फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   kamalnath is fighting to save her seat

कमलनाथ लड़ रहे गढ़ बचाने की लड़ाई

Tue, 08 Apr 2014 12:59 PM IST
Updated Tue, 08 Apr 2014 12:59 PM IST
विज्ञापन
kamalnath is fighting to save her seat

जब मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में 10 अप्रैल को लोकसभा सीट का मतदान हो रहा होगा तब कांग्रेस के दिग्गज नेता कमलनाथ यहां से अपना दसवां चुनाव लड़ रहे होंगे।

विज्ञापन


एक को छोड़कर सभी चुनावों में अपराजेय रहे कमलनाथ शायद इसीलिए हर भाषण में बता रहे हैं कि 34 साल पहले वह छिंदवाड़ा आए थे, तब यहां क्या था और अब क्या है।

छिंदवाड़ा ने भी कमलनाथ को आठ बार लोकसभा भेजा। एक बार उनकी पत्नी अलकानाथ को 1996 में लोकसभा भेजा जब कमलनाथ हवाला डायरी के पन्नों के कारण चुनाव नहीं लड़ सके थे।

विज्ञापन

जाहिर है कि उन्होंने हार मान ली है

kamalnath is fighting to save her seat

कमलनाथ अपनी अपराजेय किस्म की छवि के बाद भी सरकारी मशीनरी के प्रति संशंकित हैं। चुनाव आयोग ने उनकी शिकायत पर कलेक्टर और दूसरे कई अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं।

भाजपा इसे कमलनाथ का डर बता रही है। भाजपा नेताओं का कहना है कि जिस तरह से कमलनाथ प्रशासनिक मशीनरी को दोष दे रहे हैं, जाहिर है कि उन्होंने हार मान ली है।
 
विधानसभा चुनाव में छिंदवाड़ा संसदीय सीट में आने वाली सात विधानसभाओं में से चार में भाजपा ने जीत हासिल की है। छिंदवाड़ा विधानसभा सीट पर भी उनके खास समर्थक को जिताने में कमलनाथ सफल नहीं रहे थे। भाजपा के आत्मविश्वास का एक कारण यह भी है। चार विधानसभाओं में भाजपा की उपस्थिति कमलनाथ की चिंताएं बढ़ा रही है।

कमलनाथ को हराना आसान नहीं

kamalnath is fighting to save her seat

अलबत्ता हर कोई जानता है कि छिंदवाड़ा में कमलनाथ को हराना आसान नहीं। कमलनाथ 1980 में छिंदवाड़ा इंदिरा गांधी की उंगली पकड़कर आए थे। और 67 वर्ष के कमलनाथ ने अपनी उम्र के 34 साल छिंदवाड़ा के बारे में सोचते हुए बिताए हैं।

जहां 1980 में छिंदवाड़ा उनके लिए एकदम नई जगह था, अब उनके व्यक्तित्व का अभिन्न हिस्सा है। उस समय कोलकाता के उद्योगपति के तौर पर उनकी एंट्री किसी बालीवुड फिल्म जैसी थी। वहीं उनके प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के चौधरी चंद्रभान सिंह किसान हैं, जो 23 साल पहले कमलनाथ के मुकाबले चुनाव लड़ चुके हैं।

इन 34 वर्षों के बाद छिंदवाड़ा में जहां कमलनाथ के एकाधिकार के विरुद्ध स्वर भी हैं, वहीं छिंदवाड़ा की शक्ल बदल देने का श्रेय देने वाले भी हैं। कमलनाथ खुद गिनाते हैं, ‘छिंदवाड़ा में एक जमाने में हल से खेती होती थी। ट्रेक्टर तक नहीं थे। जब मैंने सोयाबीन की खेती यहां शुरू करवाई उसके बाद किसानों के हालात बदले और अब ट्रेक्टर ही ट्रेक्टर हैं।’ कमलनाथ ने इस इलाके में एक सोयाबीन प्लांट की स्थापना भी तिलहन संघ से करवाई थी लेकिन वह पर्याप्त सोयाबीन नहीं मिलने के कारण बंद हो गया था।

विज्ञापन

छिंदवाड़ा अपने आप में एक द्वीप भी है और..

kamalnath is fighting to save her seat

कमलनाथ के सांसद रहते छिंदवाड़ा से गुजरती चौड़ी और शानदार सड़कें इस छोटे से आदिवासी कस्बे को जहां दिल्ली की तरफ ले जाती हैं, वहीं पांढुर्णा और रेलवे मार्ग इसे नागपुर व महाराष्ट्र से जोड़ता है।

छिंदवाड़ा अपने आप में एक द्वीप भी है और मध्य प्रदेश व महाराष्ट्र का बफर-स्टेट भी। केंद्र में जब भी कांग्रेस की सरकारें रहीं, कमलनाथ के पास अच्छे मंत्रालय रहे। उसका फायदा छिंदवाड़ा को मिलता रहा है। लेकिन कमलनाथ के लिए आदिवासियों का समर्थन सबसे महत्वपूर्ण रहा है। छिंदवाड़ा सीट में आने वाली विधानसभाओं में से तीन जुन्नारदेव, अमरवाड़ा और पांढुर्णा जनजाति सीटें हैं। परासिया अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित है।

दोध्रुवीय संघर्षः
मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच ही है। 2009 में कमलनाथ को 49 फीसदी से भी ज्यादा मत मिले थे। करीब 11.50 लाख मतदाताओं की इस सीट पर चंद्रभानसिंह वर्तमान विधायक हैं। चंद्रभान सिंह पांच बार विधानसभा चुनाव लड़ने के बाद तीन बार जीत हासिल कर चुके हैं। वे 2003 में उमा भारती के मंत्रिमंडल में मंत्री थे।

कमलनाथ पक्ष मेः

kamalnath is fighting to save her seat
1. नौ लोकसभा में से आठ चुनाव जीते, अपराजेय किस्म की छवि
2. विकास के अनेक काम किए, सड़कें, रेल, शिक्षा संस्थान आदि
3. संसदीय क्षेत्र में सक्रियता और आदिवासियों का समर्थन

कमलनाथ विरुद्ध में:

kamalnath is fighting to save her seat
1.लगातार चुनाव जीतने से एंटी-इनकंबेंसी
2.केंद्र सरकार और कांग्रेस के खिलाफ एंटी-इनकंविरुद्धः
1.लगातार चुनाव जीतने से एंटी-इनकंबेंसी
2.केंद्र सरकार और कांग्रेस के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी
3.छिंदवाड़ा लोकसभा की सात विधानसभा सीटों में से चार भाजपा ने जीती
4.छिंदवाड़ा विधानसभा पर भी कमलनाथ के खास समर्थक हारे
5.विरोधी उम्मीदवार चौधरी चंद्रभानसिंह भी हाल ही में जीते विधायक बेंसी
3.छिंदवाड़ा लोकसभा की सात विधानसभा सीटों में से चार भाजपा ने जीती
4.छिंदवाड़ा विधानसभा पर भी कमलनाथ के खास समर्थक हारे
5.विरोधी उम्मीदवार चौधरी चंद्रभानसिंह भी हाल ही में जीते विधायक
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed