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मध्य प्रदेश: 29 हफ्ते की गर्भवती रेप पीड़िता को गर्भपात की अनुमति देने से हाईकोर्ट का इनकार
Fri, 26 Nov 2021 01:38 PM IST
रवींद्र भजनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: रवींद्र भजनी
Updated Fri, 26 Nov 2021 01:38 PM IST
सार
हाईकोर्ट ने कहा कि चिकित्सा विशेषज्ञों की राय में 29 हफ्ते की गर्भावस्था में गर्भपात की इजाजत देने पर जच्चा-बच्चा दोनों को खतरा है। राज्य सरकार को दिए डिलीवरी का खर्च उठाने के निर्देश।
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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 29 हफ्ते की गर्भवती रेप पीड़िता को गर्भपात की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। रेप पीड़िता नाबालिग है। अगर अभी गर्भपात कराया तो यह जच्चा-बच्चा दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
जस्टिस संजय द्विवेदी की सिंगल बेंच ने विशेषज्ञ चिकित्सकों की रिपोर्ट के बाद यह फैसला सुनाया। जस्टिस द्विवेदी ने कहा कि पीड़िता भोपाल में गांधी मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की सलाह ले सकती है। वहां से उसे उचित सहायता मिलेगी। बच्चे के जन्म का खर्च राज्य सरकार को उठाने के निर्देश भी जारी किए हैं।
रेप पीड़िता के पिता ने याचिका दायर कर गर्भपात की अनुमति मांगी थी। उनका कहना था कि उनकी नाबालिग बेटी के साथ दुराचार हुआ है। अब वह गर्भवती है। नाबालिग होने से बच्चे को जन्म देने में उसकी जान को खतरा है। इस मामले में हाईकोर्ट ने चिकित्सा विशेषज्ञों से रिपोर्ट तलब की थी। एक्सपर्ट्स ने कहा कि पीड़िता का भ्रूण 29 हफ्ते का है। गर्भावस्था की अनुमति तब ही दी जा सकती है जब भ्रूण 24 हफ्ते से कम का हो। अगर मौजूदा स्थिति में गर्भपात की इजाजत दी जाती है तो यह जच्चा-बच्चा दोनों के लिए खतरनाक साबित होगा। इस रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद कोर्ट ने यह फैसला सुनाया।
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जस्टिस संजय द्विवेदी की सिंगल बेंच ने विशेषज्ञ चिकित्सकों की रिपोर्ट के बाद यह फैसला सुनाया। जस्टिस द्विवेदी ने कहा कि पीड़िता भोपाल में गांधी मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की सलाह ले सकती है। वहां से उसे उचित सहायता मिलेगी। बच्चे के जन्म का खर्च राज्य सरकार को उठाने के निर्देश भी जारी किए हैं।
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रेप पीड़िता के पिता ने याचिका दायर कर गर्भपात की अनुमति मांगी थी। उनका कहना था कि उनकी नाबालिग बेटी के साथ दुराचार हुआ है। अब वह गर्भवती है। नाबालिग होने से बच्चे को जन्म देने में उसकी जान को खतरा है। इस मामले में हाईकोर्ट ने चिकित्सा विशेषज्ञों से रिपोर्ट तलब की थी। एक्सपर्ट्स ने कहा कि पीड़िता का भ्रूण 29 हफ्ते का है। गर्भावस्था की अनुमति तब ही दी जा सकती है जब भ्रूण 24 हफ्ते से कम का हो। अगर मौजूदा स्थिति में गर्भपात की इजाजत दी जाती है तो यह जच्चा-बच्चा दोनों के लिए खतरनाक साबित होगा। इस रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद कोर्ट ने यह फैसला सुनाया।
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