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भोपाल: कड़ाके की ठंड में नेत्रहीन छात्रों के प्रदर्शन को 12 दिन हुए, सरकार बेसुध
टीम डिजिटल, अमर उजाला
Updated Fri, 29 Dec 2017 03:49 PM IST
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प्रदर्शन
- फोटो : ANI
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भोपाल में नेत्रहीन छात्रों को अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन करते हुए 12 दिन हो गए हैं। लेकिन सरकार ने अभी तक इन छात्रों की सुध नहीं ली है।
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में नेत्रहीन छात्रों का एक समूह राज्य सरकार के विरोध में सड़कों पर उतर आया है। नेत्रहीन छात्र राज्य सरकार से बेहतर शैक्षिणिक सुविधाओं और रोजगार के अवसरों की मांग कर रहे हैं।
कड़ाके की ठंड के बावजूद अपने मांगों के लिए नेत्रहीन छात्र धरने पर बैठे हैं। इनमें से कुछ ने तो कपड़े तक नहीं पहने हैं।
यूनियन के प्रमुख मनीष ने एएनआई से बात करते हुए अपने विरोध के बारे में बताया। उन्होंने कहा, 'हमने सभी संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर हमारी जरूरतों के बारे में बताया था लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।'
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मनीष ने बताया, 'हमारी मुख्य मांगें शिक्षा और रोजगार हैं। हम पिछले 50 सालों से देख रहे हैं कि हमारे लिए कोई विश्वविद्यालय या स्कूल नहीं है। और जो स्कूल पास कर चुके हैं, उनका कोई भविष्य नहीं है। नेत्रहीन लोगों को बिजली बिल पर पूरा टैक्स देना पड़ता है जबकि व्यापारियों को बिजली बिल पर पचास फीसदी कटौती की छूट मिलती है।
उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती उनका हड़ताल जारी रहेगा।
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मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में नेत्रहीन छात्रों का एक समूह राज्य सरकार के विरोध में सड़कों पर उतर आया है। नेत्रहीन छात्र राज्य सरकार से बेहतर शैक्षिणिक सुविधाओं और रोजगार के अवसरों की मांग कर रहे हैं।
Bhopal: Protest by visually impaired students enters 12th day, they are demanding employment & other basic facilities from the state government. pic.twitter.com/Qs0Arkkq5q
— ANI (@ANI) December 29, 2017विज्ञापन
कड़ाके की ठंड के बावजूद अपने मांगों के लिए नेत्रहीन छात्र धरने पर बैठे हैं। इनमें से कुछ ने तो कपड़े तक नहीं पहने हैं।
यूनियन के प्रमुख मनीष ने एएनआई से बात करते हुए अपने विरोध के बारे में बताया। उन्होंने कहा, 'हमने सभी संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर हमारी जरूरतों के बारे में बताया था लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।'
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मनीष ने बताया, 'हमारी मुख्य मांगें शिक्षा और रोजगार हैं। हम पिछले 50 सालों से देख रहे हैं कि हमारे लिए कोई विश्वविद्यालय या स्कूल नहीं है। और जो स्कूल पास कर चुके हैं, उनका कोई भविष्य नहीं है। नेत्रहीन लोगों को बिजली बिल पर पूरा टैक्स देना पड़ता है जबकि व्यापारियों को बिजली बिल पर पचास फीसदी कटौती की छूट मिलती है।
उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती उनका हड़ताल जारी रहेगा।
