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Mandsaur LS Seat: BJP को गढ़ बना रहने की उम्मीद तो कांग्रेस बदलाव की लहर के भरोसे, चार जून का इंतजार
Fri, 31 May 2024 01:16 PM IST
दिनेश शर्मा
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, मंदसौर
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, मंदसौर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Fri, 31 May 2024 01:16 PM IST
सार
मध्य प्रदेश की मंदसौर लोकसभा सीट भाजपा का परंपरागत गढ़ रही है। अब तक सिर्फ चार बार कांग्रेस को इस सीट पर जीत मिली है। जबकि सीट पर एक बार भारतीय जनसंघ एक बार जनता पार्टी और आठ बार भाजपा के खाते में गई है।
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मंदसौर में भाजपा से सुधीर गुप्ता और कांग्रेस दिलीप गुर्जर में मुकाबला रहा।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मंदसौर लोकसभा का इतिहास रोचक रहा है। भाजपा का गढ़ कही जाने वाली इस सीट पर इस बार कांग्रेस को बड़ी उम्मीद है। वहीं भाजपा अपनी जीत को लेकर निश्चिंत नजर आ रही है। हालांकि चार जून के आने वाले नतीजे सब साफ कर देंगे।
मध्य प्रदेश की मंदसौर लोकसभा सीट भाजपा का परंपरागत गढ़ रही है। अब तक सिर्फ चार बार कांग्रेस को इस सीट पर जीत मिली है। जबकि सीट पर एक बार भारतीय जनसंघ एक बार जनता पार्टी और आठ बार भाजपा के खाते में गई है। डॉक्टर लक्ष्मीनारायण पांडे यहां से आठ बार सांसद रहे हैं। इसके बाद 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस नेत्री मीनाक्षी नटराजन ने भाजपा के डॉक्टर पांडे को परास्त किया था। उसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में एक बार फिर भाजपा ने इस सीट पर कब्जा किया। 2014 के चुनाव में भाजपा के सुधीर गुप्ता ने मीनाक्षी नटराजन को परास्त किया था। उसके बाद 2019 के चुनाव में भी इस सीट पर भाजपा का कब्जा रहा।
मंदसौर संसदीय क्षेत्र भाजपा का मजबूत गढ़ रहा है। जब से मंदसौर संसदीय क्षेत्र अस्तित्व में आया है, तब से कांग्रेस को सिर्फ चार बार जीत मिली है। मंदसौर संसदीय क्षेत्र से भाजपा के डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडे आठ बार सांसद रहे हैं। 2009 में जब कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को उतारा, तब पांडे का विजयी रथ थमा था। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में मोदी लहर का जादू चला और भाजपा के सुधीर गुप्ता इस सीट को दोबारा कांग्रेस से छीनने में कामयाब रहे थे। दोनों बार उनकी जीत का अंतर तीन लाख वोट से अधिक का रहा। 2024 के लोकसभा चुनाव की बात करें तो इस बार भी मुख्य मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच ही रहा है। मंदसौर लोकसभा सीट से भाजपा ने तीसरी बार सुधीर गुप्ता को मैदान में उतारा है तो वहीं कांग्रेस ने ओबीसी बाहुल्य क्षेत्र होने की वजह से कांग्रेस नेता व नागदा के पूर्व विधायक दिलीप सिंह गुर्जर को चुनाव मैदान में उतारकर ओबीसी कार्ड खेलने की कोशिश की है।
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75 फीसदी से ज्यादा मतदान
मंदसौर संसदीय क्षेत्र में 2024 के लोकसभा चुनाव में पुरुष मतदान 77.81 व महिला मतदान 72.65 फीसदी रहा। संसदीय क्षेत्र से 18 लाख 98 हजार 60 मतदाताओं में से 14 लाख 28 हजार 383 ने वोट दिए। कुल 9 लाख 57 हजार 883 पुरुषों में से 7 लाख 45 हजार 354 ने वोट दिए, वहीं 9 लाख 40 हजार 149 महिलाओं में से 6 लाख 83 हजार 14 ने वोट दिए। अन्य थर्ड जेंडर के कुल 28 वोटर में से 15 ने मतदान किया। इस तरह संसदीय क्षेत्र में कुल 75.25 फीसदी मतदान रहा। जो कि पिछले लोकसभा चुनाव से 2.64% कम रहा। पिछले लोकसभा चुनाव में कुल 77.89% मतदान हुआ था।
आठ में से सात सीटों पर भाजपा का कब्जा
मंदसौर लोकसभा क्षेत्र मंदसौर व नीमच जिले की सात विधानसभा आती हैं। साथ ही रतलाम जिले की जावरा विधानसभा क्षेत्र के कुछ ग्रामीण क्षेत्र लोकसभा सीट में आते हैं। इस संसदीय क्षेत्र में मंदसौर, मल्हारगढ़, सुवासरा, गरोठ, नीमच, जावद, मनासा और रतलाम जिले की जावरा तहसील का कुछ क्षेत्र शामिल है। इनमें से सिर्फ मंदसौर विधानसभा सीट पर कांग्रेस का कब्जा है जबकि शेष सात विधानसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा है।
सामाजिक ताना-बाना
मंदसौर लोकसभा क्षेत्र में 2011 की जनगणना के मुताबिक जनसंख्या 24,72,444 है। 75.49 फीसदी आबादी ग्रामीण क्षेत्र में रहती है और 24.51 फीसदी आबादी शहरी क्षेत्र में। मंदसौर में 16.78 फीसदी आबादी अनुसूचित जाति की है, जबकि 5.36 फीसदी आबादी अजजा वर्ग की है। इस सीट पर मुस्लिम आबादी 9.05% है। मंदसौर जिला हिंदू और जैन मंदिरों के लिए खासी पहचान रखता है। आजादी से पहले यह ग्वालियर रियासत का हिस्सा था। मंदसौर जिला मुख्यालय पर शिवना नदी किनारे स्थित विश्वविख्यात अष्टमुखी भगवान पशुपतिनाथ मंदिर, धर्मराजेश्वर, बहिपर्श्वनाथ जैन मंदिर, नवनिर्मित अर्यरक्षित सूरिश्वर जी जैन मंदिर, नालछा माता मंदिर, कुबेर मंदिर और गांधी सागर बांध यहां के मुख्य दर्शनीय व पर्यटन स्थल हैं। मंदसौर संसदीय क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अफीम की खेती होती है। मंदसौर संसदीय क्षेत्र राजस्थान के प्रतापगढ़ चित्तौड़गढ़, कोटा, भीलवाड़ा, झालावाड़ और मध्य प्रदेश के रतलाम जिले से घिरा हुआ है।
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मध्य प्रदेश की मंदसौर लोकसभा सीट भाजपा का परंपरागत गढ़ रही है। अब तक सिर्फ चार बार कांग्रेस को इस सीट पर जीत मिली है। जबकि सीट पर एक बार भारतीय जनसंघ एक बार जनता पार्टी और आठ बार भाजपा के खाते में गई है। डॉक्टर लक्ष्मीनारायण पांडे यहां से आठ बार सांसद रहे हैं। इसके बाद 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस नेत्री मीनाक्षी नटराजन ने भाजपा के डॉक्टर पांडे को परास्त किया था। उसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में एक बार फिर भाजपा ने इस सीट पर कब्जा किया। 2014 के चुनाव में भाजपा के सुधीर गुप्ता ने मीनाक्षी नटराजन को परास्त किया था। उसके बाद 2019 के चुनाव में भी इस सीट पर भाजपा का कब्जा रहा।
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मंदसौर संसदीय क्षेत्र भाजपा का मजबूत गढ़ रहा है। जब से मंदसौर संसदीय क्षेत्र अस्तित्व में आया है, तब से कांग्रेस को सिर्फ चार बार जीत मिली है। मंदसौर संसदीय क्षेत्र से भाजपा के डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडे आठ बार सांसद रहे हैं। 2009 में जब कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को उतारा, तब पांडे का विजयी रथ थमा था। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में मोदी लहर का जादू चला और भाजपा के सुधीर गुप्ता इस सीट को दोबारा कांग्रेस से छीनने में कामयाब रहे थे। दोनों बार उनकी जीत का अंतर तीन लाख वोट से अधिक का रहा। 2024 के लोकसभा चुनाव की बात करें तो इस बार भी मुख्य मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच ही रहा है। मंदसौर लोकसभा सीट से भाजपा ने तीसरी बार सुधीर गुप्ता को मैदान में उतारा है तो वहीं कांग्रेस ने ओबीसी बाहुल्य क्षेत्र होने की वजह से कांग्रेस नेता व नागदा के पूर्व विधायक दिलीप सिंह गुर्जर को चुनाव मैदान में उतारकर ओबीसी कार्ड खेलने की कोशिश की है।
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75 फीसदी से ज्यादा मतदान
मंदसौर संसदीय क्षेत्र में 2024 के लोकसभा चुनाव में पुरुष मतदान 77.81 व महिला मतदान 72.65 फीसदी रहा। संसदीय क्षेत्र से 18 लाख 98 हजार 60 मतदाताओं में से 14 लाख 28 हजार 383 ने वोट दिए। कुल 9 लाख 57 हजार 883 पुरुषों में से 7 लाख 45 हजार 354 ने वोट दिए, वहीं 9 लाख 40 हजार 149 महिलाओं में से 6 लाख 83 हजार 14 ने वोट दिए। अन्य थर्ड जेंडर के कुल 28 वोटर में से 15 ने मतदान किया। इस तरह संसदीय क्षेत्र में कुल 75.25 फीसदी मतदान रहा। जो कि पिछले लोकसभा चुनाव से 2.64% कम रहा। पिछले लोकसभा चुनाव में कुल 77.89% मतदान हुआ था।
आठ में से सात सीटों पर भाजपा का कब्जा
मंदसौर लोकसभा क्षेत्र मंदसौर व नीमच जिले की सात विधानसभा आती हैं। साथ ही रतलाम जिले की जावरा विधानसभा क्षेत्र के कुछ ग्रामीण क्षेत्र लोकसभा सीट में आते हैं। इस संसदीय क्षेत्र में मंदसौर, मल्हारगढ़, सुवासरा, गरोठ, नीमच, जावद, मनासा और रतलाम जिले की जावरा तहसील का कुछ क्षेत्र शामिल है। इनमें से सिर्फ मंदसौर विधानसभा सीट पर कांग्रेस का कब्जा है जबकि शेष सात विधानसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा है।
सामाजिक ताना-बाना
मंदसौर लोकसभा क्षेत्र में 2011 की जनगणना के मुताबिक जनसंख्या 24,72,444 है। 75.49 फीसदी आबादी ग्रामीण क्षेत्र में रहती है और 24.51 फीसदी आबादी शहरी क्षेत्र में। मंदसौर में 16.78 फीसदी आबादी अनुसूचित जाति की है, जबकि 5.36 फीसदी आबादी अजजा वर्ग की है। इस सीट पर मुस्लिम आबादी 9.05% है। मंदसौर जिला हिंदू और जैन मंदिरों के लिए खासी पहचान रखता है। आजादी से पहले यह ग्वालियर रियासत का हिस्सा था। मंदसौर जिला मुख्यालय पर शिवना नदी किनारे स्थित विश्वविख्यात अष्टमुखी भगवान पशुपतिनाथ मंदिर, धर्मराजेश्वर, बहिपर्श्वनाथ जैन मंदिर, नवनिर्मित अर्यरक्षित सूरिश्वर जी जैन मंदिर, नालछा माता मंदिर, कुबेर मंदिर और गांधी सागर बांध यहां के मुख्य दर्शनीय व पर्यटन स्थल हैं। मंदसौर संसदीय क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अफीम की खेती होती है। मंदसौर संसदीय क्षेत्र राजस्थान के प्रतापगढ़ चित्तौड़गढ़, कोटा, भीलवाड़ा, झालावाड़ और मध्य प्रदेश के रतलाम जिले से घिरा हुआ है।
