{"_id":"672f55d2e3445bd873094936","slug":"omkareshwar-news-lord-omkareshwar-left-for-malwa-tour-for-15-days-2024-11-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Omkareshwar: भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की मालवा यात्रा परंपरा आज भी कायम, सूक्ष्म रूप से रवाना हुए भगवान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Omkareshwar: भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की मालवा यात्रा परंपरा आज भी कायम, सूक्ष्म रूप से रवाना हुए भगवान
Sat, 09 Nov 2024 06:00 PM IST
अर्पित याज्ञनिक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर
Published by: अर्पित याज्ञनिक
Updated Sat, 09 Nov 2024 06:00 PM IST
सार
मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग भगवान पुरानी परंपरा के अनुसार कार्तिक शुक्ल पक्ष गोपाष्टमी से मालवा भ्रमण के लिए रवाना हुए हैं। 15 दिन की इस यात्रा में भगवान सूक्ष्म रूप से मालवा के भक्तों को दर्शन देने जाते हैं, और इस दौरान मंदिर में रात्रि शयन नहीं होता।
विज्ञापन
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में भ्रमण की जानकारी देते पुजारी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग भगवान, पुरानी परंपरा के अनुसार, कार्तिक शुक्ल पक्ष गोपाष्टमी से 15 दिन की मालवा यात्रा पर सूक्ष्म रूप से रवाना हो गए हैं। भक्तों को दर्शन देने की इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान मंदिर में रात का शयन स्थगित रहेगा, और भगवान भैरव अष्टमी पर लौटेंगे। हर वर्ष की तरह इस बार भी कार्तिक सुदी अष्टमी को ओंकारजी महाराज 15 दिन के लिए मालवा भ्रमण पर चले गए। मंदिर ट्रस्ट ने भगवान को मालवा भ्रमण के लिए रवाना किया।
विज्ञापन
पुरानी परंपरा के अनुसार ज्योतिर्लिंग भगवान एक पखवाड़े के लिए मालवा भ्रमण पर जाते हैं। मंदिर ट्रस्ट के पंडित पुजारियों ने रविवार सुबह भगवान को मालवा रवाना करने से पहले सभी धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करवाएं। गेहूं के आटे, शुद्ध घी, गुड़ का बना प्रसाद सुपड़ी का भोग लगाकर भगवान को सूक्ष्म रूप से मालवा के लिए रवाना किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
पुरानी परंपरा को निभाते हुए श्री जी मंदिर संस्थान ने अभी भी इसे कायम रखा हुआ है। मंदिर ट्रस्ट प्रबंधक आशीष दीक्षित ने बताया कि शनिवार कार्तिक शुक्ल पक्ष गोपाष्टमी पर मंदिर ट्रस्ट की ओर से भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग को सूक्ष्म रूप से रवाना किया गया है, जो वापस भैरव अष्टमी को दिनांक 23 नवंबर शनिवार को 15 दिन की यात्रा करने के बाद लौटेंगे।
पुरानी परंपरा कायम
सहायक मुख्य कार्यपालन अधिकारी अशोक महाजन ने बताया कि प्राचीन समय से मान्यता है कि ओंकारजी महाराज मालवा के भक्तों दर्शन देने के लिए 15 दिनों की मालवा यात्रा करते थे। इस परंपरा को जब कायम किया गया उस समय इतने संसाधन नहीं थे कि सभी लोग भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने ओंकारेश्वर पहुंच सकें। इसलिए यह परंपरा शुरू की गई थी, लेकिन धीरे-धीरे समय के साथ होते गए बदलाव के बाद भी मंदिर ट्रस्ट ने इसे अभी भी कायम रखा हुआ है।
15 दिन नहीं होगा रात्रि शयन
भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के शायनकाल पुजारी पंडित डंकेश्वर दीक्षित ने बताया कि 15 दिन तक भगवान का रात्रि शयन नहीं होगा। पूर्व में ओंकारजी महाराज पालकी में सवार होकर ओंकारेश्वर से मालवा भ्रमण लाव लश्कर एवं गाजे-बाजे के साथ के साथ रवाना होते थे। साथ में पुजारी सेवक नगाड़े ढोल ढमाके रसोइदार रहते थे। गांव-गांव जाकर भक्तों से मिलते थे। रात्रि में गांवो में विश्राम करते समय भक्त सारी व्यवस्था करते थे।
अब पालकी नहीं जाती
गांवों के भक्त किसानों ने कृषि भूमि भी ओंकारजी महाराज के लिए मंदिर को दान दी थी। जो मंदिर ट्रस्ट के नाम से दर्ज है। भगवान के मालवा जाने को लेकर यह प्रमाणित करता है कि अनेक स्थानों पर इंदौर उज्जैन संभाग खंडवा जिले में लोगों ने भगवान को जमीन दान की है, जो आज भी मंदिर ट्रस्ट के नाम पर है। धीरे-धीरे समय बदलता गया परंपराएं सीमित होती गईं, लेकिन उसे आज भी मंदिर ट्रस्ट ने कायम रखा हुआ है। भगवान मालवा तो जाते हैं, लेकिन समय के परिवर्तन के साथ अब पालकी नहीं जाती है।
मंदिर में नहीं होगा कोई बड़ा कार्यक्रम
पुरानी परंपराओं के अनुसार कार्तिक माह की अष्टमी से भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मालवा में भक्तों को दर्शन देने जाते हैं। इसलिए किसी भी प्रकार के कोई बड़ा कार्यक्रम मंदिर में नहीं होता है। सभी धार्मिक अनुष्ठान सूक्ष्म रूप से किए जाते हैं। विशेष करके शाम को शयन आरती के समय भगवान को लगने वाला शयन नहीं होता है। तीनों पहर की आरती मंदिर के तीन काल के पुजारी संपन्न करवाते हैं। भगवान भैरव अष्टमी पर 15 दिन की यात्रा कर पुनः वापस मंदिर में लौटते हैं, तब सभी कार्यक्रम शुरू होते हैं।
