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मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2018: किन्नर प्रत्याशी बढ़ा रहे भाजपा-कांग्रेस की मुश्किलें
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Updated Tue, 27 Nov 2018 04:09 PM IST
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भोपाल में रहनेवाले किन्नर
- फोटो : Amar Ujala
मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2018 में सभी राजनीतिक दल मतदाता को साधने में जुटी हैं। विभिन्न दलों और प्रत्याशियों ने जनता से अलग-अलग वादे किए हैं। लेकिन समाज का एक वर्ग ऐसा भी है जिसपर कोई भी राजनीतिक दल ज्यादा ध्यान नहीं देता। वो हैं थर्ड जेंडर यानी किन्नर।
चुनाव के वक्त हर राजनीतिक दल और प्रत्याशी जनता से लुभावने वादे करते हैं। जनता से वोट मांगकर उनके उद्धार की बात तक करते हैं। लेकिन इसी बीच एक ऐसा वर्ग भी है जो वोट तो करता है लेकिन आजतक उनके लिए किसी ने कोई भी पुख्ता कदम नहीं उठाया।
भोपाल में एक किन्नर ने बताया, "जो काम है हमें ही करना पड़ता है। ना साफ-सफाई है, ना कोई नेता आता है। हमारे पार्षद रफीक भाई हैं वो आकर कुछ मालूम करते हैं। वो भी जब से चुनाव चालू हो गया है मुंह फेरने लगे हैं।"
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इस बार मध्यप्रदेश चुनाव में दिलचस्प बात ये है कि इस बार चुनावी रण में 6 किन्नर भाजपा-कांग्रेस के दिग्गजों की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। साल 2000 में पहली किन्नर विधायक बनी शबनम मौसी भी इस बार मैदान में उतर आई हैं। उनके साथ ही 6 किन्नर और भी हैं जो निर्दलीय मैदान में है।
खास बात यह भी है कि इस साल किन्नर मतदाताओं की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। फिलहाल करीब 1,286 किन्नर वोटर मध्यप्रदेश में मौजूद हैं। लेकिन एक और सच्चाई यह है कि विकास से मीलों दूर रहने वाले कई किन्नर वोटरों ने तो अपना वोटर कार्ड तक नहीं बनवाया है क्योंकि उनका कहना है कि अब वो किसी भी पार्टी या नेता पर विश्वास ही नहीं करते हैं।
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चुनाव के वक्त हर राजनीतिक दल और प्रत्याशी जनता से लुभावने वादे करते हैं। जनता से वोट मांगकर उनके उद्धार की बात तक करते हैं। लेकिन इसी बीच एक ऐसा वर्ग भी है जो वोट तो करता है लेकिन आजतक उनके लिए किसी ने कोई भी पुख्ता कदम नहीं उठाया।
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भोपाल में एक किन्नर ने बताया, "जो काम है हमें ही करना पड़ता है। ना साफ-सफाई है, ना कोई नेता आता है। हमारे पार्षद रफीक भाई हैं वो आकर कुछ मालूम करते हैं। वो भी जब से चुनाव चालू हो गया है मुंह फेरने लगे हैं।"
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इस बार मध्यप्रदेश चुनाव में दिलचस्प बात ये है कि इस बार चुनावी रण में 6 किन्नर भाजपा-कांग्रेस के दिग्गजों की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। साल 2000 में पहली किन्नर विधायक बनी शबनम मौसी भी इस बार मैदान में उतर आई हैं। उनके साथ ही 6 किन्नर और भी हैं जो निर्दलीय मैदान में है।
खास बात यह भी है कि इस साल किन्नर मतदाताओं की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। फिलहाल करीब 1,286 किन्नर वोटर मध्यप्रदेश में मौजूद हैं। लेकिन एक और सच्चाई यह है कि विकास से मीलों दूर रहने वाले कई किन्नर वोटरों ने तो अपना वोटर कार्ड तक नहीं बनवाया है क्योंकि उनका कहना है कि अब वो किसी भी पार्टी या नेता पर विश्वास ही नहीं करते हैं।
