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ओंकारेश्वर में अद्वैत और एआई का संगम, डॉ. प्रत्युष कुमार बोले- भारत दिखाएगा एथिकल टेक्नोलॉजी की नई राह

Sun, 19 Apr 2026 10:07 PM IST
Ashutosh Pratap Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर Published by: Ashutosh Pratap Singh Updated Sun, 19 Apr 2026 10:07 PM IST
सार

ओंकारेश्वर के मांधाता पर्वत पर चल रहे पंचदिवसीय एकात्म पर्व में अद्वैत वेदांत और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के संगम पर गहन चर्चा हुई। सर्वम AI के संस्थापक डॉ. प्रत्युष कुमार ने कहा कि भारत अपनी अद्वैत आधारित दार्शनिक परंपरा के कारण AI को सकारात्मक और नैतिक दृष्टिकोण से देखता है, जबकि दुनिया में इसे लेकर भय का माहौल है।

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डॉ. प्रत्युष कुमार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ओंकारेश्वर के ओंकार पर्वत पर आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास, संस्कृति विभाग (मप्र शासन) द्वारा आयोजित पंचदिवसीय एकात्म पर्व के तीसरे दिन अद्वैत दर्शन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर विशेष सत्र आयोजित किए गए। इस अवसर पर देशभर के विद्वान, संन्यासी और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हुए। कार्यक्रम 21 अप्रैल तक जारी रहेगा।
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 AI और अद्वैत पर गहन चर्चा, भारत की दार्शनिक शक्ति पर जोर

सर्वम AI के संस्थापक डॉ. प्रत्युष कुमार ने कहा कि भारत अपनी अद्वैत आधारित गहरी दार्शनिक परंपरा के कारण AI को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखता है। उन्होंने कहा कि जहां दुनिया AI को लेकर नौकरी और बदलाव के डर में है, वहीं भारत आशावादी है। उनके अनुसार AI को दर्शन से जोड़कर ही उसे एथिकल बनाया जा सकता है। डॉ. प्रत्युष कुमार ने कहा कि AI एक यूनिफाइड सिस्टम है, जो जटिल कार्यों को सरल बना सकता है। उन्होंने कहा कि AI को इस तरह विकसित किया जा सकता है कि यह मानव जीवन को आसान बनाए, लेकिन इसका नैतिक उपयोग दार्शनिक मूल्यों से जुड़कर ही संभव है। उनका मानना है कि आने वाले समय में AI मानव जैसी भावनाएं और संवाद क्षमता भी विकसित कर सकता है।
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भारत की तकनीकी भूमिका पर आत्ममंथन

उन्होंने स्वीकार किया कि पिछले कुछ दशकों में भारत का तकनीकी योगदान सीमित रहा है, लेकिन भविष्य में अद्वैत दर्शन के साथ AI का समन्वय भारत को वैश्विक नेतृत्व दिला सकता है। आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर राहुल गर्ग ने कहा कि यदि भारत अपने प्रतिभाशाली युवाओं को अद्वैत की शिक्षा से जोड़ दे, तो ऐसे स्टार्टअप विकसित हो सकते हैं जो AI को मूल्य और एकता आधारित दिशा देंगे।
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स्वामी परम शिवानंद का ‘संस्कृति दर्शनम्’ प्रोजेक्ट

रामकृष्ण मिशन चेन्नई के स्वामी परम शिवानंद ने बताया कि वे वेदांत और आधुनिक तकनीक को जोड़कर युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य के लिए कार्य कर रहे हैं। उनकी परियोजना ‘संस्कृति दर्शनम्’ का उद्देश्य AI और मिश्रित वास्तविकता के माध्यम से वेदांत को व्यावहारिक बनाना है। श्रौत इष्टि की ज्योति से ओंकारेश्वर में एकात्म पर्व आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया है। श्रृंगेरी से आए 50 आचार्य प्रतिदिन वैदिक अनुष्ठान कर रहे हैं, जिनमें मंत्र पारायण, यज्ञ और वेद पारायण शामिल हैं। श्रौत इष्टि को वेदों में श्रेष्ठतम कर्म माना गया है, जिसमें अग्नि में आहुति देकर ब्रह्मांडीय संतुलन और देव-मानव संबंधों का संतुलन स्थापित किया जाता है। यह केवल अनुष्ठान नहीं बल्कि आत्मिक शुद्धि और आध्यात्मिक उत्थान का माध्यम भी है।

 

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अहिताग्नि परंपरा और विश्वकल्याण की भावना

श्रौत इष्टि करने वाले साधक अहिताग्नि कहलाते हैं, जो गार्हपत्य, आहवनीय और दक्षिणाग्नि अग्नियों की परंपरा का पालन करते हैं। भारत में वर्तमान में बहुत सीमित संख्या में ही अहिताग्नि साधक हैं, जो इस परंपरा की गहराई और कठिन साधना को दर्शाता है। यह वैदिक परंपरा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि विश्वकल्याण की भावना और सनातन संस्कृति के संरक्षण का माध्यम है। एकात्म पर्व इस विचार को आधुनिक संदर्भ में नई ऊर्जा प्रदान कर रहा है।
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