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Khandwa Lok Sabha Seat: निमाड़ में कैसे होगा शह-मात का खेल, क्या BJP को टक्कर दे पाएंगे कांग्रेस के नरेंद्र
Sat, 06 Apr 2024 05:55 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, खंडवा
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, खंडवा
Published by: अरविंद कुमार
Updated Sat, 06 Apr 2024 05:55 PM IST
सार
Khandwa Lok Sabha Seat: खंडवा लोकसभा सीट में गुर्जर समाज के वोटरों की बहुलता है। ऐसे में सामाजिक आधार पर अगर वोटों का बंटवारा होता है, तब तो इस चुनाव में कांग्रेस को फायदा होता दिख रहा है।
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नरेंद्र पटेल, प्रत्याशी खंडवा लोकसभा सीट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
खंडवा लोकसभा सीट से कांग्रेस ने नरेंद्र पटेल को टिकट दिया है। नरेंद्र पटेल हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में भी खरगोन की बड़वाह विधानसभा सीट से उम्मीदवार रहे थे। हालांकि, उन्हें उस चुनाव में कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए सचिन यादव के सामने हार का सामना करना पड़ा था।
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वहीं, खंडवा लोकसभा सीट की बात करें तो खंडवा लोकसभा सीट में गुर्जर समाज के वोटरों की बहुलता है। ऐसे में सामाजिक आधार पर अगर वोटों का बंटवारा होता है, तब तो इस चुनाव में कांग्रेस को फायदा होता दिख रहा है। लेकिन बीजेपी के प्रत्याशी ज्ञानेश्वर पाटिल भी महाराष्ट्रीयन गुर्जर हैं। ऐसे में कहा जा सकता है कि निमाड़ की खंडवा लोकसभा सीट पर गुर्जर बनाम गुर्जर का मुकाबला होना है। ऐसे में देखना यह होगा कि इस मुकाबले में जीत किसके हिस्से में आती है। हालांकि, इस सीट पर राजपूत भी अच्छा खासा अपना दखल रखते हैं। वहीं, आदिवासी वोटों का भी यहां बड़ा प्रभाव रहता है।
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मुस्लिम मतदाता भी काफी तादाद में
खंडवा लोकसभा सीट में मुस्लिम मतदाता भी काफी तादाद में हैं। खंडवा लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाले बुरहानपुर और खंडवा जिले में मुस्लिम मतदाताओं की तादाद अधिक है। खासकर बुरहानपुर में मुस्लिम मतदाता बहुतायात में हैं। ऐसे में बीजेपी मुस्लिम मतदाताओं को भी साधने की कोशिश में लगी हुई है। पिछली बार के नतीजों पर नजर डालें तो खंडवा लोकसभा सीट पर कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है। हालांकि, इस बार मोदी मैजिक का असर दिख सकता है। वहीं, कांग्रेस का देरी से टिकट फाइनल करना भी कांग्रेस के लिए कहीं न कहीं नुकसान की और इशारा करता है। हालांकि, यह सब अभी भविष्य के गर्भ की बातें हैं। फिलहाल, कांग्रेस और बीजेपी के बीच अच्छा मुकाबला होने की उम्मीद है।
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खंडवा लोकसभा क्षेत्र के दोनों ही मुख्य दलों के उम्मीदवार राजनीतिक परिवेश से आते हैं। ज्ञानेश्वर पाटिल पूर्व खंडवा जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुके हैं। वे समय-समय पर पार्टी की सक्रिय गतिविधियों में शामिल भी रहे हैं। वहीं, कांग्रेस के नरेंद्र पटेल का परिवार भी लंबे समय से राजनीति में सक्रिय है। नरेंद्र पटेल के चाचा ताराचंद पटेल बड़वाह से विधायक और खरगोन लोकसभा सीट से सांसद रह चुके हैं।
वहीं, नरेंद्र पटेल के परिवार के अन्य लोग भी पार्षद से लेकर जिला पंचायत तक के सदस्य रहे हैं। नरेंद्र पटेल खुद 2023 विधानसभा चुनाव में विधायक पद का चुनाव भी लड़ चुके हैं। हालांकि, उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन इस बार फिर कांग्रेस ने उन पर भरोसा जताया है। देखना यह होगा कि इस बार चुनाव जीतते हैं या उन्हें फिर एक बार हार का सामना देखना पड़ेगा।
