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मध्यप्रदेश उपचुनाव: कांग्रेस ने कहा- ईवीएम नहीं मतपत्र इस्तेमाल करें, ताकि कोरोना ना फैले

Wed, 10 Jun 2020 03:08 AM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल। Published by: योगेश साहू Updated Wed, 10 Jun 2020 03:08 AM IST
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Madhya Pradesh by election: Congress said use Ballot paper not EVM, so that coronavirus does not spread
मतपत्र (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Pixabay

मध्यप्रदेश कांग्रेस ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से कोविड-19 के संक्रमण के फैलने की आशंका जताते हुए उपचुनाव में ईवीएम के बजाए मतपत्रों का उपयोग करने की मांग की है। बता दें कि प्रदेश की 24 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं।

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प्रदेश कांग्रेस ने आशंका जताई है कि प्रदेश में विधानसभा की 24 सीटों के लिए होने वाले उपचुनाव में ईवीएम के उपयोग से कोरोना वायरस के और ज्यादा फैलने का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में ईवीएम के स्थान पर मतपत्रों का उपयोग किया जाना चाहिए। 
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बता दें कि कांग्रेस के 22 विधायकों के त्यागपत्र देने के बाद भाजपा में शामिल होने और दो विधायकों के निधन के कारण रिक्त हुई 24 विधानसभा सीटों के लिए प्रदेश में उपचुनाव होने हैं। हालांकि अभी इसकी तारीख की घोषणा नहीं हुई है।
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मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के चुनाव संबंधित मामले के प्रभारी जेपी धनोपिया ने बताया कि पार्टी की ओर से मंगलवार को इस संबंध में प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) को ज्ञापन सौंपा गया है।

ईवीएम से खतरा
उन्होंने बताया कि हर मतदान केंद्र पर औसतन 1,000 से 1,200 मतदाता वोट डालते हैं। इसके लिए मतदाताओं को बार-बार ईवीएम मशीन के बटन दबाने होंगे। ऐसे में ईवीएम के जरिए कोरोना वायरस के संक्रमण के प्रसार की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इसलिए कांग्रेस पार्टी ने उपचुनाव में ईवीएम के स्थान पर मतपत्रों का उपयोग करने की मांग की है। 

दो सीटों की जानकारी मांगी
धनोपिया ने कहा कि इसके अलावा कांग्रेस ने आयोग को एक और ज्ञापन सौंपकर 24 रिक्त सीटों में से दो- जौरा और आगर मालवा की सीटों के उपचुनाव के बारे में जानकारी मांगी है। इन दो सीटों पर विधायकों की मृत्यु होने के कारण उपचुनाव कराना होगा।

उन्होंने कहा कि जौरा विधानसभा सीट 21 दिसंबर 2019 से तथा आगर मालवा सीट 31 जनवरी 2020 से रिक्त है। जन प्रतिनिधित्व कानून 1951 के प्रावधानों के अनुसार रिक्त सीटों के चुनाव छह माह के अंदर कराए जाने चाहिए। इन सीटों के लिए छह माह की अवधि जुलाई में समाप्त हो रही है।

पंद्रह महीने ही चली कांग्रेस की सरकार

बता दें कि मार्च में कांग्रेस के 22 बागी विधायकों ने विधानसभा सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया था। इसके बाद प्रदेश में 15 माह पुरानी कांग्रेस की कमलनाथ सरकार गिर गई थी। ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में जाने के बाद उनके समर्थक और कांग्रेस के 22 बागी विधायक भी भाजपा में शामिल हो गए थे।

फिलहाल मध्यप्रदेश विधानसभा में सदस्यों की संख्या 206 है और सत्तारूढ़ भाजपा के पास 107 विधायकों की संख्या के साथ बहुमत है। भाजपा को सदन में साधारण बहुमत हासिल करने के लिए उपचुनाव में इन 24 सीटों में से कम से कम नौ सीटें जीतनी होंगी। कांग्रेस के अभी 92 विधायक हैं जबकि चार विधायक निर्दलीय हैं। इसके अलावा बसपा के दो और सपा के एक विधायक हैं।

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