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बड़ी खबर: मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ में कोरोना वायरस के लक्षण, मेदांता में हुए भर्ती
Wed, 09 Jun 2021 02:25 PM IST
प्रशांत कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Wed, 09 Jun 2021 02:25 PM IST
सार
कोरोना वायरस के लक्षण दिखने के बाद कमलनाथ को अस्पताल में एडमिट कराया गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक कमलनाथ पिछले दो दिनों से सर्दी-बुखार से पीड़ित हैं।
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कांग्रेस नेता कमलनाथ (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
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विस्तार
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कोरोना वायरस के लक्षण दिखने के बाद उन्हें अस्पताल में एडमिट कराया गया। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, कमलनाथ पिछले दो दिनों से सर्दी-बुखार से पीड़ित हैं। उनमें बुखार के अलावा कोरोना संक्रमण के अन्य लक्षण भी दिखे हैं। कमलनाथ सुबह 10 बजे मेदांता अस्पताल में चेकअप के लिए पहुंचे, जिसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें भर्ती होने को कहा।
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इंदौर में लिफ्ट हादसे से बिगड़ी थी तबियत
गौरतलब है कि इसी साल फरवरी महीने में इंदौर के एक निजी अस्पताल में लिफ्ट गिरने के हादसे में कमलनाथ बाल-बाल बच गए थे, लेकिन उस सदमे की वजह से उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। अस्पताल में ही ब्लड प्रेशर चेक कराया गया था। जहां ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ था।
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2018 में सीएम बने थे कमलनाथ
मध्यप्रदेश में साल 2018 में हुए विधासभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी को बहुमत मिली थी। कांग्रेस क वरिष्ठ नेता कमलनाथ मुख्यमंत्री बने थे, लेकिन पार्टी में बगावत के एक साल बाद ही कांग्रेस की सरकार प्रदेश में गिर गई। उसके बाद सीएम शिवराज सिंह के नेतृत्व में भाजपा सरकार की राज्य में वापसी हुई।
हनीट्रैप मामले में कमलनाथ पर एसआईटी का शिकंजा
बता दें कि पिछले दिनों मध्यप्रदेश में हनीट्रैप का मामला जोरों पर था। इसमें कमलनाथ भी कटघरे में आ गए थे। एसआईटी ने नोटिस जारी कर पेन ड्राइव की मांग की थी। दरअसल, कांग्रेस विधायक उमंग सिंघार की महिला मित्र ने आत्महत्या कर ली थी, इस मामले में उमंग सिंघार पर केस दर्ज हुआ था। उसके बाद कमलनाथ ने उमंग सिंघार का बचाव करते हुए कहा था कि उनके पास भी भाजपा नेताओं के हनीट्रैप की पेन ड्राइव है। इस मामले पर भाजपा ने आपत्ति जताते हुए कमलनाथ की निंदा की थी। इसी सिलसिले में एसआईटी ने उनपर शिकंजा कसा था।
