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Morena Municipal Election: मुरैना महापौर जीत की राह में कांग्रेस-भाजपा के लिए कांटे, जानिए किसने वोटबैंक में लगाई सेंध

Tue, 19 Jul 2022 10:17 PM IST
वीरेंद्र शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुरैना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुरैना Published by: वीरेंद्र शर्मा Updated Tue, 19 Jul 2022 10:17 PM IST
सार

महापौर चुनाव के दौरान पार्टी और संगठन प्रत्याशी के साथ खड़ा रहा है। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की संसदीय सीट होने की वजह से उनके वर्चस्व का भी फायदा मिल सकता है। 
 

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Madhya Pradesh Election Updates 2022, Morena Nagar Nigam Chunav
मीना जाटव और शारदा सोलंकी में मुकाबला। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के गढ़ और संसदीय क्षेत्र मुरैना में नगर पालिका निगम के महापौर पद के प्रत्याशी के भाग्य का फैसला बुधवार को होगा। इस सीट के लिए 13 जुलाई को लगभग एक लाख 34 हजार से अधिक मतदाताओं ने वोट किया है। ग्वालियर की तरह ही मुरैना नगर निगम में भी भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर मानी जा रही है। यही वजह है कि दोनों ही पार्टियां अपनी-अपनी जीत का दावा कर रही हैं।
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बता दें कि ग्वालियर सीट के बाद मुरैना को भी हॉट सीट माना जाता है। मुरैना नगर निगम महापौर पद के चुनावी नतीजों की घोषणा बुधवार को होगी। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का गढ़ और संसदीय क्षेत्र होने की वजह से भी यह भाजपा के लिए खास है। निकाय चुनाव में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने पूरी ताकत के साथ प्रचार प्रसार किया। ग्वालियर के बाद इस सीट पर भी कांग्रेस की कड़ी टक्कर मानी जा रही है। भाजपा ने महापौर उम्मीदवार के रूप में एक गरीब आंगनवाड़ी कार्यकर्ता मीना मुकेश जाटव पर दांव खेला तो कांग्रेस ने पूर्व सांसद बाबूलाल सोलंकी की छोटी बहू शारदा राजेंद्र सोलंकी को मैदान में उतारा है। इसके अलावा बसपा से ममता मौर्य एडवोकेट, आम आदमी पार्टी से ललिता पवन जाटव और निर्दलीय प्रत्याशी अनीता चौधरी चुनावी मैदान में हैं।
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बताया जा रहा है कि टिकट बंटवारे की खींचातानी में कांग्रेस और भाजपा को कई वार्डों में भारी नुकसान होने की संभावना है। जिसका फायदा निर्दलीय प्रत्याशी को हो सकता है। कम मतदान का होने का लाभ भी कांग्रेस को मिलता दिखाई दे रहा है। क्योंकि मतदाता का रुख एवं शहर की हवा ने कांग्रेस प्रत्याशी का मनोबल बढ़ा दिया है। राजनीतिक पृष्ठभूमि से जुड़ी फैमिली का लाभ शारदा सोलंकी को मिल सकता है। उनके पति पहले नगर निगम महापौर का चुनाव लड़ चुके हैं और बहुत ही कम अंतर से पराजित हुए थे। 
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बीजेपी महापौर प्रत्याशी मीना मुकेश जाटव की ताकत और कमजोरी....
ताकत 
महापौर चुनाव के दौरान पार्टी और संगठन प्रत्याशी के साथ खड़ा रहा है। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की संसदीय सीट होने की वजह से उनके वर्चस्व का भी फायदा मिल सकता है। 

कमजोरी
चुनाव लड़ने का बिल्कुल भी अनुभव नहीं है। साथ ही जनता के लिए नया चेहरा और कोई पहचान नहीं न होना भी उनकी कमजोरी है। पिछले महापौर के कार्यकाल में जनता भाजपा से असंतुष्ट और नाराज दिखाई दी। कार्यकर्ताओं को टिकट न मिलने पर नाराजगी और गुटबाजी भी एक बड़ी वजह है। 


कांग्रेस प्रत्याशी शारदा राजेन्द्र सोलंकी की ताकत और कमजोरी

ताकत
कांग्रेस प्रत्याशी का पहले से ही पूरा परिवार राजनीतिक से जुड़ा है। प्रत्याशी के ससुर बाबूलाल सोलंकी दो बार सांसद रह चुके हैं। बीजेपी कार्यकर्ताओं की नाराजगी और गुटबाजी का फायदा भी कांग्रेस को मिल सकता है। निगम में बीजेपी के पिछले कार्यकाल में जनता की नाराजगी का फायदा मिल सकता है। 


कमजोरी: 
पार्टी की गुटबाजी के चलते कई बड़े नेताओं ने सोलंकी के लिए प्रचार नहीं किया। साथ ही टिकट वितरण के दौरान भी नाराजगी दिखाई दी।
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