{"_id":"6489948ccbba982e500f3095","slug":"morena-death-of-more-than-100-pigs-stirred-in-15-days-dead-bodies-thrown-in-the-ravine-of-the-river-2023-06-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Morena: 15 दिन में 100 से ज्यादा सुअरों की मौत से हड़कंप, नदी के बीहड़ में फेंके शव, जीना मुहाल कर रही बदबू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Morena: 15 दिन में 100 से ज्यादा सुअरों की मौत से हड़कंप, नदी के बीहड़ में फेंके शव, जीना मुहाल कर रही बदबू
Wed, 14 Jun 2023 03:52 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुरैना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुरैना
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Wed, 14 Jun 2023 03:52 PM IST
सार
मुरैना में एक तरफ सुअरों की अज्ञात बीमारी से मौत होने का सिलसिला जारी है तो दूसरी तरफ सुअरों के शव से फैल रही बदबू से आसपास के इलाकों के लोगों का सांस लेना तक मुहाल हो रहा है।
विज्ञापन
मुरैना में अज्ञात बीमारी से सुअरों की मौत हो रही है ।
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
मध्यप्रदेश के मुरैना जिले के रामपुर कस्बा में 15 दिन में 110 सुअरों के मारे जाने का मामला सामने आया है। जिन बाल्मीक परिवारों के सुअरों की मौत हुई है, उन्होंने अन्य सुअरों को बचाने के लिए न तो इलाज कराया और नहीं मृत सुअरों का पोस्ट मार्टम। सुअरों को क्वारी नदी के बीहड़ में फेंकने से प्रदूषण फैल रहा है।
जानकारी के मुताबिक रामपुरकलां में रहने वाले रामदुलारे बाल्मीक ने बताया कि 15 दिन में उसके 90 सुअरों की मौत हो चुकी है। इनमें सभी उम्र के सुअर शामिल हैं। किसी दिन 5, किसी दिन 6 तो किसी दिन 10 सुअर मरते गए। सोनू बाल्मीक के 15 व बन्नो बाल्मीक के 5 सुअर अकाल मौत मरे हैं। बन्नो बाल्मीक का कहना है कि मरने से पहले सुअर का मुंह लाल होता है और कान लाल हो जाते हैं। इसके बाद वह खाना खाना छोड़ देता है। 48 से 72 घंटे बाद सुअर की मौत हो जाती है। यह बीमारी सबलगढ़ और शिवपुरी में भी सुनने को मिली है। इधर प्रजापति मोहल्ला के लोगों को कहना है कि मृत सुअरों के कारण मोहल्ले में बदबू फैली हुई है और सांस लेना मुश्किल हो रहा है। इस संबंध में उप संचालक पशु चिकित्सा सेवा रवि प्रताप भदौरिया से बात की गई तो उन्होंने सुअरों की मौत पर अनभिज्ञता जाहिर करते हुए कहा कि इसकी जांच करा लेंगे।
विज्ञापन
जानकारी के मुताबिक रामपुरकलां में रहने वाले रामदुलारे बाल्मीक ने बताया कि 15 दिन में उसके 90 सुअरों की मौत हो चुकी है। इनमें सभी उम्र के सुअर शामिल हैं। किसी दिन 5, किसी दिन 6 तो किसी दिन 10 सुअर मरते गए। सोनू बाल्मीक के 15 व बन्नो बाल्मीक के 5 सुअर अकाल मौत मरे हैं। बन्नो बाल्मीक का कहना है कि मरने से पहले सुअर का मुंह लाल होता है और कान लाल हो जाते हैं। इसके बाद वह खाना खाना छोड़ देता है। 48 से 72 घंटे बाद सुअर की मौत हो जाती है। यह बीमारी सबलगढ़ और शिवपुरी में भी सुनने को मिली है। इधर प्रजापति मोहल्ला के लोगों को कहना है कि मृत सुअरों के कारण मोहल्ले में बदबू फैली हुई है और सांस लेना मुश्किल हो रहा है। इस संबंध में उप संचालक पशु चिकित्सा सेवा रवि प्रताप भदौरिया से बात की गई तो उन्होंने सुअरों की मौत पर अनभिज्ञता जाहिर करते हुए कहा कि इसकी जांच करा लेंगे।
विज्ञापन
