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Omkareshwar : करोड़ों की पाइपलाइन में भ्रष्टाचार का साया, वन विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल; जांच की उठी मांग
Tue, 07 Oct 2025 04:23 PM IST
तरुणेंद्र चतुर्वेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर
Published by: तरुणेंद्र चतुर्वेदी
Updated Tue, 07 Oct 2025 04:23 PM IST
सार
MP News : ओंकारेश्वर बांध से सेलदा पावर प्लांट तक बिछाई जा रही करोड़ों रुपये की पाइपलाइन एक बार फिर विवादों में है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य में भारी अनियमितताएं की जा रही हैं। रात के अंधेरे में बिना सुरक्षा मानकों के काम कराया जा रहा है।
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वन क्षेत्र में अवैध निर्माण, सरकारी धन की बर्बादी का बड़ा खेल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
ओंकारेश्वर बांध के बैकवाटर से खरगोन जिले के बेड़िया स्थित सेलदा पावर प्लांट तक बिछाई जा रही भूमिगत पाइपलाइन अनियमितता की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। पाइपलाइन कार्य में न तो सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है और न ही गुणवत्तापूर्ण सामग्री का उपयोग। मिली जानकारी के अनुसार, ओंकारेश्वर बांध के बैकवाटर के पास बसे ग्राम गुंजारी के निकट वन परिक्षेत्र में रात के अंधेरे में पाइपलाइन निर्माण कार्य कराया जा रहा है। मजदूरों से बिना किसी सुरक्षा उपकरण के कार्य करवाया जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि कार्य रात में इसलिए कराया जाता है ताकि गुणवत्ता संबंधी कमियों को छुपाया जा सके।
गौरतलब है कि इसके पहले भी 165 करोड़ रुपये की लागत से ओंकारेश्वर से सेलदा पावर प्लांट तक 5 वर्ष पूर्व पाइप लाइन डाली गई थी। इसमें कार्य की गुणवत्ता ठीक नहीं होने के कारण पाइप लाइन फूटती रही। फिर दूसरी पाइप लाइन डालना शुरू किया गया। इसकी भी लागत उससे कहीं अधिक बताई जा रही है। लेकिन गुणवत्ता का बिल्कुल भी ध्यान नहीं रखा जा रहा है।
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वन्यजीवों पर संकट
रात में हो रहे इस निर्माण कार्य से जंगली जानवरों को गंभीर नुकसान पहुंचने की आशंका है। वहीं, गुंजारी गांव से होकर गुजर रहे बड़े-बड़े डंपरों से रेत और गिट्टी का अवैध परिवहन भी खुलेआम किया जा रहा है। इससे ग्रामीणों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
वन विभाग की भूमिका पर सवाल
वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी मौके पर उपस्थित नहीं हुए। जब इस बारे में पुनासा रेंजर रवि सेठ से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मैं स्टाफ को भेजकर मामला दिखवाता हूं, रात में किसी प्रकार की परमिशन हमारे द्वारा नहीं दी गई है। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि बिना विभाग की मिलीभगत के इस तरह का निर्माण कार्य और अवैध खनन संभव ही नहीं है।
स्थानीय समिति के पदाधिकारियों का बयान
वन समिति सदस्य बिहारी इक्ले, दीपक वर्मा (वन समिति पूर्व अध्यक्ष), दिलीप वर्मा, सुखदेव वर्मा और संतोष डावर ने कहा कि इस लापरवाही से न केवल जंगल का नुकसान हो रहा है बल्कि पर्यावरण और ग्रामीणों की सुरक्षा भी खतरे में है। सरकार का भी करोड़ों रुपये बर्बाद होगा क्योंकि पूर्व में इस प्रकार जो पाइपलाइन डाली थी, उसमें भी नुकसान हो चुका है।
सवाल उठे, जवाब अब भी शेष
यह मामला केवल पाइपलाइन निर्माण का नहीं है, बल्कि करोड़ों रुपये के सरकारी प्रोजेक्ट में चल रहे भारी भ्रष्टाचार और वन विभाग की लापरवाही का भी है। ग्रामीणों ने मांग की है कि शासन-प्रशासन इस प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर कड़ी कार्रवाई करे।
ये भी पढ़ें- Deadly Cough Syrup: वही दवा... वही लक्षण, दोनों किडनी फेल, दो मौत के बाद अब मासूम हर्ष लड़ रहा जिंदगी की जंग
शंका के दायरे में आया वन विभाग
जब इस पूरे मामले में ओंकारेश्वर वन परिक्षेत्र के डिप्टी रेंजर आनंद राम खांडे से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि मैं जानकारी देने के लिए अधिकृत नहीं हूं, और जवाबदारियों से अपना पल्ला झाड़ लिया। जबकि प्रश्न यह उठता है कि जिस अधिकारी को वन की सुरक्षा का जिम्मा सौंपा गया है, वही इस तरह के जवाब दें तो कहीं न कहीं वह विभाग भी शंका के दायरे में आता है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि जिस जंगल में काम चल रहा है, वह रिजर्व फॉरेस्ट में आता है। वहां पर किसी भी आम आदमी को जाने की अनुमति नहीं है। जो कंपनी काम कर रही है, वह दिन में काम न करके रात्रि में कर रही है। वन क्षेत्र में कई बार तेंदुओं के झुंड देखे गए हैं। रात्रि में काम करने वाले मजदूरों पर भी हमला हो सकता है, जिससे किसी की भी जान जा सकती है।
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वन्यजीवों पर संकट
रात में हो रहे इस निर्माण कार्य से जंगली जानवरों को गंभीर नुकसान पहुंचने की आशंका है। वहीं, गुंजारी गांव से होकर गुजर रहे बड़े-बड़े डंपरों से रेत और गिट्टी का अवैध परिवहन भी खुलेआम किया जा रहा है। इससे ग्रामीणों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
वन विभाग की भूमिका पर सवाल
वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी मौके पर उपस्थित नहीं हुए। जब इस बारे में पुनासा रेंजर रवि सेठ से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मैं स्टाफ को भेजकर मामला दिखवाता हूं, रात में किसी प्रकार की परमिशन हमारे द्वारा नहीं दी गई है। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि बिना विभाग की मिलीभगत के इस तरह का निर्माण कार्य और अवैध खनन संभव ही नहीं है।
स्थानीय समिति के पदाधिकारियों का बयान
वन समिति सदस्य बिहारी इक्ले, दीपक वर्मा (वन समिति पूर्व अध्यक्ष), दिलीप वर्मा, सुखदेव वर्मा और संतोष डावर ने कहा कि इस लापरवाही से न केवल जंगल का नुकसान हो रहा है बल्कि पर्यावरण और ग्रामीणों की सुरक्षा भी खतरे में है। सरकार का भी करोड़ों रुपये बर्बाद होगा क्योंकि पूर्व में इस प्रकार जो पाइपलाइन डाली थी, उसमें भी नुकसान हो चुका है।
सवाल उठे, जवाब अब भी शेष
यह मामला केवल पाइपलाइन निर्माण का नहीं है, बल्कि करोड़ों रुपये के सरकारी प्रोजेक्ट में चल रहे भारी भ्रष्टाचार और वन विभाग की लापरवाही का भी है। ग्रामीणों ने मांग की है कि शासन-प्रशासन इस प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर कड़ी कार्रवाई करे।
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शंका के दायरे में आया वन विभाग
जब इस पूरे मामले में ओंकारेश्वर वन परिक्षेत्र के डिप्टी रेंजर आनंद राम खांडे से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि मैं जानकारी देने के लिए अधिकृत नहीं हूं, और जवाबदारियों से अपना पल्ला झाड़ लिया। जबकि प्रश्न यह उठता है कि जिस अधिकारी को वन की सुरक्षा का जिम्मा सौंपा गया है, वही इस तरह के जवाब दें तो कहीं न कहीं वह विभाग भी शंका के दायरे में आता है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि जिस जंगल में काम चल रहा है, वह रिजर्व फॉरेस्ट में आता है। वहां पर किसी भी आम आदमी को जाने की अनुमति नहीं है। जो कंपनी काम कर रही है, वह दिन में काम न करके रात्रि में कर रही है। वन क्षेत्र में कई बार तेंदुओं के झुंड देखे गए हैं। रात्रि में काम करने वाले मजदूरों पर भी हमला हो सकता है, जिससे किसी की भी जान जा सकती है।
