मध्यप्रदेश चुनाव 2018: 15 सीटों पर घर में घिरी भाजपा, तीन दर्जन पर बागी बने कांग्रेस का सिरदर्द

चुनाव डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Updated Tue, 27 Nov 2018 12:30 PM IST
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बीजेपी- कांग्रेस - फोटो : SELF

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मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 के लिए सोमवार को पांच बजते ही चुनाव प्रचार थम गया। नक्सल प्रभावी क्षेत्र बालाघाट की बैहर, लांजी और परसवाड़ा सीट पर प्रचार पर प्रतिबंध दोपहर तीन बजे से लागू हुआ। प्रचार थमने के बाद अब डोर-टू-डोर कैंपेन और बैठकों का दौर शुरू हो गया है। दोनों ही पार्टियां आखिर के कुछ घंटों में सभी समीकरणों को दुरुस्त कर मतदाताओं को साधने में लगी हैं।
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भाजपा 15 साल से सत्ता में है, उसका लक्ष्य लगातार चौथी बार सत्ता पर काबिज होने का है। वहीं जनता के गुस्से को भुनाकर कांग्रेस राज्य में अपना वनवास तोड़ने का प्रयास कर रही है। गुजरात चुनाव के नतीजों के बाद कांग्रेस बेहद सतर्कता बरत रही है। प्रदेश का यह चुनाव कांग्रेस के लिए करो या मारो का बन चुका है। यही कारण है कि किला फतह करने को कांग्रेस ने अपनी पूरी फौज उतार दी है।

भाजपा ने बड़े नेताओं को महत्वपूर्ण क्षेत्रों में लगाया 

आतंरिक रिपोर्ट में प्रतिकूल नतीजे मिलने के बाद भाजपा ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। मुख्यमंत्री समेत कई बड़े नेता क्षेत्र अनुसार चुनावी समीकरणों को सुधारने के लिए लगाए गए हैं। करीब 15 ऐसे मंत्री है जो अपने ही गढ़़ में घिरे हुए हैं। यह प्रचार के दौरान भी अपने क्षेत्र से बाहर नहीं निकल पाए। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने खुद ही मालवा-निमाड़ का क्षेत्र संभाला है जबकि प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती को बुंदेलखंड में प्रचार का जिम्मा दिया गया। इसी तरह सकारात्मक माहौल बनाने के लिए केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को विंध्य और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह को उनके ससुराल शहडोल भेजा गया।

तीन दर्जन सीटों पर बागियों से परेशान कांग्रेस

प्रचार के दौरान कांग्रेस ने नरम हिंदुत्व से लेकर प्रधानमंत्री मोदी पर निजी हमलों तक पार्टी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। प्रदेश की करीब तीन दर्जन सीटों पर कांग्रेस पार्टी को अपने बागी और असंतुष्ट नेताओं से चुनौती मिल रही है। पार्टी आलाकमान ने प्रदेश के नेताओं को अति आत्मविश्वास से बचने को कहा है। साथ ही विधानसभा क्षेत्रों को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर समीकरण सुधारने को कहा गया है। पार्टी आखिर के कुछ घंटों से लेकर ईवीएम की रखवाली तक कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं है। 
प्रदेश में 28 नवंबर को मतदान है। चुनाव के नतीजे 11 दिसंबर को जारी होंगे। 
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