जानें भैय्यूजी महाराज की मौत के बाद की पांच कहानियां
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बीते मंगलवार आध्यात्मिक गुरू भय्यूजी महाराज की मौत हो गई। उन्होंने इंदौर स्थित अपने घर में खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। इसकी खबर मिलते ही उनके घरवाले उन्हें अस्पताल लेकर गए लेकिन उनकी मौत पहले ही हो चुकी थी। पांच फीट 11 इंच का सुदर्शन शरीर, चंद्रमुखी कांति से युक्त दमकते चेहरे वाला आभा मंडल, माथे पर लाल चंदन का टीका, गले में सूर्य लॉकेट और मीठी बोली.. कुछ ऐसी पर्सनालिटी के धनी थे भय्यूजी महाराज। आज हम आपको बताएंगे भैय्यूजी महाराज की मौत के बाद की पांच कहानियां-
बेटी की आखिरी तमन्ना
बुधवार सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक का समय बेहद ही दुखद था। इस दिन भैय्यूजी महाराज का अंतिम संस्कार हुआ। कूलर में रखे उनके पार्थिव शरीर को चारों ओर से कांच से बंद किया गया था। वहीं पास में बैठी थी भैय्यूजी की बेटी कूहु, जो बार बार अपने पिता से बस एक ही बात बोल रही थी। एक बार मुझे छूने दो... उन्हें एक बार गले लगाने दो। शीशे का वो कवच पिता बेटी के बीच था। जो कूहु को उसके पिता तक पहुंचने नहीं दे रहा था। वह कह रही थी बाबा मैं तो अभी बच्ची हूं,आपने मुझे अकेला कैसे छोड़ दिया.. किसके सहारे जिऊंगी मैं। पिता को छूने की अपनी आखिरी तमन्ना को कुहू बार बार दोहराती रही।
तीन महीने की बेटी अंतिम बार मिली पिता से
वह नजारा जो भी देखता वह रो जाता... उस वक्त भैय्यूजी की तीन महीने की बेटी को अपने पिता के अंतिम दर्शन कराने के लिए लाया गया। कुछ देर बाद जब एक फूलों से सजे वाहन पर भैय्यूजी को ले जाया जा रहा था तो उनकी पत्नी चीखते हुए बोली मुझे भी साथ ले जाओ, अकेले कहां ले जा रहे हो.. उनके बिना मैं कैसे रहूंगी। बोलते बोलते थोड़ी ही देर में वह जमीन पर गिर गईं।
अंतिम दर्शन में नहीं आया राज्य का कोई मंत्री
देश के बड़े नेताओं के बीज भैय्यूजी की पैठ बेहद मजबूत थी। वह मध्यप्रदेश के साथ देश के एक जाने माने चेहरे थे। एक समय ऐसा भी था जब महाराष्ट्र की राजनीति में कोई भी उथल पुथल होती थी तो मंत्री इंदौर की तरफ दौड़े चले आते थे। भैय्यूजी ने पीएम मोदी से लेकर अन्ना हजारे के साथ मंच साझा किया था।
साथ ही वह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के भी बेहद करीबी माने जाते थे। ऐसे में सबको इस बात की उम्मीद थी कि उनके अंतिम दर्शन के लिए मंत्री जरूर आएंगे। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ उनकी अंतिम यात्रा में ना तो सीएम शिवराज पहुंचे और ना ही उनका कोई मंत्री पहुंचा। साथ ही लोगों को इस बात की भी उम्मीद थी कि भैय्यूजी की विदाई राजकीय सम्मान के साथ की जाएगी लेकिन आखिरी समय तक भी सरकार की ओर से ऐसी कोई कवायद नजर नहीं आई।
मौत के बाद भी मौत की वजह बरकरार रही
भैय्यूजी ने पारिवारिक कलह के चलते आत्महत्या की थी। लेकिन उनकी मौत के बाद भी उनकी मौत का ये कारण बरकरार रहा। भैय्यूजी को अस्पताल से उनके घर ले जाया गया। इसके बाद उनके सेवादार उनके पार्थिव शरीर को उनके सूर्योदय आश्रम ले गए। घर से आश्रम आने तक उनकी पत्नी डॉ. आयुषी और बेटी कूहु एक ही कार से गईं। इस दौरान उन्होंने ना तो एक दूसरे से बात की और ना ही एक दूसरे की ओर देखा। दोनों के बीच तनाव साफ दिखाई दे रहा था।
इन्हें सौंपकर गए आश्रम की पूरी जिम्मेदारी
भैय्यूजी ने आश्रम की सारी जिम्मेदारी अपने सेवक विनायक को दे दी। इस बात का जिक्र उन्होंने अपने सूसाइड नोट में किया। विनायक पिछले 20 सालों से भैय्यूजी के संपर्क में थे। जब वह पहली बार भैय्यूजी से मिला तो वह बहुत प्रभावित हो गया और उनके घर के सदस्य जैसा ही बन गया।
नोट में भय्यूजी ने यह भी लिखा, 'मेरी सारी आर्थिक शक्तियां, प्रॉपर्टीज, बैंक अकाउंट्स की सारी जिम्मेदारी मेरे मरने के बाद विनायक संभालेगा। मैं विनायक पर विश्वास करता हूं। इसलिए उसे ये सारी जिम्मेदारी देकर जा रहा हूं और ये मैं बिना किसी दबाव के लिख रहा हूं।'
