीति बनाई गई।

विज्ञापन
mp obc reservation 27 percent supreme court caveat madhya pradesh
ओबीसी आरक्षण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण के मुद्दे पर अदालती कार्रवाई के साथ-साथ राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। हाई कोर्ट के उस आदेश के बाद प्रदेश में सियासी बयानबाजी तेज हुई है, जिसमें अदालत ने स्पष्ट किया कि राज्य में फिलहाल ऐसी कोई स्थिति नहीं है जिससे अन्य पिछड़ा वर्ग को तुरंत 27 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए और केवल 14 प्रतिशत आरक्षण ही मान्य रहेगा। इस फैसले के बाद सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस एक-दूसरे पर दोषारोपण कर रहे हैं।
विज्ञापन


वहीं, पिछड़ा वर्ग से जुड़े विभिन्न सामाजिक संगठनों ने प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों पर अपने अधिकारों की आवाज उठाने के लिए व्यापक आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए जबलपुर के भेड़ाघाट में दो दिवसीय पिछड़ा वर्ग संगम का आयोजन किया गया है, जिसमें राज्यभर के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें- 27% ओबीसी आरक्षण की बहाली के लिए सभी जिलों में प्रदर्शन, 28 अक्तूबर को संभाग स्तर पर आंदोलन
विज्ञापन
विज्ञापन


भेड़ाघाट संगम में बनी व्यापक रणनीति
भेड़ाघाट में इस दो दिवसीय संगम के दौरान प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रतिनिधियों ने न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका में वर्ग के समुचित प्रतिनिधित्व पर गहन मंथन किया। सम्मेलन में मौजूद वक्ताओं ने निर्णय लिया कि प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों में आरक्षण और अधिकारों के सवाल को प्राथमिकता से उठाया जाएगा। प्रतिनिधियों ने हाई कोर्ट के फैसले के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में शामिल नेताओं और समाजसेवियों ने इस बात पर जोर दिया कि आरक्षण के अधिकार को प्राप्त करने के लिए प्रदेश स्तर पर एक प्रभावी सामाजिक और राजनीतिक लामबंदी आवश्यक है, जिसे राज्य के प्रत्येक क्षेत्र तक पहुंचाया जाएगा।

कमलनाथ सरकार के निर्णय से उपजा विवाद
अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण से जुड़ा यह विवाद वर्ष 2019 में तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के एक बड़े निर्णय के साथ आरंभ हुआ था। कमलनाथ सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का अध्यादेश जारी किया था। इसके तत्काल बाद इस फैसले को अदालत में चुनौती दी गई, जिसके चलते यह मामला पिछले आठ वर्षों से मध्य प्रदेश हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में कानूनी बहस का केंद्र बना हुआ है। प्रदेश की कुल जनसंख्या में अन्य पिछड़ा वर्ग की बड़ी हिस्सेदारी को देखते हुए दोनों प्रमुख राजनीतिक दल इस मुद्दे को अत्यंत संवेदनशील मान रहे हैं। कांग्रेस को आशा थी कि इस कदम से उसे बड़ा राजनीतिक लाभ मिलेगा, परंतु कानूनी जटिलताओं के कारण मामला उलझता चला गया।


ये भी पढ़ें- युवाओं ने भरी हुंकार: भोपाल में छात्रवृत्ति और आरक्षण पर प्रदर्शन, सरकार को दिया तीन दिन का अल्टीमेटम

राजनीतिक खींचतान
आरक्षण को लेकर जारी खींचतान के बीच कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने राज्य सरकार की पैरवी पर प्रश्नचिह्न लगाए हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार अदालत में अन्य पिछड़ा वर्ग के पक्ष में आवश्यक सामाजिक व प्रशासनिक आंकड़े मजबूती के साथ प्रस्तुत नहीं कर पाई। यदि सरकार पर्याप्त तथ्य और आंकड़े समय पर रखती तो न्यायिक स्थिति भिन्न हो सकती थी। उन्होंने राजनीतिक दल के सीधे पक्षकार बनने की वैधानिक स्थिति को भी अस्पष्ट बताया।

कैबिनेट मंत्री ने कहा- विवाद की जड़ कांग्रेस सरकार
दूसरी ओर, प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री राकेश सिंह ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इस समूचे विवाद की जड़ कांग्रेस सरकार का अपरिपक्व और जल्दबाजी में लाया गया अध्यादेश था, जिसका कोई मजबूत कानूनी आधार नहीं था। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग को उसका अधिकार दिलाने के प्रति प्रतिबद्ध है और हाई कोर्ट के निर्णय के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। वहीं, इस मामले में सामान्य वर्ग के छात्रों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता आदित्य सांघी ने सुप्रीम कोर्ट में एक कैविएट याचिका दायर की है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शीर्ष अदालत द्वारा दूसरे पक्ष की बात सुने बिना कोई भी एकतरफा अंतरिम या अंतिम आदेश जारी न किया जाए।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed