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एमपीः कोटा के छात्रों को पीछे छोड़ रहे हैं आदिवासी इलाकों के ये छात्र
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 19 Jun 2016 01:32 PM IST
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आईआईटी
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मध्यप्रदेश के आदिवासी इलाके के इन छात्रों ने कुछ साल पहले तक शायद ही इस बात की उम्मीद की हो कि वो सीमित संसाधनों में ही देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में जाकर पढ़ाई कर पाएंगे। लेकिन कुछ सपने शायद सच होने के लिए ही होते हैं और इन छात्रों का सपना सच हुआ है आईआईटी की परीक्षा पास करके। राज्य के पिछड़े और आदिवासी इलाके के 20 छात्रों ने आईआईटी की परीक्षा पास करके देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में जाने की तैयारी कर ली है।
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एनडीटीवी की खबर के अनुसार मध्यप्रदेश सरकार द्वारा चलाए जा रहे 'छू लो आसमान प्रोग्राम' की बदौलत राज्य के आदिवासी और पिछड़े इलाके के होनहार छात्रों को अब अपनी मंजिल तक पहुंचने में बड़ी मदद मिलने लगी है। राज्य के उच्च शिक्षा आयुक्त और सचिव उमाकांत राव बताते हैं कि इस साल 300 छात्रों ने मुख्य परीक्षा के लिए क्वालीफाई किया था जिसमें से 21 छात्रों का चयन एडवांस परीक्षा के लिए हुआ। इनमें से 20 ने अंतिम बाधा पार कर ली।
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सरकार के इस कार्यक्रम को चलाने वाले धौरा जिले के उच्च माध्यमिक विधालय के प्रधानाचार्य विवेक तिवारी बताते हैं कि सरकार के कार्यक्रम छू लो आसमान प्रोग्राम के तहत छात्रों को क्लासरूम में विशेषज्ञों द्वारा वीडियो लेक्चर दिए जाते हैं। इसके अलावा टीवी और कम्प्यूटर के जरिए छात्रों को प्रेक्टिकल भी करवाए जाते हैं। इस स्कूल के भी कई छात्रों का चयन आईआईटी में हुआ है।
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बैतुल के जिला कलेक्टर बी ज्ञानेश्वर पाटिल बताते हैं कि इन स्कूलों में रात्रि कक्षाओं की व्यवस्था भी की गई है जिससे छात्र दिनभर अपनी पढ़ाई के बाद तैयारियों के लिए भी समय दे पाएं। ज्यादातर स्कूल राज्य के पिछड़े और आदिवासी इलाकों में ही हैं।
पाटिल बताते हैं कि हम बहुत नजदीक से इन स्कूलों पर नजर रखते हैं। इसके लिए तकनीक की मदद ली जाती है, हमने सभी शिक्षकों को निर्देश दे रखे हैं कि वह अपने क्लासरूम की तस्वीरें रोज जिला प्रशासन को भेजें। ताकि छात्रों की रोजाना उपस्थिति की सही जानकारी मिल सके।
बकौल पाटिल यह हमारे लिए बहुत गर्व के पल हैं कि पिछड़े तबके से आने वाले छात्रों को अपने सपने पूरे करने का अवसर मिल रहा है। बैतुल जिले के आदिवासी विकास विभाग के उपायुक्त आरएस परिहार इस कार्यक्रम के बारे में विस्तार से बताते हैं कि, कार्यक्रम के तहत छात्रों को मुफ्त में स्कूली शिक्षा के अलावा आईआईटी की कोचिंग दी जाती है।
इसके अलावा उनके खाने और रहने की व्यवस्था भी सरकार की तरफ से की जाती है। यहां तैयारी करने वाले आदिवासी इलाकों के ज्यादातर वे छात्र होते हैं जो पैसे की कमी के चलते आईआईटी की तैयारी नहीं कर पाते।
जिन छात्रों का आईआईटी के लिए चयन हुआ है उनमें रवि दामोर, सावन, कमल सिंह, प्रदीप सिंह चौहान, यश, धुर्वे, भिंजाडे, दीपक धुर्वे, राजू गागिया, भरत सोलंकी, कमल सिंह, अश्विन मांडलोई, दीवान कटारा, जयदीप कमालिया, देवेन्द्र ताढ़, इंद्रा राठौर, राहुल डाबुर, राजकुमार चौहान, भावना अवसिया, विजय सोलंकी और प्रदीप कुमार शामिल हैं।
बकौल पाटिल यह हमारे लिए बहुत गर्व के पल हैं कि पिछड़े तबके से आने वाले छात्रों को अपने सपने पूरे करने का अवसर मिल रहा है। बैतुल जिले के आदिवासी विकास विभाग के उपायुक्त आरएस परिहार इस कार्यक्रम के बारे में विस्तार से बताते हैं कि, कार्यक्रम के तहत छात्रों को मुफ्त में स्कूली शिक्षा के अलावा आईआईटी की कोचिंग दी जाती है।
इसके अलावा उनके खाने और रहने की व्यवस्था भी सरकार की तरफ से की जाती है। यहां तैयारी करने वाले आदिवासी इलाकों के ज्यादातर वे छात्र होते हैं जो पैसे की कमी के चलते आईआईटी की तैयारी नहीं कर पाते।
जिन छात्रों का आईआईटी के लिए चयन हुआ है उनमें रवि दामोर, सावन, कमल सिंह, प्रदीप सिंह चौहान, यश, धुर्वे, भिंजाडे, दीपक धुर्वे, राजू गागिया, भरत सोलंकी, कमल सिंह, अश्विन मांडलोई, दीवान कटारा, जयदीप कमालिया, देवेन्द्र ताढ़, इंद्रा राठौर, राहुल डाबुर, राजकुमार चौहान, भावना अवसिया, विजय सोलंकी और प्रदीप कुमार शामिल हैं।
