Indore:पुलिस पोस्टर लगाने वाले 14 लोगों के आपराधिक रिकॉर्ड की कर रही जांच
ट्रेजर टाउन के चार ब्लाॅकों में 273 ईडब्लूएस फ्लैट हैं, जो 10 सालों में चार से पांच लाख रुपये में बेचे गए। काॅलोनी की वेलफेयर सोसायटी के अधीन ही ईडब्लूएस ब्लाॅक आते थे, लेकिन पिछले माह ट्रेजर टाऊन ईडब्लूएस वेलफेयर सोसायटी के गठन की कवायद शुरू हुई।
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गुंडागर्दी और शराबखोरी के कारण मकान बिकाऊ है के पोस्टर लगाने वाली ट्रेजर टाउन काॅलोनी चर्चा में है। वहां अब स्ट्रीट लाइट लग गई, कैमरे निगरानी कर रहे हैं, लेकिन पलायन की कहानी में भी नया मोड़ आ गया है। सोसायटी में पद की राजनीति के कारण पोस्टर लगाने की बात सामने आई है। इसके बाद अब पुलिस उन 14 लोगों के आपराधिक रिकॉर्ड भी जांच रही है, जिन्होंने मकान बिकाऊ है के पोस्टर लगाए थे। सोमवार को ज्यादातर मकानों के बाहर से पोस्टर गायब हो गए। रहवासी खुद दबी जुबान से काॅलोनी के दो गुटों की आपसी खींचतान की बात कह रहे हैं।
बता दें कि ट्रेजर टाउन के चार ब्लाॅकों में 273 ईडब्लूएस फ्लैट हैं, जो 10 सालों में चार से पांच लाख रुपये में बेचे गए। काॅलोनी की वेलफेयर सोसायटी के अधीन ही ईडब्लूएस ब्लाॅक आते थे, लेकिन पिछले माह ट्रेजर टाऊन ईडब्लूएस वेलफेयर सोसायटी के गठन की कवायद शुरू हुई।
26 रहवासियों के नाम मुख्य वेलफेयर सोसायटी को भेजे गए थे। उसमें 11 नाम तय हुए, हालांकि अभी सोसायटी का पंजीयन नहींं हुआ है। 26 नामों की सूची में प्रशांत पांडे व अन्य रहवासी थे, लेकिन सोसायटी के पदों के लिए तय 11 में उनके नाम नहीं आए। इन्हीं में से ज्यादातर लोगों ने घरों के बाहर मकान बिकाऊ है के पोस्टर लगा रखे थे।
प्रशांत कहते हैं कि काॅलोनी में ज्यादातर मकान किराए पर लोगों ने दे रखे हैं, वे ही विवाद करते हैं। हमने आवाज उठाई तो पुलिस की गश्त भी शुरू हो गई और सीसीटीवी कैमरे भी लग गए। इसी काॅलोनी के मनीष शिंदे गुट ने पुलिस अफसरों को शिकायत की है कि काॅलोनी के कुछ रहवासी काॅलोनी की छवि बदनाम कर रहे हैं। यदि काॅलोनी में अपराध होते हैं तो उसके प्रमाण भी पुलिस को सौंपना चाहिए। पुलिस ने काॅलोनी से तीन दिन में एक भी गिरफ्तारी नहीं की।
रहवासियों को समझाया है
क्षेत्रीय विधायक जीतू पटवारी का कहना है कि ट्रेजर टाउन में रहवासियों के आपसी विवाद का मामला है। दोनों पक्षों को समझा दिया है।
सोसायटी का विवाद आया सामने
डीसीपी आदित्य मिश्रा ने कहा कि काॅलोनी के कुछ रहवासियों ने शिकायत की है कि सोसायटी में जिन लोगों को पद नहीं मिले, वे पोस्टर लगाकर भ्रम फैला रहे हैं। इस मामले में एसआईटी ने जांच शुरू की है। सभी बिंदुओं को जांच में शामिल किया जाएगा।
