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Omkareshwar News: नर्मदा घाट पर सुरक्षा फिर नाकाम, 17 वर्षीय छात्र की डूबने से मौत, मचा हड़कंप
Sat, 24 May 2025 08:48 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर
Published by: आशुतोष प्रताप सिंह
Updated Sat, 24 May 2025 08:48 PM IST
सार
रविवार को पवित्र नगरी ओंकारेश्वर में एक दुखद घटना हुई। नर्मदा नदी में नहाते समय 17 साल के देवांश सोलंकी की डूबने से मौत हो गई। देवांश भोगांवा गांव का रहने वाला था। वह अपने पिता वीरेंद्र सिंह सोलंकी के साथ ओंकारेश्वर दर्शन और नर्मदा में स्नान करने आया था।
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मृतक देवांश (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पवित्र नगरी ओंकारेश्वर में रविवार को एक दुखद हादसा हो गया, जहां नर्मदा नदी में नहाते समय एक 17 साल के लड़के की डूबने से मौत हो गई। मृतक का नाम देवांश सोलंकी था और वह भोगांवा गांव का रहने वाला था। वह अपने पिता वीरेंद्र सिंह सोलंकी के साथ ओंकारेश्वर दर्शन और नर्मदा स्नान के लिए आया था।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि देवांश स्नान करते करते अचानक गहरे पानी में चला गया। घाट पर सुरक्षा के लिए न तो कोई चेतावनी बोर्ड था और न ही कोई रस्सी या बैरिकेड्स लगे थे। इसलिए देवांश पानी की गहराई में चला गया और डूब गया। लोगों ने उसे बचाने की कोशिश की, शोर मचाया, लेकिन तब तक वह पानी में गायब हो चुका था। सूचना मिलते ही स्थानीय गोताखोर मौके पर पहुंचे और काफी प्रयासों के बाद देवांश का शव बाहर निकाला गया। यह हादसा घाट पर सुरक्षा व्यवस्था की कमी की ओर भी इशारा करता है।
देवांश था होनहार और मेहनती छात्र
देवांश सोलंकी 11वीं कक्षा में पढ़ता था और पढ़ाई में बहुत अच्छा था। उसके परिवार वालों ने बताया कि वह बहुत शांत, मिलनसार और मेहनती लड़का था। गांव में हर कोई उसे पसंद करता था। उसकी अचानक मौत से पूरे गांव में दुख का माहौल है। देवांश की मां का रो रोकर बुरा हाल है। उन्होंने बेसुध होकर कहा, "नर्मदा मैया के दर्शन कराने लाए थे... लेकिन मेरा लाल ही चला गया।" परिवार गहरे सदमे में है और किसी को विश्वास नहीं हो रहा कि देवांश अब नहीं रहा।
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हर साल होती हैं ऐसी घटनाएं, फिर भी कोई सबक नहीं
ओंकारेश्वर में नर्मदा नदी के घाटों पर हर साल कई लोग डूब जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा के इंतजाम अब तक नहीं किए गए हैं। न तो घाटों पर चेतावनी बोर्ड लगे हैं, न ही लाइफ जैकेट्स दी जाती हैं, और न ही प्रशिक्षित गोताखोरों की स्थायी व्यवस्था है। हर हादसे के बाद प्रशासन कुछ दिन एक्टिव रहता है, लेकिन फिर सब कुछ भुला दिया जाता है। ऐसी लापरवाही से हर साल कई मासूम जानें चली जाती हैं।
प्रशासन की चुप्पी बनी चिंता का कारण
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और देवांश का शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया गया। लेकिन प्रशासन की तरफ से अब तक कोई ठोस बयान या भरोसा नहीं आया है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि घाटों पर स्थायी सुरक्षा गार्ड, चेतावनी वाले बोर्ड, सीसीटीवी कैमरे, लाइफ जैकेट्स और गोताखोरों की व्यवस्था की जाए ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
पिता का दर्द और नाराज़गी
देवांश के पिता वीरेंद्र सिंह का दर्द छलक पड़ा। उन्होंने कहा, "हर साल लोग डूबते हैं, लेकिन घाटों पर कोई सुरक्षा नहीं होती। आज मेरा बेटा डूबा है, कल किसी और का डूबेगा। पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। लोग श्रद्धा से नर्मदा स्नान करने आते हैं, लेकिन जब कोई हादसा होता है तो परिवार को बहुत दुख और परेशानी झेलनी पड़ती है। प्रशासन को चाहिए कि अब ऐसा इंतजाम करे जिससे किसी और पिता का बेटा न डूबे।
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प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि देवांश स्नान करते करते अचानक गहरे पानी में चला गया। घाट पर सुरक्षा के लिए न तो कोई चेतावनी बोर्ड था और न ही कोई रस्सी या बैरिकेड्स लगे थे। इसलिए देवांश पानी की गहराई में चला गया और डूब गया। लोगों ने उसे बचाने की कोशिश की, शोर मचाया, लेकिन तब तक वह पानी में गायब हो चुका था। सूचना मिलते ही स्थानीय गोताखोर मौके पर पहुंचे और काफी प्रयासों के बाद देवांश का शव बाहर निकाला गया। यह हादसा घाट पर सुरक्षा व्यवस्था की कमी की ओर भी इशारा करता है।
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देवांश था होनहार और मेहनती छात्र
देवांश सोलंकी 11वीं कक्षा में पढ़ता था और पढ़ाई में बहुत अच्छा था। उसके परिवार वालों ने बताया कि वह बहुत शांत, मिलनसार और मेहनती लड़का था। गांव में हर कोई उसे पसंद करता था। उसकी अचानक मौत से पूरे गांव में दुख का माहौल है। देवांश की मां का रो रोकर बुरा हाल है। उन्होंने बेसुध होकर कहा, "नर्मदा मैया के दर्शन कराने लाए थे... लेकिन मेरा लाल ही चला गया।" परिवार गहरे सदमे में है और किसी को विश्वास नहीं हो रहा कि देवांश अब नहीं रहा।
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हर साल होती हैं ऐसी घटनाएं, फिर भी कोई सबक नहीं
ओंकारेश्वर में नर्मदा नदी के घाटों पर हर साल कई लोग डूब जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा के इंतजाम अब तक नहीं किए गए हैं। न तो घाटों पर चेतावनी बोर्ड लगे हैं, न ही लाइफ जैकेट्स दी जाती हैं, और न ही प्रशिक्षित गोताखोरों की स्थायी व्यवस्था है। हर हादसे के बाद प्रशासन कुछ दिन एक्टिव रहता है, लेकिन फिर सब कुछ भुला दिया जाता है। ऐसी लापरवाही से हर साल कई मासूम जानें चली जाती हैं।
प्रशासन की चुप्पी बनी चिंता का कारण
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और देवांश का शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया गया। लेकिन प्रशासन की तरफ से अब तक कोई ठोस बयान या भरोसा नहीं आया है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि घाटों पर स्थायी सुरक्षा गार्ड, चेतावनी वाले बोर्ड, सीसीटीवी कैमरे, लाइफ जैकेट्स और गोताखोरों की व्यवस्था की जाए ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
पिता का दर्द और नाराज़गी
देवांश के पिता वीरेंद्र सिंह का दर्द छलक पड़ा। उन्होंने कहा, "हर साल लोग डूबते हैं, लेकिन घाटों पर कोई सुरक्षा नहीं होती। आज मेरा बेटा डूबा है, कल किसी और का डूबेगा। पहले भी कई हादसे हो चुके हैं। लोग श्रद्धा से नर्मदा स्नान करने आते हैं, लेकिन जब कोई हादसा होता है तो परिवार को बहुत दुख और परेशानी झेलनी पड़ती है। प्रशासन को चाहिए कि अब ऐसा इंतजाम करे जिससे किसी और पिता का बेटा न डूबे।
