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Jabalpur High Court: तकनीकी शिक्षा इंजीनियरिंग कॉलेज सेवा नियम को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

Mon, 16 May 2022 09:12 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Mon, 16 May 2022 09:12 PM IST
सार

बसंत कुमार चौरसिया तथा अन्य की तरफ से दायर की गई याचिका में तकनीकी शिक्षा इंजीनियरिंग कॉलेज (शिक्षण संवर्ग) सेवा नियम को चुनौती दी गई थी। याचिका में कहा गया था कि उक्त नियम संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है। इस नियम के तहत कर्मचारियों को पेंशन, पदोन्नति में आरक्षण नहीं मिलेगा। 

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Jabalpur High Court: Petition challenging the technical education engineering college service rule dismissed
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

तकनीकी शिक्षा इंजीनियरिंग कॉलेज (शिक्षण संवर्ग) सेवा नियम को चुनौती देने वाली याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस पी के कौरव की युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि याचिकाकर्ता के पदनाम, वेतनमान और पेंशन संबंधी लाभ प्रभावित नहीं हो रहे हैं। सरकार ने बेहतर प्रशासन के लिए अपने अधिकारों को प्रयोग करते हुए नियम बनाए हैं।
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गौरतलब है कि बसंत कुमार चौरसिया तथा अन्य की तरफ से दायर की गई याचिका में तकनीकी शिक्षा इंजीनियरिंग कॉलेज (शिक्षण संवर्ग) सेवा नियम को चुनौती दी गई थी। इसमें कहा गया था कि उनका चयन साल 1990 से 1993 के बीच पीएससी के माध्यस से हुआ था। सरकार द्वारा इंजीनियरिंग तथा पॉलीटेक्निक कॉलेजों को स्वशासकीय घोषित कर दिया था। इसके बाद तकनीकी शिक्षा इंजीनियरिंग कॉलेज (शिक्षण संवर्ग) सेवा नियम लागू कर दिए।
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याचिका में कहा गया था कि उक्त नियम संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है। इस नियम के तहत कर्मचारियों को पेंशन, पदोन्नति में आरक्षण नहीं मिलेगा। इसके अलावा उनका स्थानांतरण भी नहीं किया जाएगा। याचिका में मांग की गई थी कि निरस्त नियम 1990 लागू किए जाएं। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद अपने आदेश में कहा है कि नए नियम में याचिकाकर्ता पदनाम, वेतनमान और पेंशन किसी प्रकार से प्रभावित नहीं होगी। बेहतर प्रशासन के लिए सरकार द्वारा उक्त नियम बनाए गए हैं। स्थानांतरण की संभावना नहीं होने के कारण नियम को अवैधानिक करार नहीं दिया जा सकता है।
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