MP News: दिल में छेद से परेशान मासूम नरेश को मिला इलाज, सीएम के निर्देश पर कलेक्टर ने भोपाल में कराया भर्ती
सागर में एक दिन पहले आयोजित कुशवाहा समाज के सम्मेलन में सीएम के सामने माता-पिता ने अपने मासूम बच्चे के इलाज की लगाई थी गुहार। कलेक्टर ने गाड़ी बैठाकर भोपाल में कराया भर्ती।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
14 मई को सागर में आयोजित कुशवाहा समाज सम्मेलन में विकासखंड देवरी के ग्राम सहजपुर से आए मुकेश और उनकी पत्नी अपने बच्चे का इलाज कराने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से गुहार लगाई थी। इसके बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पीड़ित परिवार मिले और मासूम बच्चे का इलाज कराने के लिए तत्काल कलेक्टर दीपक आर्य को निर्देश दिए था, जिसके बाद आज नन्हे मासूम को अपने माता-पिता के साथ कलेक्टर दीपक आर्य ने कलेक्टर परिसर से गाड़ी में बैठाकर भोपाल रवाना किया है। वहां नन्हे मासूम के इलाज की समुचित व्यवस्था की जाएगी।
इलाज के लिए परेशान था पीड़ित परिवार
सागर में आयोजित कुशवाहा समाज की सभा में पहुंचे लोग उस समय हक्के-बक्के रह गए, जब एक पिता ने अपने मासूम बच्चे को सीएम के मंच पर फेंकने की कोशिश की, लेकिन बच्चा कुछ दूरी पर गिरा। यह देख लोग सहम से गए। जैसे ही उसकी मां ने अपने बेटे को जमीन पर पड़ा देखा तो वह तत्काल वहां पहुंची और उस बच्चे को उठाकर सीने से लगाया और रोने लग गई। केसली के सहजपुर से पहुंचीं नेहा पटेल का कहना था कि उसका यह एक साल का मासूम बेटा नरेश है। जब वह तीन महीने का था तब पता चला था कि इसके दिल में छेद है। वह अपने बेटे का इलाज कराना चाहती है। उनके पास उसके इलाज के लिए पैसे नहीं हैं। इधर-उधर के चक्कर भी काट रहे, लेकिन कहीं से कोई मदद नहीं मिली।
कार्यक्रम में मासूम को उछाल कर किया था सीएम का ध्यान आकर्षित
रविवार को जब सीएम के सागर आने का पता चला तो नेहा पटेल अपने पति मुकेश और दोनों बच्चों के साथ इस सभा में पहुंची थी। उसका पति सात मुकेश सीएम तक उसका आवेदन पहुंच जाए उसकी बात पहुंच जाए इसके लिए लगा हुआ था, लेकिन कहीं से भी उसकी जब व्यवस्था नहीं हो पाई और सीएम का कार्यक्रम आखिरी दौर में पहुंच गया तो गुस्से में आकर उसने उस बेटे को ही फेंक दिया। उस समय मंच पर सीएम शिवराज सिंह ने तत्काल ही अधिकारियों को महिला की बात सुनने के निर्देश दिए। इसके बाद उसकी सारी समस्या सुनी गई और अगले दिन आने बच्चे को इलाज के लिए भेजा गया।
