फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Jabalpur News ›   MP: 96 Nursing College was not renewed, reply presented in High Court with affidavit

MP: 96 नर्सिंग कॉलेज का नहीं किया गया रिन्यूअल, शपथ-पत्र के साथ हाईकोर्ट में पेश किया गया जवाब

Thu, 18 Aug 2022 10:52 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Thu, 18 Aug 2022 10:52 PM IST
सार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में मप्र नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कौंसिल के रजिस्टार की तरफ से पेश हलफनामे में कहा गया है कि जबलपुर तथा इंदौर के क्षेत्राधिकार में आने 96 नर्सिंग कॉलेज का रिन्यूअल जारी नहीं किया गया है। 

विज्ञापन
MP: 96 Nursing College was not renewed, reply presented in High Court with affidavit
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में मप्र नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कौंसिल के रजिस्टार की तरफ से पेश हलफनामे में कहा गया है कि जबलपुर तथा इंदौर के क्षेत्राधिकार में आने 96 नर्सिंग कॉलेज का रिन्यूअल जारी नहीं किया गया है। इसके अलावा 149 नर्सिंग कॉलेजों ने नोटिस का जवाब नहीं दिया है। इसमें से 55 कॉलेजों का रिन्यूवल सोमवार तक निरस्त कर दिया जाएगा। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने निर्देश जारी किए हैं कि कितने नर्सिंग कॉलेज पर कार्रवाई करना शेष रह गया है। इस संबंध में जानकारी प्रस्तुत की जाए। याचिका पर अगली सुनवाई 23 अगस्त को निर्धारित की गई है।
विज्ञापन


बता दें कि लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि शैक्षणिक सत्र 2020-21 में प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य इलाकों में 55 नर्सिंग कॉलेज को मान्यता दी गई थी। मप्र नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कौंसिल ने निरीक्षण के बाद इन कॉलेजों की मान्यता दी थी। वास्तविकता में ये कॉलेज सिर्फ कागज में संचालित हो रहे हैं। ऐसा कोई कॉलेज नहीं है जो निर्धारित  मापदण्ड पूरा करता है। अधिकांश कॉलेज की निर्धारित स्थल में बिल्डिंग तक नहीं है। कुछ कॉलेज सिर्फ चार-पांच कमरों में संचालित हो रहे हैं। ऐसे कॉलेज में प्रयोगशाला सहित अन्य आवश्यक संरचना नहीं है। बिना छात्रावास ही कॉलेज का संचालन किया जा रहा है। नर्सिंग कॉलेज को फर्जी तरीके से मान्यता दिए जाने के आरोप में मप्र नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कौंसिल के रजिस्टार को पद से हटा दिया गया था। फर्जी नर्सिंग कॉलेज संचालित होने के संबंध में उन्होंने शिकायत की थी। शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं होने के कारण उक्त याचिका दायर की गई है। याचिका में साथ ऐसे कॉलेज की सूची तथा फोटो प्रस्तुत किए गए थे।
विज्ञापन


हाईकोर्ट के निर्देश पर प्रदेश के 453 नर्सिंग कॉलेज के मान्यता संबंधित ओरिजनल दस्तावेज पेश किए गए थे। युगलपीठ ने याचिकाकर्ता को दस्तावेज के निरीक्षण की अनुमति प्रदान की थी। निरीक्षण के बाद याचिकाकर्ता ने दस्तावेजों से 37759 पेज गायब होने की जानकारी हाईकोर्ट को दी थी। इसके अलावा 80 कॉलेज में ऐसे हैं जिसमें एक व्यक्ति उसकी समय में कई स्थानों में काम कर रहा है। दस कॉलेज में एक ही व्यक्ति एक समय में प्राचार्य है और उन कॉलेजों के बीच की दूरी सैकड़ों किलोमीटर है। टीचिंग स्टाफ  भी एक समय में पांच-पांच कॉलेज में एक ही समय में सेवा दे रहा था। सुनवाई के बाद न्यायालय ने 24 घंटे में डिजिटल डाटा उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


गत दिवस याचिका पर हुई सुनवाई के बाद युगलपीठ ने 24 घंटों में नर्सिंग कॉलेजों के संबंध में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश जारी किए थे। याचिका की सुनवाई के दौरान युगलपीठ को बताया गया कि ग्वालियर हाईकोर्ट ने निर्देश पर गठित कमेटी की रिपोर्ट के बाद उक्त क्षेत्र के 70 नर्सिंग कॉलेज के रिन्यूअल निरस्त कर दिए गए थे। जबलपुर तथा इंदौर के क्षेत्राधिकारी में आने वाले 94 नर्सिंग कॉलेज को निरीक्षण के बाद रिन्यूअल जारी नहीं किया गया है। सभी कॉलेजों को इंफ्रास्ट्रक्चर तथा संसाधन के संबंध में जानकारी पेश करने नोटिस जारी किए थे। 149 कॉलेज ने जानकारी पेश नहीं की है। जिसमें से 55 कॉलेज के रिन्यूअल निरस्त किए जा रहे हैं। सुनवाई के बाद युगलपीठ ने उक्त आदेश जारी किए। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आलोक बागरेचा ने पैरवी की। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed