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आलीराजपुर: जिस जमीन के मालिक नहीं, उसके दस्तावेज पर ई-सिग्नेचर क्यों? पटवारियों ने सरकार को दी चेतावनी

Tue, 15 Sep 2026 03:22 PM IST
झाबुआ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आलीराजपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आलीराजपुर Published by: झाबुआ ब्यूरो Updated Tue, 15 Sep 2026 03:22 PM IST
सार

आलीराजपुर पटवारी संघ ने स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026 में निष्पादक की जिम्मेदारी का विरोध किया है। संघ ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देकर 15 सितंबर से कार्य से विरत रहने और दबाव बनाने पर कलमबंद आंदोलन की चेतावनी दी।

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Patwari angry at being made executor in ownership scheme, warns of penmanship from September 15
कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर पटवारी संघ ने दिया ज्ञापन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सरकार की योजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए जिस कलम और ई-सिग्नेचर पर भरोसा किया जा रहा है, उसी कलम को लेकर पटवारी अब पीछे हटने की तैयारी में हैं। स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026 में निष्पादक की जिम्मेदारी दिए जाने के विरोध में आलीराजपुर पटवारी संघ ने मोर्चा खोल दिया है। संघ ने कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर 15 सितंबर से इस दायित्व से विरत रहने का ऐलान किया है। पटवारियों का सबसे बड़ा सवाल है कि जिस जमीन के अधिकार का पटवारी न तो मालिक है और न ही हस्तांतरणकर्ता, उस दस्तावेज का कानूनी निष्पादक उसे क्यों बनाया जा रहा है?

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कलम चलेगी तो जिम्मेदारी भी आएगी

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संघ के अनुसार, पंजीयन दस्तावेज पर पटवारी का नाम, पद और ई-सिग्नेचर निष्पादक के रूप में दर्ज होगा। भविष्य में सीमा, क्षेत्रफल, वारिस, हिस्सेदारी या कब्जे को लेकर विवाद खड़ा हुआ तो इसकी जिम्मेदारी पटवारी पर आ सकती है। इसी को लेकर संघ इस व्यवस्था का विरोध कर रहा है। संघ का तर्क है कि आबादी क्षेत्र की भूमि राजस्व कृषि भूमि से अलग है और इसका सर्वे पंचायत राज विभाग द्वारा कराया गया है। ऐसे में पटवारी को निष्पादन की जिम्मेदारी देना कार्य-विभाजन पर भी सवाल खड़ा करता है।
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काम बढ़ते गए, मांगें फाइलों में अटकीं
पटवारी संघ ने फार्मर आईडी और जिओ टैग गिरदावरी को लेकर भी नाराजगी जताई है। संघ का कहना है कि पटवारियों ने फार्मर आईडी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन अब शेष कार्य को लेकर उन पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है। जिओ टैग गिरदावरी को लेकर भी संघ ने व्यवहारिक समस्याएं बताई हैं। इसके अलावा वेतन विसंगति, ग्रेड-पे और कैडर रिव्यू जैसी पुरानी मांगें भी आंदोलन की पृष्ठभूमि में हैं। संघ का कहना है कि पटवारियों की जिम्मेदारियां लगातार बढ़ाई जा रही हैं, लेकिन सेवा संबंधी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा।

15 सितंबर से क्या होगा?
पटवारी संघ ने साफ कर दिया है कि 15 सितंबर से स्वामित्व योजना में निष्पादक के कार्य से प्रदेश का पटवारी संवर्ग विरत रहेगा। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि दबाव बनाया गया तो कलमबंद आंदोलन किया जाएगा। अब देखना होगा कि सरकार पटवारियों की आपत्तियों पर क्या फैसला लेती है और इस टकराव को कैसे
टालती है।

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