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Jabalpur: पॉक्सो मामले में अभियुक्त का करवाएं डीएनए टेस्ट, हाईकोर्ट ने दिए डीजीपी को आदेश

Tue, 27 Dec 2022 08:54 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Tue, 27 Dec 2022 08:54 PM IST
सार

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अपने अहम आदेश में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा है कि बलात्कार के प्रकरणों में अभियुक्त का डीएनए टेस्ट करवाने का प्रावधान है। डीएनए टेस्ट के लिए बलात्कार पीड़ित की सहमति आवश्यक है, परंतु अभियुक्त की नहीं।

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Jabalpur: Get DNA test done for accused in Pocso case, High Court orders DGP
(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने अपने अहम आदेश में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा है कि बलात्कार के प्रकरणों में अभियुक्त का डीएनए टेस्ट करवाने का प्रावधान है। डीएनए टेस्ट के लिए बलात्कार पीड़ित की सहमति आवश्यक है, परंतु अभियुक्त की नहीं। एकलपीठ ने प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को आदेशित किया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर विचार करते हुए जरूरी दिशा-निर्देश जारी करें। एकलपीठ ने आदेश की प्रति डीजीपी को भिजवाने के निर्देश दिए हैं।
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बलात्कार, अपहरण व पॉक्सो एक्ट की धाराओं के तहत गिरफ्तार आरोपी ने जमानत के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। आरोपी दुर्गेश धुर्वे की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि सिवनी जिले के आधेगांव पुलिस स्टेशन में नाबालिग पीड़ित ने उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। पुलिस ने उसे 23 नवंबर 2011 को गिरफ्तार किया था तभी से न्यायिक अभिरक्षा में है। पीड़ित व उसकी मां ट्रायल कोर्ट में पक्षद्रोही हो गई हैं। इसके अलावा एफएसएल रिपोर्ट भी निगेटिव है। पीड़िता का डीएनए टेस्ट नहीं करवाया गया है।
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सरकार की तरफ से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी। एफएसएल रिपोर्ट निगेटिव होने के कारण पीड़िता का सैंपल डीएनए टेस्ट के लिए नहीं भेजा गया है। राजा वर्मन विरुध्द मध्य प्रदेश सरकार प्रकरण में पारित आदेश के आधार पर पुलिस विभाग ने निर्णय लिया है कि एफएसएल रिपोर्ट निगेटिव आने पर डीएनए टेस्ट के लिए सैंपल नहीं भेजे जाएंगे।
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एकलपीठ ने आवेदन को जमानत का लाभ देते हुए अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए उक्त निर्देश जारी किए। एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि जिन प्रकरणों में पीड़िता की मृत्यु हो गई है और विशेषकर पॉक्सो के मामले में अभियुक्त की डीएनए रिपोर्ट साक्ष्य के रूप में महत्वपूर्ण है। सीआरपीसी की धारा 51 ए के तहत अभियुक्त के डीएनए टेस्ट करवाने का प्रावधान है।

 
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