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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   MP News: Tribal leader and MLA Dr. Heeralal Alava in Madhya Pradesh revealed the 2023 plan of JAIS

MP News: ‘आप’ को ना, कांग्रेस से गठबंधन पर असमंजस, 2023 के लिए आदिवासी नेता हीरालाल अलावा ने बताया अपना प्लान

Fri, 18 Nov 2022 06:59 PM IST
Anand Pawar आनंद पवार
Updated Fri, 18 Nov 2022 06:59 PM IST
सार

जयस के संरक्षक डॉ. हीरालाल अलावा ने कहा कि यह संगठन स्वतंत्र था और रहेगा। भाजपा 2023 में अपनी सरकार बनाने के लिए आदिवासियों के नाम का राग रट रही है। हकीकत में आदिवासियों को अधिकार भारतीय जनता पार्टी की सरकार में नहीं मिला है। 

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MP News: Tribal leader and MLA Dr. Heeralal Alava in Madhya Pradesh revealed the 2023 plan of JAIS
जयस के राष्ट्रीय संरक्षक डॉ. हीरालाल अलावा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव में एक साल से कम का समय बचा है। इसके पहले ही आदिवासी वर्ग को साधने के लिए राजनीतिक दल कवायद कर रहे है। मध्यप्रदेश में जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन (जयस) के राष्ट्रीय संरक्षक डॉ. हीरालाल अलावा ने 2023 के विधानसभा चुनाव को लेकर साफ कहा कि जयस अपने दम पर 80 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। उन्होंने आम आदमी पार्टी (आप) और कांग्रेस से गठबंधन से सीधे-सीधे इनकार किया है। पेश है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश- 

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विधानसभा चुनाव में एक साल से भी कम समय बचा है। जयस की क्या रणनीति है?
डॉ. अलावाः जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन ने जयस युवा मिशन-2023 का नारा दिया है। इस नारे के तहत हमने आदिवासी वर्ग के साथ-साथ अन्य वर्गों को भी जोड़ा है। मांझी, धनगर, मानकर समेत जो ओबीसी वर्ग की पिछड़ी जातियां है, वह भी जयस के साथ जुड़ रही हैं। हम सभी वर्ग के युवाओं को मध्यप्रदेश की विधानसभा में भेजने के लिए 47 आरक्षित सीटों के साथ-साथ 80 सीटों पर अपनी जमीन तैयार कर रहे हैं।
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जयस की तैयारी चुनाव लड़ने की है, लेकिन पहले ही संगठन में टूट और बिखराव दिख रहा है?
डॉ. अलावाः फूट और बिखराव वाली कोई बात नहीं है। जयस संगठन 2011 में बना और एकजुट है। कुछ लोग जयस के बारे में समय-समय पर भ्रम और अफवाह फैलाते हैं। जयस चार साल से विधानसभा में आदिवासी वर्ग के मुद्दों की लड़ाई लड़ रहा है। जयस समाज के बीच में उनके मुद्दों को लेकर खड़ा है। जयस एकजुट था और एकजुट है।
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बीजेपी और कांग्रेस, दोनों ही आदिवासी वोटों पर हक बता रहे हैं, आपकी क्या भूमिका है?
डॉ. अलावाः जयस स्वतंत्र संगठन था, है, और रहेगा। भाजपा 2023 में अपनी सरकार बनाने के लिए आदिवासी के नाम का राग रट रही है। हकीकत में आदिवासियों को अधिकार भाजपा की सरकार में नहीं मिला है। आज आदिवासी इलाकों में सरकार की कौन-सी योजना है, जो ग्राउंड पर दिखती है। आज आदिवासी युवा पलायन कर गुजरात, महाराष्ट्र में काम करने जा रहे हैं। आदिवासी इलाकों में डिग्रियां लेकर युवा बेरोजगार घूम रहे हैं। आदिवासी लड़कियां गायब हो रही हैं। क्षेत्रों में कुपोषण और शिक्षा की हालात बदतर है। भाजपा ने ऐसा कौन-सा काम कर दिया कि आदिवासी वर्ग उस पर विश्वास करें और वोट दें। जनजातीय गौरव दिवस के नाम पर एकजुट करने का प्रयास जरूर किया, लेकिन सवाल यह है कि आजाद भारत में आदिवासियों को पांचवीं अनुसूची के अधिकार अब तक नहीं मिले। कौन-से नेता ने 18 साल में पांचवीं अनुसूची पर 18 शब्द बोले हैं। इनको छठवीं अनुसूची से मतलब नहीं है। यह सिर्फ एक प्रोपोगेंडा करते है। भाषण में आदिवासियों का विकास करना चाहते है। ऐसे में आदिवासी समाज अब जागरूक हो गया है। समाज अब गुमराह होने वाला नहीं है।

फिर क्या आप कांग्रेस के साथ जाएंगे?
डॉ. अलावाः कांग्रेस के साथ जाएंगे या नहीं जाएंगे, यह आने वाला वक्त बताएगा। जयस का एजेंडा वैचारिक क्रांति का है। वशंवाद वाली राजनीति चली आ रही है। उसे छोड़कर, उससे हटकर, पढ़े-लिखे युवाओं को राजनीति में भागीदारी देने की बात और पांचवी अनुसूची से लेकर जंगलों का अधिकार आदिवासियों को देने की बात है। आदिवासियों के लिए आर्थिक विकास की योजनाएं बनाना यह सब एजेंडे कांग्रेस के सामने है। इन मुद्दों पर कांग्रेस पार्टी कितनी गंभीर है, यह वह तय करेगी, लेकिन हमारे एजेंडे सबके सामने रख दिए हैं।
 
आदिवासियों के भीम आर्मी समेत अन्य दल भी हितैषी बन रहे हैं। जयस के अकेले चुनाव लड़ने से वोटरों को बिखराव नहीं होगा?
डॉ. अलावाः हमने जयस विचारधारा के साथ पार्टी, संगठन, सामाजिक संगठन सभी को एकजुट करने का प्रयास किया है। आदिवासियों के साथ-साथ ओबीसी की पिछड़ी जातियां भी हमसे जुड़ रही है। मांझी, धनगर, मानकर, नायक, बंजारा जाति भी हमारे साथ है। कई अनुसूचित जाति संगठन जुड़ रहे हैं। सामान्य वर्ग का बड़ा तबका भी हमारे साथ है। हमने सबके साथ बातचीत के लिए दरवाजे खुले रखे हैं, लेकिन विचाराधारा हमारी रहेगी।
 
पीएफआई के नेता आदिवासी लोगों को झांसे में लेकर जमीन हड़पने का षड्यंत्र कर रहे हैं? इस पर क्या कहेंगे? 
डॉ. अलावाः देखिए, यह गंभीर विषय है। आदिवासियों की जमीनों को आदिवासियों के नाम पर ही खरीदने का षड्यंत्र कई वर्षों से चल रहा है। अनुसूची पांच में साफ है कि आदिवासियों की जमीन कोई गैर-आदिवासी व्यक्ति नहीं ले सकता। यह स्पष्ट प्रावधान है। हमारी सरकार से मांग है कि इस मामले में न्यायिक जांच की जाए और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।

सरकार पेसा एक्ट से ग्राम सभा को सशक्त करने का दावा कर रही है। इस पर आपकी क्या राय है? 
डॉ. अलावाः 26 साल बाद सरकार ने स्वीकार किया कि पेसा कानून आदिवासियों का कानून है। इसके लिए धन्यवाद देता हूं। लेकिन इस पेसा एक्ट को बहुत कमजोर बना दिया। इस एक्ट में छठवीं अनुसूची का अनुसरण ही नहीं किया गया है। दूसरा, ग्राम सभाओं को सशक्त करने की बात कही गई है, लेकिन पेसा नियम 2022 में ग्राम सभाओं को वित्तीय अधिकार देने की बात नहीं की गई है। सरकार संशोधन के साथ कानून लागू करें। तभी यह सही मायने में पेसा एक्ट की मूल परिकल्पना साकार हो पाएगी।
 
जयस के ही डॉ. आनंद राय ने शिवराज सरकार पर आदिवासियों का दमन करने का आरोप लगाया है?
डॉ. अलावाः आनंद राय कोई जयस का लीडर नहीं है। उसे क्यों गिरफ्तार किया? क्या मामला है? इसकी सरकार जांच करें। जयस एक स्वतंत्र संगठन है। विधानसभा चुनाव को देखते हुए राय 2017 के बाद जुड़ा था। वह चुनाव लड़े, हमें कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन जयस के नाम पर राजनीति करे, नेता बने, यह हमारे संगठन में हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। हमें किसी ऐसे सलाहाकार की जरूरत नहीं है, जो आदिवासियों के ताने-बाने से छेड़छाड़ करें।

चार साल में जयस की उपलब्धि क्या बताएंगे?
डॉ. अलावाः आज सरकार आदिवासियों के लिए जनजातीय गौरव दिवस मनाने को मजबूर है। आदिवासी टंट्या भील को याद करने के लिए मजबूर है। पेसा कानून किसी न किसी मायने में लाने के लिए मजबूर हुई। यह कहीं ना कहीं जयस की पिछले चार साल की विधानसभा के अंदर और बाहर की लड़ाई का परिणाम है। आज आदिवासी समाज खुद नेतृत्व करना सीख गया है।


आम आदमी पार्टी और जयस के गठबंधन की कितनी संभावना है?
डॉ. अलावाः आम आदमी पार्टी की अपनी विचारधारा है। आप के साथ जयस के गठबंधन का कोई सवाल ही नहीं है। उनके अपने एजेंडे हैं। जयस का अपना नेतृत्व और एजेंडा है। जयस आदिवासियों के साथ साथ अन्य वर्गों के हमारे भाइयों की लड़ाई लड़ते आया है।  

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