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Khargone: निमाड़ के घर-घर में विराजित हुईं गणगौर माता, भक्त नाचते-गाते माता को लाए
Fri, 24 Mar 2023 09:02 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खरगोन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खरगोन
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Fri, 24 Mar 2023 09:02 PM IST
सार
मध्यप्रदेश के निमाड़ क्षेत्र में गणगौर पर्व को लेकर सुबह से ही लोगों में खुशी का वातावरण देखा गया। गणगौर का पर्व नगर में बड़े ही धूमधाम एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यह पर्व माता अहिल्याबाई होलकर के समय से प्रसिद्ध है।
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खरगोन के महेश्वर में गणगौर पर्व पर धूमधाम से मनाया जाता है।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
खरगोन के महेश्वर में शुक्रवार को मनौती वाले घरों पर गणगौर माता विराजित की गईं। लोग बड़े ही हर्षोल्लास के साथ झूमते नाचते गाते माता को घर लेकर आए। गणगौर पर्व को लेकर सुबह से ही लोगों में खुशी का वातावरण देखा गया। गणगौर का पर्व नगर में बड़े ही धूमधाम एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यह पर्व माता अहिल्याबाई होलकर के समय से प्रसिद्ध है।
बुजुर्गों का कहना है कि देवी अहिल्या होलकर रियासत के समय राजस्थान से आए कुछ हस्तशिल्प कारीगरों ने इसकी शुरुआत महेश्वर में की थी, जो आज निमाड़ का गौरव बना हुआ है। पूरे निमाड़ में गणगौर पर्व अपनी एक अलग छवि रखता है। सर्वप्रथम बाड़ियों में गेहूं के ज्वारे बोए जाते हैं एवं प्रतिदिन पूजन होता है। गणगौर पर्व में 9 दिन तक महिलाओं द्वारा मनौती वाले घरों पर जाकर झालरिया देकर गीत गाए जाते हैं। मक्का की धानी व भुने चने की प्रसादी (तमोल) बांटी जाती है। कई जगह पर दूल्हा दुल्हन बनकर महिलाएं समूह के रूप में इकट्ठी होकर बाग में पाती खेलती हैं। इस पर्व में माता लाने वाले श्रद्धालु प्रतिदिन पति पत्नी के जोड़े को अपने घर पर माता के पूजन के लिए तिलक लगाकर आमंत्रित करते हैं, जहां पूजन, गीत के बाद भोजन प्रसादी खिलाई जाती है।
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बुजुर्गों का कहना है कि देवी अहिल्या होलकर रियासत के समय राजस्थान से आए कुछ हस्तशिल्प कारीगरों ने इसकी शुरुआत महेश्वर में की थी, जो आज निमाड़ का गौरव बना हुआ है। पूरे निमाड़ में गणगौर पर्व अपनी एक अलग छवि रखता है। सर्वप्रथम बाड़ियों में गेहूं के ज्वारे बोए जाते हैं एवं प्रतिदिन पूजन होता है। गणगौर पर्व में 9 दिन तक महिलाओं द्वारा मनौती वाले घरों पर जाकर झालरिया देकर गीत गाए जाते हैं। मक्का की धानी व भुने चने की प्रसादी (तमोल) बांटी जाती है। कई जगह पर दूल्हा दुल्हन बनकर महिलाएं समूह के रूप में इकट्ठी होकर बाग में पाती खेलती हैं। इस पर्व में माता लाने वाले श्रद्धालु प्रतिदिन पति पत्नी के जोड़े को अपने घर पर माता के पूजन के लिए तिलक लगाकर आमंत्रित करते हैं, जहां पूजन, गीत के बाद भोजन प्रसादी खिलाई जाती है।
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