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उज्जैन के इस्कॉन मंदिर की घटना: 17 साल के विकास ने सेल्फी ली, मृदंग बजाया, ईश आराधना की और फिर फांसी लगा ली
Tue, 26 Oct 2021 06:03 PM IST
रवींद्र भजनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
Published by: रवींद्र भजनी
Updated Tue, 26 Oct 2021 06:03 PM IST
सार
पश्चिम बंगाल से उज्जैन के इस्कॉन मंदिर आए 17 वर्षीय किशोर विकास ने घर लौटने से दो दिन पहले आत्महत्या कर ली। उसने ऐसा क्यों किया, इसका कारण साफ नहीं हो सका है। वह 27 अक्टूबर को कोलकाता लौटने वाला था।
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विकास नामक किशोर ने इस्कॉन मंदिर में आत्महत्या कर ली।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पश्चिम बंगाल से एक किशोर मानसिक शांति के लिए इस्कॉन मंदिर उज्जैन आया था। करीब 15 दिनों से यहां रह रहा था। उसे अच्छा भी लग रहा था। सुबह उठता, मृदंग बजाता और ईश आराधना करता। 27 अक्टूबर को वापस घर जाना था लेकिन तभी कुछ ऐसा हुआ कि उसने खुद को खत्म कर लिया।
दरअसल, अपने दोस्त के साथ पश्चिम बंगाल के कोलकाता (जलपाई गुड़ी) से उज्जैन इस्कॉन मंदिर आए 17 वर्षीय विकास ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। वह अपने दोस्त पतलू सरकार के साथ 10 अक्टूबर को इस्कॉन मंदिर, उज्जैन आया था। वह मंदिर में ही रह रहा था। सोमवार सुबह जल्दी उठा। भगवान की आरती में शामिल हुआ। सुबह 9 बजे मृदंग बजाया और इसके बाद फांसी लगा ली।
मृदंग बजाता था विकास, 27 को थी वापसी
बताया जा रहा है कि विकास ने उसी गमछे से फांसी लगाई जिसका उपयोग वह पूजा में करता था। वह मृदंग बजाता था और इससे उसे अच्छा लगता था। उसके माता-पिता भी इस्कॉन से जुड़े हैं। उन्होंने ही उसे यहां भेजा था। विकास सुबह कमरे में गया, पर दोपहर तक नहीं लौटा तो सब ढूंढने लगे। वह मंदिर के एक तरफ बने ऑडिटोरियम में फंदे से लटका मिला। पुलिस ने शव को फंदे से उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस ने विकास के कमरे की तलाशी ली तो उसमें भगवद् गीता, डायरी व अन्य सामान मिला है। सुसाइड नोट नहीं मिला। मोबाइल जब्त कर लिया है। मंदिर के पीआरओ राघवदास ने बताया कि विकास 27 अक्टूबर को वापस जाने वाला था। उसका टिकट भी हो गया था। उसने ऐसा कदम क्यों उठाया यह किसी को नहीं पता।
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दरअसल, अपने दोस्त के साथ पश्चिम बंगाल के कोलकाता (जलपाई गुड़ी) से उज्जैन इस्कॉन मंदिर आए 17 वर्षीय विकास ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। वह अपने दोस्त पतलू सरकार के साथ 10 अक्टूबर को इस्कॉन मंदिर, उज्जैन आया था। वह मंदिर में ही रह रहा था। सोमवार सुबह जल्दी उठा। भगवान की आरती में शामिल हुआ। सुबह 9 बजे मृदंग बजाया और इसके बाद फांसी लगा ली।
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मृदंग बजाता था विकास, 27 को थी वापसी
बताया जा रहा है कि विकास ने उसी गमछे से फांसी लगाई जिसका उपयोग वह पूजा में करता था। वह मृदंग बजाता था और इससे उसे अच्छा लगता था। उसके माता-पिता भी इस्कॉन से जुड़े हैं। उन्होंने ही उसे यहां भेजा था। विकास सुबह कमरे में गया, पर दोपहर तक नहीं लौटा तो सब ढूंढने लगे। वह मंदिर के एक तरफ बने ऑडिटोरियम में फंदे से लटका मिला। पुलिस ने शव को फंदे से उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस ने विकास के कमरे की तलाशी ली तो उसमें भगवद् गीता, डायरी व अन्य सामान मिला है। सुसाइड नोट नहीं मिला। मोबाइल जब्त कर लिया है। मंदिर के पीआरओ राघवदास ने बताया कि विकास 27 अक्टूबर को वापस जाने वाला था। उसका टिकट भी हो गया था। उसने ऐसा कदम क्यों उठाया यह किसी को नहीं पता।
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