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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Madhya Pradesh assembly election 2018: Amar Ujala satta ka semifinal from Indore

मध्यप्रदेश चुनाव 2018: इंदौर ने पूछा- न व्यापार है न रोजगार, देश बाबा चलाएंगे या पढ़े लिखे नौजवान?

Fri, 16 Nov 2018 10:25 AM IST
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Updated Fri, 16 Nov 2018 10:25 AM IST
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Madhya Pradesh assembly election 2018: Amar Ujala satta ka semifinal from Indore
अमर उजाला चुनाव रथ इंदौर में - फोटो : Amar Ujala
मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर प्रदेश में सियासी सरगर्मी तेज है, नेताओं का प्रचार जोड़ पकड़ चुका है। यहां 28 नवंबर को एक ही चरण में 230 सीटों के लिए वोट डाले जाएंगे। अमर उजाला डॉट कॉम आपको बता रहा है राज्य के जमीनी हालात और उन विषयों के बारे में जो इस बार चुनावी मुद्दे हैं। इसी के मद्देनजर अमर उजाला का चुनाव रथ पहुंचा इंदौर। संवाददाता वैभव कुमार ने लोगों से बात कर यहां हालात का जायजा लिया। 
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उन्होंने जानने की कोशिश की कि आखिर देवास की जनता क्या चाहती है? उनके चुने हुए नेता उनकी उम्मीदों पर कितने खरे उतरे हैं? साथ ही यह भी जाना कि जनता के मन में क्या है। टी वैली प्रायोजित अमर उजाला के खास लाइव कार्यक्रम सत्ता के सेमीफाइनल में जानिए कि इंदौर में कैसे हैं जमीनी हालात और किसे जिताने के मूड में है यहां की जनता।  
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इंदौर में एक ऑटो चालक ने कहा कि बेरोजगारी सबसे बड़ा मुद्दा है। उनका कहना था कि इस बार की दिवाली को देखकर लगा ही नहीं कि त्योहार मनाया गया हो। उन्होंने कहा कि चुनाव का मुद्दा होना चाहिए कि व्यापार धंधा बेहतर हो और रोजगार मिले। 
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एक रिटायर्ड कर्मचारी ने कहा कि कोई चुनावी मुद्दा नहीं है। प्रदेश सरकार ने सभी काम किए हैं और कर रही है। इंदौर में विकास हुआ है। 2003 से पहले की तुलना में सड़कें अच्छी हुई हैं। 

एक शख्स ने कहा कि जीएसटी से व्यापारी परेशान हैं। साफ सफाई एक बड़ा मुद्दा है। उन्होंने स्वच्छता अभियान में इंदौर को नंबर वन घोषित करने को प्रायोजित बताया। उन्होंने कहा कि शादी में जैसे टेंट वाले आते हैं और सारी व्यवस्था करते हैं और शादी के बाद सारा सामान ले जाते हैं। ठीक वैसे ही स्वच्छता अभियान के सर्वे दल के आने से पहले ऐसी ही व्यवस्था की गई और उनके जाने के बाद शहर के सभी शौचालयों की वही पुरानी स्थिति हो गई। 

एक युवा ने कहा कि शहर में रोजगार नहीं है। टैक्स बहुत ज्यादा होने की वजह से कोई उद्योग धंधा नहीं स्थापित हो पाया। इसलिए बेरोजगारी बहुत ज्यादा है। 

प्रिंटिंग व्यवसाय से जुड़े एक व्यक्ति ने कहा कि युवाओं के पास काम नहीं है। इस बार की दिवाली में बाजार में हुजूम था लेकिन दुकानें खाली पड़ी थी। सभी दुकानदारों का कहना था कि दिवाली बिगड़ गई। कारण कि किसी के पास पैसा नहीं है और न कामकाज। 

उन्होंने कहा कि व्यापारी पहले खुल के काम कर सकता था। जीएसटी के बाद दुकानदारों के हाथ बंध गए हैं। यहां तक बैंक में जमा अपने 10 हजार रुपये निकालने के लिए भी कई तरह के कागजात जमा करने पड़ते हैं। पढ़ा लिखा युवा वर्ग आज नौकरियों के लिए भटक रहा है। कंपनियों का व्यापार खत्म हो रहा है इसलिए उनके पास देने को काम नहीं है। 

एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि इंदौर शहर में विकास के नाम पर विनाश हो रहा है। सड़कें चौड़ी करने के नाम पर कितने ही घरों को तोड़ दिया गया। न रोजगार है, ना व्यापार है। व्यापम घोटाला हुआ। शिवराज सरकार बाबाओं को राज्यमंत्री बना देती है। उन्होंने सवाल किया कि यह देश बाबाओं से चलेगा या पढ़े लिखे नौजवानों से चलेगा। 

एक बुजुर्ग व्यक्ति ने कहा कि इंदौर शहर के कई मुद्दे हैं लेकिन नेता अपने मुद्दे ही चलाते हैं और अपने काम गिनाते हैं। दो साल से सड़कें उबड़-खाबड़ पड़ी है। विकास से ज्यादा विनाश हो रहा है। 


एक अन्य व्यक्ति ने कहा महापौर ने अपने प्रचार के समय प्लास्टिक के डिस्पोजेबल ग्लास से लोगों को पानी पिलाया। इस गंदगी के लिए उन्होंने सिर्फ 50 रुपये की रसीद कटाई। जबकि अधिकारी व्यापारियों के दुकानों में पॉलीथीन जब्त करने लिए पांच हजार रुपये के चालान बनाते हैं। उन्होंने महापौर से सवाल किया कि उनका जुर्मान देना दिखावा था या कुछ और? 
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