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Jabalpur News: फ्लाइट कनेक्टिविटी पर MP हाईकोर्ट सख्त, भोपाल-इंदौर की उड़ानों को जबलपुर से जोड़ने का आदेश
Tue, 14 Oct 2025 05:09 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबल
Published by: हिमांशु प्रियदर्शी
Updated Tue, 14 Oct 2025 05:09 PM IST
सार
Jabalpur News: हाईकोर्ट ने जबलपुर की सीमित एयर कनेक्टिविटी पर सख्त रुख अपनाते हुए भोपाल और इंदौर की फ्लाइट्स को जबलपुर से जोड़ने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि प्रशासनिक नहीं, न्यायिक दृष्टि से जबलपुर को उचित महत्व दिया जाना चाहिए।
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने जबलपुर की एयर कनेक्टिविटी को लेकर गंभीर नाराजगी जताई है। मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि भोपाल को मुख्य प्रशासनिक पीठ तो जबलपुर को मुख्य न्यायिक पीठ बनाया गया है, फिर भी जबलपुर के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार किया जा रहा है। कोर्ट ने आदेश दिया कि भोपाल और इंदौर से संचालित फ्लाइट्स को जबलपुर से जोड़ा जाए ताकि यहां से भी बेहतर हवाई संपर्क स्थापित हो सके।
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जबलपुर की उपेक्षा पर कोर्ट ने जताई नाराजगी
याचिका नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच और विधि छात्र पार्थ श्रीवास्तव द्वारा दायर की गई थी, जिसमें जबलपुर से उड़ानों की संख्या बढ़ाने की मांग की गई। याचिका में कहा गया कि जबलपुर से फिलहाल केवल 9 उड़ानें संचालित हैं, जबकि भोपाल से प्रतिदिन 40, इंदौर से 80 और ग्वालियर से करीब 25 फ्लाइट्स उड़ान भरती हैं। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि पहले जबलपुर से मुंबई, पुणे, कोलकाता और बेंगलुरू जैसी जगहों के लिए उड़ानें संचालित होती थीं, लेकिन अब वे बंद हो चुकी हैं, जबकि हवाई अड्डे के उन्नयन पर करीब 500 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
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एयरलाइंस और सरकार को कोर्ट ने दिए निर्देश
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने इंडिगो एयरलाइंस की मूल कंपनी इंटरग्लोब सहित अन्य कंपनियों से पूछा था कि फ्लाइट बढ़ाने के लिए उन्हें केंद्र या राज्य सरकार से क्या रियायतें चाहिए। सुनवाई के दौरान विमानन कंपनी के वकील सिद्धार्थ शर्मा ने बताया कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा आरएफपी जारी की गई है और नवंबर से दिल्ली के लिए नई फ्लाइट शुरू की जाएगी।
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‘टूरिज्म नहीं, प्रोफेशनल जरूरतों के हिसाब से तय हों उड़ानें’
वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य सांघी ने दलील दी कि जबलपुर हवाई अड्डे के विस्तार और नाइट लैंडिंग की सुविधा का वादा 2011 में किया गया था, जो चार साल पहले पूरा हुआ। अब यह हवाई अड्डा ब्राउनफील्ड श्रेणी में आ चुका है, फिर भी यहां से केवल पांच फ्लाइट्स संचालित हैं, जबकि रीवा जैसे छोटे शहर से अधिक उड़ानें हैं। कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि एयरलाइंस केवल पर्यटन की दृष्टि से फ्लाइट का समय तय कर रही हैं, जबकि पेशेवरों और आम नागरिकों की सुविधा की अनदेखी की जा रही है।
अगली सुनवाई 6 नवंबर को
युगलपीठ ने असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई से पहले संबंधित विभागीय अधिकारियों और याचिकाकर्ताओं के वकीलों के साथ बैठक कर समाधान निकाला जाए और रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी जाए। मामले की अगली सुनवाई 6 नवंबर को निर्धारित की गई है।
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