MP Election 2023: निमाड़ की राजनीति का कैसा रहेगा गणित, जानिए किसने बेटे के लिए कुर्बान किया अपना टिकट
मध्यप्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल जारी है। भारतीय जनता पार्टी ने अब तक प्रदेश में अपनी चार सूचियां जारी कर दी हैं। वहीं, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भी रविवार को ही 144 नामों की अपनी पहली सूची जारी की है।
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कांग्रेस की सूची में 69 सीटों पर पार्टी ने अपने पूर्व के विधायकों पर ही भरोसा दिखाया है, तो वहीं पिछले चुनाव में कांग्रेस से बागी होकर चुनाव लड़ने वाले निर्दलीय उम्मीदवारों को भी कुछ जगहों पर टिकट देकर उम्मीदवार बनाया है। हालांकि, निमाड़ क्षेत्र में ज्यादा उलटफेर न करते हुए कांग्रेस ने अपने पूर्व विधायकों के साथ ही कांग्रेस के बागी उम्मीदवारों पर ही दांव खेला है, तो वहीं मांधाता विधानसभा सीट पर दिग्विजय सिंह के करीबी माने जाने वाले राजनारायण सिंह ने इस बार अपना टिकट बेटे को दिलवाकर उन्हें कांग्रेस से उम्मीदवार बनवा दिया।
रविवार को जारी हुई कांग्रेस की सूची में खंडवा जिले की चार में से केवल दो विधानसभाओं पर पार्टी ने उम्मीदवार तय किए हैं। जिले की मांधाता विधानसभा सीट से राजनारायण सिंह के पुत्र उत्तम पाल सिंह पुरनी और पंधाना विधानसभा सीट से रूपाली बारे को पार्टी ने उम्मीदवार बनाया है। लेकिन खंडवा और हरसूद विधानसभा सीटों के दावेदारों को फिलहाल पार्टी ने होल्ड किया हुआ है। दिलचस्प बात यह है कि मांधाता विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाए गए उत्तम पाल सिंह पुरनी के पिता और पूर्व विधायक राज नारायण सिंह भी लगातार कांग्रेस से टिकट की मांग कर रहे थे। लेकिन ऐन वक्त पर उनकी जगह उनके बेटे को कांग्रेस ने उम्मीदवार बना दिया, जिसको देखकर कहा जा रहा है कि राज नारायण सिंह ने अपने बेटे के लिए मांधाता सीट से अपनी दावेदारी छोड़कर बेटे का नाम आगे कर दिया।
बता दें कि पूर्व विधायक राज नारायण सिंह पुरनी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के भी बेहद करीबी माने जाते हैं तो वहीं उत्तम पाल सिंह एनएसयूआई के जरिए अपनी राजनीति करते रहे हैं। पिता की तरह ही वह भी दिग्विजय सिंह और कमलनाथ के बड़े कृपा पात्र माने जाते हैं। पिछली बार उपचुनाव में भी कमलनाथ ने उत्तम पाल सिंह पुरनी को मांधाता से टिकट देकर पार्टी का उम्मीदवार बनाया था। लेकिन उस चुनाव में उत्तम पाल को हार का सामना करना पड़ा था। लेकिन इस बार फिर से कांग्रेस ने उत्तम पाल सिंह पुरनी पर भरोसा जताया है। अब देखना होगा कि इस बार कांग्रेस का यह भरोसा कितना मजबूत साबित होता है।
छाया मोरे ने बीजेपी का दामन थामा
खंडवा के पंधाना विधानसभा क्षेत्र से पिछली बार कांग्रेस की उम्मीदवार रहीं छाया मोरे ने दल-बदल करते हुए इस बार भाजपा का दामन थाम लिया। उन्होंने हाल ही में बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर सुर्खियां बटोरीं थी। उनके भाजपा में जाते ही पिछली बार के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से बागी होकर निर्दलीय उम्मीदवार रही रूपाली बारे का टिकट पक्का माना जा रहा था। कांग्रेस पार्टी ने रूपाली बारे को इस बार पंधाना से पार्टी का प्रत्याशी घोषित किया है।
बता दें कि, रूपाली बारे के पिता भी कांग्रेस के समर्पित कार्यकर्ता रहते हुए पार्टी के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। हालांकि, वे पार्टी को जीत नहीं दिला सके थे। लेकिन इस बार कांग्रेस ने अपने निष्ठावान कार्यकर्ता की बेटी को टिकट देकर उम्मीदवार बनाया है। हालांकि, पिछली बार रूपाली को टिकट नहीं मिलने से वे बागी होकर चुनावी मैदान में उतर गई थी, जिसके चलते उन्हें कुछ समय के लिए पार्टी से निष्कासन तक झेलना पड़ा था।
इधर, कांग्रेस आलाकमान के द्वारा खरगोन जिले की सभी छह विधानसभाओं के टिकट घोषित कर दिये गए हैं। इसमें भीकनगांव से झूमा सोलंकी, बड़वाह से नरेंद्र पटेल, महेश्वर से विजय लक्ष्मी साधौ, कसरावद से सचिन यादव, खरगोन से रवि जोशी के साथ ही भगवानपुरा से केदार डाबर को कांग्रेस पार्टी ने अपना प्रत्याशी बनाया है। इस बार खरगोन की बड़वाह विधानसभा से नरेंद्र पटेल को टिकट दिया गया है। इस सीट से कांग्रेस के सचिन बिरला के बीजेपी में शामिल होने के बाद यह टिकट दिया गया है। वहीं, भगवानपुरा विधानसभा की बात करें तो साल 2018 में कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़े केदार डावर को कांग्रेस द्वारा टिकट दिया गया है।
हालांकि, खरगोन में बीजेपी अपने तीन प्रत्याशियों को पहले ही मैदान में उतार चुकी है, जिसमें महेश्वर विधानसभा से राजकुमार मेव, कसरावद से आत्माराम पटेल और भीकनगांव से नंदा ब्राह्मणे को मैदान में उतारा गया है। बता दें कि, साल 2018 की विधानसभा चुनाव में जिले की छह की छह विधानसभा सीटों पर बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा था।
वहीं, बड़वानी जिले की बात करें तो बड़वानी में भी दो विधानसभाओं में कांग्रेस पार्टी ने टिकट दिया है, जिसमें से राजपुर विधानसभा सीट से विधायक और कमलनाथ सरकार में गृहमंत्री रहे बाला बच्चन को कांग्रेस ने टिकट देकर एक बार फिर से चुनाव मैदान में उतारा है। तो वहीं बड़वानी विधानसभा सीट से राजेन्द्र मंडलोई को टिकट देकर अपना उम्मीदवार बनाया है।
बता दें कि राजेंद्र मंडलोई पिछली बार कांग्रेस से बागी होकर निर्दलीय मैदान में उतर गए थे, जिसके चलते कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था। लेकिन इस बार कांग्रेस ने मंडलोई पर फिर विश्वास जताया है। राजेंद्र मंडलोई साल 2008 में भी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े थे। हालांकि, उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। वहीं, बड़वानी की दो अन्य सीटों पर कांग्रेस ने अभी तक भी नाम घोषित नहीं किए हैं।
माना जा रहा था कि निमाड़ क्षेत्र के बुरहानपुर में कांग्रेस पार्टी से सबसे पहले टिकट बुरहानपुर से निर्दलीय विधायक और कांग्रेस से बागी होकर चुनाव लड़े सुरेंद्र सिंह शेरा का होगा। क्योंकि भारत जोड़ो यात्रा की शुरुआत मध्यप्रदेश में बुरहानपुर जिले से हुई थी। बुरहानपुर महाराष्ट्र की सीमा से लगा हुआ मध्यप्रदेश का जिला है। यहां से राहुल गांधी ने मध्यप्रदेश में अपनी यात्रा की शुरुआत की थी। उस समय बुरहानपुर से निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह शेरा ने राहुल गांधी का जोरदार स्वागत किया था।
वहीं, सुरेंद्र सिंह पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के करीबी भी रहे हैं। उन्होंने कमलनाथ सरकार को अपना समर्थन दिया था। हालांकि, कांग्रेस की पहली सूची में सुरेंद्र सिंह शेरा का नाम शामिल नहीं है। वहीं, बुरहानपुर जिले की एक और विधानसभा सीट नेपानगर से गेंदु बाई चौहान का नाम भी चर्चाओं में है। हालांकि, गेंदु बाई हाल ही में भाजपा छोड़ कांग्रेस में शामिल हुई है। देखना है कि अब कांग्रेस की आने वाली सूची में बाकी जगहों पर किन नामों की घोषणा होती है।
