Mamleshwar Lok: ओंकारेश्वर में ममलेश्वर लोक निर्माण का स्थान बदला जाएगा, संतों और नगरवासियों का संघर्ष सफल रहा
ओंकारेश्वर में ममलेश्वर लोक निर्माण के विरोध में दो दिन का बंद सफल रहा। जनभावनाओं, संत समाज के विरोध और विस्थापन की आशंका को देखते हुए अपर कलेक्टर ने वर्तमान स्थल पर प्रोजेक्ट तत्काल निरस्त किया। भविष्य में वैकल्पिक स्थान पर संतों-जनप्रतिनिधियों की सहमति से निर्माण होगा।
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विस्तार
पिछले 15 दिनों से ओंकारेश्वर में ममलेश्वर महालोक निर्माण को लेकर चल रहे विवाद का अंततः मंगलवार को पटाक्षेप हो गया। ब्रह्मपुरी क्षेत्र में ममलेश्वर लोक का निर्माण नहीं करने की नगरवासियों और संत समाज की मांग को सरकार ने स्वीकार कर लिया। अब यह परियोजना किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर बनाई जाएगी। यह निर्णय न केवल ओंकारेश्वर, बल्कि पूरे नर्मदा तट पर बसे आध्यात्मिक समुदाय के लिए बड़ी राहत लेकर आया।
बता दें, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से मुलाकात के बावजूद कोई निर्णय नहीं निकला, तब पंचायती महान निर्वाणी अखाड़ा के सचिव कैलाश भारती महाराज, महंत मंगलदास त्यागी महाराज तथा अन्य संतों के मार्गदर्शन में ओंकारेश्वर में ऐतिहासिक स्वैच्छिक बंद का आह्वान किया गया था। दो दिनों तक नगर की सभी दुकानें, होटल, नावें, व्यापार और सेवा गतिविधियां ठप रही थीं। ओंकारेश्वर के इतिहास में यह अब तक का सबसे बड़ा शांतिपूर्ण आंदोलन माना जा रहा है।
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मंगलवार को जोड़ गणपति हनुमान मंदिर पर संत समाज की महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें महंत श्यामसुंदर दास महाराज, महामंडलेश्वर बजरंगदास महाराज, संत संविदानंद महाराज, एवं अनेक संतों ने स्पष्ट कहा कि हम किसी भी परिस्थिति में अपने मठ, मंदिर, आश्रम और अखाड़े नहीं उजड़ने देंगे। यदि जरूरत पड़ी तो पूरे भारत से संतों को यहां बुलाया जाएगा। बैठक के दौरान हजारों महिला-पुरुषों ने आश्रम परिसर में पहुंचकर संत समाज को अपना समर्थन दिया, जिसने आंदोलन को निर्णायक बना दिया।
सरकार को झुकना पड़ा — लिखित आदेश जारी
लंबी चर्चा के बाद मांधाता विधायक नारायण पटेल, अपर कलेक्टर काशीराम बडोले, तहसीलदार उदय मंडलोई सहित प्रशासनिक टीम ने हालात समझे। विधायक नारायण पटेल ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और दिल्ली में मौजूद कलेक्टर ऋषभ गुप्ता से बात कर ओंकारेश्वर की गंभीर स्थिति से अवगत करवाया। इसके बाद डिप्टी कलेक्टर ने लिखित में आदेश जारी किया कि ममलेश्वर लोक ब्रह्मपुरी क्षेत्र में नहीं बनेगा। इसे अन्यत्र स्थान पर बनाया जाएगा और निर्माण से पहले स्थानीय संत समाज व जनता की सहमति ली जाएगी।यह लिखित आदेश मिलते ही नगर में खुशी की लहर दौड़ गई। दो दिनों से बंद पड़ा ओंकारेश्वर देखते ही देखते दीपावली जैसा जगमगाने लगा।
संतों को लिखित आदेश सौंपते प्रशासनिक अधिकारी।
विनाश पर विकास नहीं होने दूंगा : पटेल
सरकार के प्रतिनिधि के रूप में मांधाता विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक नारायण पटेल की विवाद के हल में अहम भूमिका रही। उन्होंने बीच का रास्ता निकाला और मुख्यमंत्री से चर्चा कर समस्या का समाधान निकाल लिया। पटेल ने कहा कि मैं विनाश पर विकास नहीं होने दूंगा, मैं हमेशा सनातनी हूं, संतों के चरणों में पहुंचा हूं। किसी भी संत की बद्दुआ से कैसे राजनीति कर सकता हूं
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संतों व जनप्रतिनिधियों ने जताया आभार
- कैलाश भारती जी महाराज ने कहा कि शासन ने समय रहते सभी की भावनाओं का सम्मान किया है। यह नगरवासियों की एकता की जीत है।
- महंत श्यामसुंदर दास जी महाराज ने कहा कि सरकार ने प्राचीन सभ्यता, मठ-मंदिर और संतों को उजड़ने से बचाया है। हम मुख्यमंत्री और विधायक का धन्यवाद करते हैं।
- मंगलदास त्यागी जी महाराज ने कहा कि यह निर्णय ओंकारेश्वर की आत्मा को बचाने वाला है।
- भाजपा नगर अध्यक्ष संतोष वर्मा ने कहा कि हमें विश्वास था कि न्याय मिलेगा, और आज पूरा ओंकारेश्वर न्याय पा गया।
- नाविक संघ अध्यक्ष कैलाश भंवरिया ने कहा कि यह हर उस नाविक की जीत है जिसने अपनी रोजी-रोटी रोककर भी आंदोलन का साथ दिया।
- ओंकारेश्वर नगर के पूर्व फौजी मंगल सिंह ठाकुर ने कहा कि ओंकारेश्वर के आने वाली कई पीढ़ियां की बर्बादी से बच गईं। इसके जनता ने ओंकारेश्वर में जो एकता दिखाई है वह इतिहास के पन्नों में दर्ज होकर रह गई है।