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जबलपुर: बिना लैब और बिल्डिंग के आदिवासी क्षेत्रों में संचालित फर्जी कॉलेजों को अनावेदक बनाने हाईकोर्ट ने दिए आदेश 

Fri, 28 Jan 2022 10:41 AM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: अंकिता विश्वकर्मा Updated Fri, 28 Jan 2022 10:41 AM IST
सार

मध्य प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य इलाकों में संचालित ऐसे नर्सिंग कॉलेज जिनमें कॉलेज बिल्डिंग, छात्रावास और प्रयोगशालाओं की सुविधा नहीं है। हाईकोर्ट ने उनको अनावेदक बनाने का आदेश दिया है।

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Jabalpur: High court orders to make fake colleges operating in tribal areas without labs and buildings as non-applicants
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य इलाकों में संचालित नर्सिंग कॉलेजों के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कॉलेजों को अनावेदक बनाने के निर्देश दिए हैं। दरअसल प्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों में कुछ नर्सिंग कॉलेज ऐसे हैं जो केवल कागजों में संचालित किए जा रहे हैं, जिसके खिलाफ मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गयी थी। याचिका के साथ ऐसे कॉलेजों की सूची भी पेश की गयी थी। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ और जस्टिस पी के कौरव ने कॉलेजों को अनावेदक बनाने के निर्देश दिए हैं।
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लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि शैक्षणिक सत्र 2000-21 में प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य इलाकों में 55 नर्सिंग कॉलेज को मान्यता दी गयी थी। मध्य प्रदेश नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल ने निरीक्षण के बाद इन कॉलजों की मान्यता दी थी। वास्तविकता में यह कॉलेज सिर्फ कागज में संचालित हो रहे हैं। ऐसा कोई कॉलेज नहीं है जो निर्धारित मापदण्डों को पूरा करता है। अधिकांश कॉलेज की निर्धारित स्थल में बिल्डिंग तक नहीं है। कुछ कॉलेज सिर्फ चार-पांच कमरों में संचालित हो रहे हैं। ऐसे कॉलेज में प्रयोगशाला सहित अन्य आवश्यक संरचना नहीं है। बिना छात्रावास ही कॉलेज का संचालन किया जा रहा है। नर्सिंग कॉलेज को फर्जी तरीके से मान्यता दिये जाने के आरोप में मध्य प्रदेश नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल के रजिस्टार को पद से हटा दिया गया था।
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आवेदक ने फर्जी नर्सिंग कॉलेज संचालित होने के संबंध में शिकायत की थी। शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं होने के कारण जनहित याचिका दायर की गयी। याचिका में ऐसे कॉलेजों की सूची फोटो के साथ प्रस्तुत की गई थी। याचिका में कहा गया था कि जब कॉलेज ही नहीं हैं तो छात्रों को कैसे पढ़ाया जाता होगा। याचिका की सुनवाई के बाद युगलपीठ ने कॉलेजों को अनावेदक बनाने का आदेश दिया। याचिका पर अगली सुनवाई 25 फरवरी को निर्धारित की गयी है।
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