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MP High Court: बर्खास्त पुलिसकर्मी को बहाल करने के आदेश, रिकॉर्ड गुम होने के मामले में हाईकोर्ट ने दिया फैसला

Tue, 17 Oct 2023 09:35 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: अरविंद कुमार Updated Tue, 17 Oct 2023 09:35 PM IST
सार

MP High Court: सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि जांच उपरांत ही अधिकारियों ने आवेदक को बर्खास्त करने का निर्णय लिया था। लेकिन शासन की ओर से बताया गया कि साल 2000 में आवेदक को बर्खास्त किया गया था और अनुशासनिक रिकार्ड गुम गए हैं।

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MP High Court Order to reinstate dismissed policeman
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर - फोटो : Social Media

विस्तार

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने दो दशक पूर्व बर्खास्त किए गए पुलिसकर्मी को बहाल किए जाने के आदेश दिए हैं। जस्टिस एमएस भट्टी की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि शासन ने याचिकाकर्ता पुलिस कर्मी की अनुशासनिक कार्रवाई का रिकॉर्ड गुमा दिया है। एकलपीठ ने कहा कि ऐसे में चार्जशीट और जांच रिपोर्ट का कोई औचित्य नहीं है।

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एकलपीठ ने आवेदक को 90 दिनों के भीतर बहाल किए जाने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, आवेदक बैकवेज पाने का हकदार नहीं होगा। यह मामला दसवीं बटालियन सागर में आरक्षक के पद पर पदस्थ रहे एससी पांडे की ओर से दायर किया गया था। आवेदक को उसके पिता की मृत्यु उपरांत नौकरी मिली थी। आवेदक की ओर से कहा गया कि उसने साल 1991 में माया देवी से विवाह किया था। विवाह होने पर माया देवी ने वैवाहिक विवाद दायर किया था।
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इसी दौरान पुष्पा नामक महिला ने खुद को याचिकाकर्ता की पत्नी होने का दावा किया और उसके खिलाफ दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज करा दिया।  मामले में वह दोषमुक्त हो गया, लेकिन बिना अनुमति दूसरी शारी करने के आरोप में याचिकाकर्ता को चार्जशीट जारी की गई और जांच उपरांत उसे सेवामुक्त कर दिया गया।
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सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि जांच उपरांत ही अधिकारियों ने आवेदक को बर्खास्त करने का निर्णय लिया था। लेकिन शासन की ओर से बताया गया कि साल 2000 में आवेदक को बर्खास्त किया गया था और अनुशासनिक रिकार्ड गुम गए हैं, जिसके बाद न्यायालय ने कहा कि इतने लंबे अर्से बाद बिना रिकॉर्ड के सेवा मुक्ति के फैसले का परीक्षण नहीं किया जा सकता। उसके बाद न्यायालय ने आवेदक के पक्ष में राहतकारी आदेश दिया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता उद्यन तिवारी ने पक्ष रखा।

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