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झारखंड: सरकारी जमीन की अवैध रजिस्ट्री मामले में शिवशंकर शर्मा को सुप्रीम कोर्ट से झटका, एसएलपी खारिज

Fri, 30 Oct 2026 06:31 AM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर Published by: शबाहत हुसैन Updated Fri, 30 Oct 2026 06:31 AM IST
सार

सरकारी और गैरमजरूआ जमीन की कथित अवैध रजिस्ट्री के मामले में शिवशंकर शर्मा को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने झारखंड हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए एसएलपी खारिज कर 25 हजार रुपये अतिरिक्त जुर्माना लगाया।

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Jharkhand: Supreme Court deals a blow to Shivshankar Sharma in case involving illegal registration of governme
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सरकारी और गैरमजरूआ जमीन की कथित अवैध रजिस्ट्री के मामले में याचिकाकर्ता शिवशंकर शर्मा को उच्चतम न्यायालय से बड़ा झटका लगा है। उच्चतम न्यायालय ने झारखंड उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली उनकी विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) को खारिज कर दिया है। शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता पर 25 हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया है। उच्चतम न्यायालय ने जुर्माने की यह राशि चार सप्ताह के भीतर सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन में अनिवार्य रूप से जमा कराने का आदेश दिया है।

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उच्चतम न्यायालय ने कहा-दखल का कोई आधार नहीं
मामले की सुनवाई जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि झारखंड उच्च न्यायालय ने जनहित याचिका खारिज करने और याचिकाकर्ता पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाने का फैसला बिल्कुल उचित लिया था। उच्च न्यायालय के उस आदेश और फैसले में किसी भी तरह से हस्तक्षेप करने का कोई ठोस आधार नहीं है। इसके बाद उच्चतम न्यायालय ने याचिकाकर्ता की एसएलपी खारिज कर दी। हालांकि, शीर्ष अदालत ने विशेष अनुमति याचिका दायर करने में हुई देरी को माफ करते हुए इस मामले की सुनवाई की थी।

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अवैध रजिस्ट्री के आरोप
यह पूरा मामला झारखंड उच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिका (डब्ल्यूपीपीआईएल संख्या 689/2021) से संबंधित है। याचिकाकर्ता शिवशंकर शर्मा ने अदालत में आरोप लगाया था कि राज्य में ऐसी सरकारी और गैरमजरूआ जमीन की बिक्री की जा रही है जिसकी खरीद-बिक्री की कानूनन अनुमति नहीं है। याचिका में यह भी कहा गया था कि ऐसी प्रतिबंधित जमीनों की अवैध रजिस्ट्री के साथ-साथ दाखिल-खारिज भी धड़ल्ले से किया जा रहा है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि इस पूरे तंत्र में अंचल अधिकारियों (सीओ) और रजिस्ट्रार समेत कई सरकारी अधिकारियों की प्रत्यक्ष मिलीभगत शामिल है।

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सबूतों का अभाव और जुर्माना
याचिकाकर्ता ने उच्च न्यायालय से इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया था। हालांकि, तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने 9 मई 2025 को यह जनहित याचिका खारिज कर दी थी और याचिकाकर्ता पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि याचिकाकर्ता ने अपने आरोपों को साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत या तथ्य अदालत के समक्ष पेश नहीं किए हैं। अब उच्चतम न्यायालय से भी याचिका खारिज होने और 25 हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना लगने के बाद उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं।

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