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मध्यप्रदेश चुनाव: बाबूलाल गौर और बहू कृष्णा ने खरीदा नामांकन फॉर्म, क्या निर्दलीय लड़ेंगे!
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 06 Nov 2018 12:26 PM IST
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बाबूलाल गौर
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मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 में टिकट बंटवारे को लेकर भाजपा के अंदर मचा संग्राम खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व सीएम बाबूलाल गौर हर हाल में चुनाव लड़ने पर अड़े नजर आ रहे हैं। भाजपा ने अभी तक उनकी दावेदारी का एलान नहीं किया है, लेकिन आज उन्होंने नामांकन फॉर्म खरीद लिया।
बाबूलाल गौर और उनकी बहू कृष्णा गौर ने आज भोपाल में नामांकन फॉर्म खरीदा। बाबूलाल गौर गोविंदपुरा सीट से कृष्णा को टिकट दिलाना चाहते हैं। पिछले दिनों भाजपा ने 176 उम्मीदवारों के नामों का एलान किया था लेकिन उसमें गोविंदपुरा सीट का नाम नहीं था। इस सीट को होल्ड पर रखा गया है।
दरअसर, भाजपा के लिए पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है। वह अपनी बढ़ती उम्र के बावजूद चुनाव लड़ना चाहते हैं। वह अपनी बहू कृष्णा गौर को गोविंदपुरा सीट पर लड़ाना चाहते हैं। गोविंदपुरा विधानसभा सीट भाजपा का गढ़ मानी जाती है। यहां से 88 साल के बाबूलाल गौर दशकों तक चुने जाते रहे हैं।
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इस सीट पर कई दावेदार हैं। हालांकि भाजपा ने अभी इसके लिए किसी का नाम फाइनल नहीं किया है। गौर ने अपना पहला चुनाव निर्दलीय के तौर पर लड़ा था और वह इसी सीट से 10 बार विधायक बन चुके हैं। कुछ दिन पहले ही उन्होंने कहा था, अगर हमें टिकट नहीं मिला तो मैं और कृष्णा जी अलग-अलग सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे।
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बाबूलाल गौर और उनकी बहू कृष्णा गौर ने आज भोपाल में नामांकन फॉर्म खरीदा। बाबूलाल गौर गोविंदपुरा सीट से कृष्णा को टिकट दिलाना चाहते हैं। पिछले दिनों भाजपा ने 176 उम्मीदवारों के नामों का एलान किया था लेकिन उसमें गोविंदपुरा सीट का नाम नहीं था। इस सीट को होल्ड पर रखा गया है।
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दरअसर, भाजपा के लिए पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है। वह अपनी बढ़ती उम्र के बावजूद चुनाव लड़ना चाहते हैं। वह अपनी बहू कृष्णा गौर को गोविंदपुरा सीट पर लड़ाना चाहते हैं। गोविंदपुरा विधानसभा सीट भाजपा का गढ़ मानी जाती है। यहां से 88 साल के बाबूलाल गौर दशकों तक चुने जाते रहे हैं।
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इस सीट पर कई दावेदार हैं। हालांकि भाजपा ने अभी इसके लिए किसी का नाम फाइनल नहीं किया है। गौर ने अपना पहला चुनाव निर्दलीय के तौर पर लड़ा था और वह इसी सीट से 10 बार विधायक बन चुके हैं। कुछ दिन पहले ही उन्होंने कहा था, अगर हमें टिकट नहीं मिला तो मैं और कृष्णा जी अलग-अलग सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे।
