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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   MP News Uproar over water campaign started to save Mahanadi and against sand mafia in Katni

Katni News: पानी को लेकर मचा बवाल, महानदी बचाने और रेत माफियाओं के खिलाफ शुरू हुआ अभियान

Thu, 06 Apr 2023 06:48 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कटनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कटनी Published by: अरविंद कुमार Updated Thu, 06 Apr 2023 06:48 PM IST
सार

मध्यप्रदेश के कटनी जिले में महानदी बचाओ अभियान शुरू किया गया है। इसकी मुख्य वजह रेत माफिया द्वारा नदियों के बीचों बीच पोकलेन मशीन उतारकर नदी पर सड़क बनाते हुए उनका स्वरूप बदलना है, जिसका उपयोग रेत माफिया नियम के खिलाफ तरीके से रेत निकालने में करते हैं।

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MP News Uproar over water campaign started to save Mahanadi and against sand mafia in Katni
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कटनी जिले में लगातार रेत उत्खनन से नदी का जलस्तर नीचे होते जा रहा है, जिसका असर आसपास के गांव में साफ देखने को मिल रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि जब से रेत कंपनी विष्टा द्वारा महानदी और उमरार नदी से रेत निकालने का काम शुरू किया है, तब से गांव का पूरा जलस्तर खत्म हो गया।

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लादहर ग्राम के किसान ने बताया कि वो तरबूज और खरबूज की खेती करते हैं। इस बार पानी न मिलने से उनकी फसल सूख गई। पानी न मिलने का कारण बताते हुए किसान ने कहा कि रेत कंपनी द्वारा नदी से रेत निकाल-निकाल कर उसे नाले में तब्दील कर दिया है। इससे जलस्तर और नीचे चला गया, अब घर के कुएं और खेत का बोर पर पानी नहीं बचा। फसल का नुकसान अलग हुआ। पीड़ित की माने तो उसने 50 हजार रुपये खर्च करके फसल बोई थी, रेत कंपनी वालों से शिकायत करो तो पैसे का रौब दिखाते हैं और मुझे झूठे मामले में फसाने की धमकी देते हैं। 
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महानदी बचाओ अभियान...
महानदी बचाओ अभियान की शुरुआत बिंदेश्वरी पटेल द्वारा महानदी और उमरार नदी के अस्तित्व को बचाने के लिए शुरू किया था, जिसके लिए उनके द्वारा जिला प्रशासन को ज्ञापन देकर अवैध खनन पर रोकथाम लगाते हुए नदियों को संरक्षित करने की मांग की थी। जब प्रशासन से सहयोग न मिला तो उन्होंने खुद नदी से लगे आसपास गांवों में जाकर सभा आयोजित करते हुए जल के महत्व को समझते हुए ग्रामीणों को जागरुक किया। इसका असर ये हुआ कि महानदी बचाओ आंदोलन पर आज ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हुए गांव की गलियों में नदी बचाओ किसान बचाओ जैसे नारे लगाते दिखे।
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अवैध रेत खदान तक देखने को मिला...
ये रैली बड़वारा और बरही क्षेत्र के विभिन्न ग्रामों से शुरू हुई, जिसका अंत नदी घाटों में पहुंचकर हुआ। इस दौरान लादहर और लुहारवारा ग्राम की अवैध रेत खदान तक देखने को मिला। इस दौरान नदियों के बीचों बीच चल रही चार पोकलेन समेत अन्य बड़ी-बड़ी मशीने देखने को मिली। नदियों से अवैध रेत उत्खनन में लिप्त पाई गई। 

ग्रामीणों ने बताया, ये रेत के मोह में ये घाट पर उतरकर 20 से 25 फीट गहरे गड्ढे बना देते हैं, जिसमें कई बार गांव के मवेशी और ग्रामीण डूब चुके हैं। वहीं, जब हमारी रैली नदी के घाट पहुंची तो सभी मशीनें नदी छोड़ते हुए खेत में खड़ी कर भाग निकले। यहां पहुंचकर प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारेबाजी करते हुए प्रदेश सरकार समेत जिला प्रशासन को कोसते नजर आए।


विंदेश्वरी पटेल ने बताया, महानदी और उमरार नदी के अस्तित्व को बचाने के लिए 25 तारीख को सांकेतिक धरना प्रदर्शन करते हुए जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा था। उसके बाद लगातार नदियों के किनारे बसे गांव जाकर लोगों से बात की, जिसके बाद आज बड़ा आंदोलन शुरू किया है। विंदेश्वरी बताते हैं, वो अब तक 18 गांव जा चुके हैं। जहां के सभी घाटों में एक बीच सामान्य देखने मिलती है, पानी की जगह सिर्फ रेत। जो उत्खनन कंपनी विष्टा के कारण है, जिसमें जिले के प्रभावी नेता का हाथ है। ऐसे ही नेताओं के चलते के धीमरखेड़ा की नदी खत्म हो गई। लोगों को पता ही नहीं, इस नाम की नदी भी अस्तित्व में रही होगी। यही हाल रहा तो कुछ समय बाद महानदी और उमरार नदी का यही हाल होगा। यहां पानी देखने को नहीं मिलेगा। इसलिए हम लोग आंदोलन करते हुए इन नदियों को बचाने में लगे हैं, जो निरंतर जारी रहेगा।

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