Madhya Pradesh: महापौर टिकट वितरण की माथापच्ची के बीच शिवराज पहुंचे दिल्ली, क्या पार्टी बदलेगी भोपाल, इंदौर के लिए नियम?
राजधानी भोपाल में रविवार दोपहर को सीएम शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा और संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा के बीच महापौर प्रत्याशियों को लेकर लंबा विचार मंथन का दौर चला। ये बैठक करीब तीन घंटे चली। इसी के बाद सीएम सोमवार को सीएम केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिलने दिल्ली पहुंचे...
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मध्यप्रदेश में नगर निकाय चुनावों के लिए उठापटक का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस के महापौर पद के प्रत्याशियों के एलान के दो दिन बाद भी सत्ताधारी भाजपा अब तक अपने उम्मीदवारों के नाम का एलान नहीं कर सकी है। शनिवार और रविवार को दिनभर चली कोर ग्रुप की बैठक के बाद इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर के महापौर उम्मीदवारों के नामों को लेकर सहमति नहीं बन पाई है। इसी बीच सोमवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान राजधानी दिल्ली पहुंच गए हैं। सीएम ने यहां केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से नार्थ ब्लॉक स्थित कार्यालय में मुलाकात की। इसके अलावा सीएम ने संगठन महामंत्री बीएल संतोष समेत अन्य नेताओं से भी मुलाकात का कार्यक्रम है।
रविवार को दिनभर चला मंथन, अब शाह करेंगे फैसला
राजधानी भोपाल में रविवार दोपहर को सीएम शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा और संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा के बीच महापौर प्रत्याशियों को लेकर लंबा विचार मंथन का दौर चला। ये बैठक करीब तीन घंटे चली। इसी के बाद सीएम सोमवार को सीएम केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिलने दिल्ली पहुंचे हैं। ऐसी संभावना है कि जिन सीटों पर ज्यादा घमासान की स्थिति है वहां का फैसला दिल्ली से हो सकता है। इससे पहले रविवार सुबह केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से सीएम हाउस में मुलाकात की। इसके बाद भाजपा ऑफिस में पार्टी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा के साथ बैठक में शामिल हुए। डेढ़ घंटे चली बैठक में महापौर उम्मीदवारों के नाम को लेकर मंथन हुआ। सिंधिया भी अपने एक समर्थक को टिकट दिलाने पर अड़े हुए हैं।
भोपाल, इंदौर के लिए पार्टी बदल सकती है अपनी गाइडलाइन
रविवार को 16 नगर निगमों के महापौर प्रत्याशी चयन के लिए बैठी भाजपा की प्रदेश चुनाव समिति और कोर ग्रुप ने पांच सीटों पर सिंगल नाम तय कर दिए हैं। इनमें उज्जैन, रतलाम, सतना, छिंदवाड़ा और बुरहानपुर नगर निगम शामिल है। पार्टी के लिए सबसे बड़ा पेंच भोपाल, इंदौर और ग्वालियर के नामों पर फंसा हुआ है। ग्वालियर के नाम पर केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच सहमति बनाने के प्रयास हैं।
ग्वालियर में डॉ. वीरा लोहिया, सुमन शर्मा, माया सिंह और समीक्षा गुप्ता के नाम आए। यदि भोपाल से कृष्णा गौर के लिए पार्टी नियम से समझौता करती है, तो इंदौर में विधायक रमेश मेंदोला भी अपना दावा मजबूती से रख सकते हैं। इंदौर में मेंदोला के अलावा गौरव रणदिवे, पुष्यमित्र भार्गव और डॉ. निशांत खरे के नाम हैं। इसी तरह जबलपुर के लिए कमलेश अग्रवाल, डॉ. जितेंद्र जामदार और अभिलाष पांडे के नाम का जिक्र आया है।
जानकारी के अनुसार, भोपाल में भाजपा महापौर के तौर पर पूर्व महापौर व गोविंदपुरा सीट से विधायक कृष्णा गौर को मैदान में उतार सकती है। लेकिन, इसके लिए पार्टी को अपनी गाइडलाइन को बदलना होगा। क्योंकि कृष्णा गौर विधायक हैं, लेकिन उनके अलावा पार्टी को कोई नया विकल्प नहीं मिल रहा है। मालती राय और उपमा राय को लेकर कहा गया कि वे उम्रदराज हैं। बाकी नाम कांग्रेस प्रत्याशी विभा पटेल के सामने कमजोर साबित हो सकते हैं। लिहाजा प्रदेश नेतृत्व भोपाल के मामले में केंद्र से बात करेगा कि विधायकों के महापौर का चुनाव नहीं लड़ने के फैसले को भोपाल के लिए शिथिल किया जाए। अगर भाजपा में कृष्णा गौर के नाम पर सहमति बनती है तो इंदौर में भी महापौर के लिए विधायक रमेश मेंदोला की दावेदारी मजबूत हो जाएगी। पार्टी के ऊपर मेंदोला भी टिकट देने का दबाव बन सकते है।
