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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Indore News ›   MY Hospital:: 31 years ago, MY Hospital was freed from 12,000 rats, Operation Rejuvenation lasted for 16 days

MY Hospital: 31 साल पहले बारह हजार चूहों से मुक्त हुआ था एमवाय अस्पताल, 16 दिन चला था ऑपरेशन कायाकल्प

Fri, 05 Sep 2025 04:12 PM IST
Abhishek Chendke अभिषेक चेंडके
Updated Fri, 05 Sep 2025 04:12 PM IST
सार

अस्पताल के रोगियों को निजी अस्पतालों में शिफ्ट किया गया। फिर पूरा अस्पताल खाली किया। 16 दिन तक एमवाय अस्पताल के हर कोने से चूहों को खोज-खोज कर मारा गया था। ऑपरेशन कायाकल्प में बारह हजार चूहे मारे गए थे।

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MY Hospital:: 31 years ago, MY Hospital was freed from 12,000 rats, Operation Rejuvenation lasted for 16 days
एमवाय अस्पताल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इंदौर के एमवाय अस्पताल में चूहों द्वारा दो नवजात बच्चियों के अंग कुतरे जाने और उनकी मौत पर हल्ला मचा है। अस्पताल वर्षों से चूहों का स्थायी बसेरा रहा है। 1994 में जब गुजरात के सूरत में प्लेग फैला था तो लोगों ने पलायन शुरू कर दिया था। तब इंदौर में भी प्लेग फैलने का डर था। तब तत्कालीन कलेक्टर एसआर मोहंती ने इंदौर में चूहों के सबसे बड़े गढ़ एमवाय में ऑपरेशन कायाकल्प चलाया था।

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अस्पताल के रोगियों को निजी अस्पतालों में शिफ्ट किया गया। फिर अस्पताल खाली किया। 16 दिन तक एमवाय अस्पताल के हर कोने से चूहों को खोज-खोज कर मारा गया था। ऑपरेशन कायाकल्प में बारह हजार चूहे मारे गए थे। बाद में वर्ष 2014 में भी कायाकल्प ऑपरेशन चलाया गया, लेकिन तब अस्पताल को पूरी तरह खाली नहीं किया गया। तब भी पांच हजार से ज्यादा चूहों को मारा गया था। पेस्ट कंट्रोल कंपनी से जुड़े सुनील पाल बताते हैं कि पहली बार इतने बड़े पैमाने पर प्रदेश के किसी सरकारी अस्पताल में अभियान छेड़ा गया था। उसे ऑपरेशन कायाकल्प नाम दिया गया था।

शासन का एक पैसा नहीं लगा था

ये इंदौर की महानता है कि जब भी कोई बड़ा काम किया जाता है तो शहरवासी खुलकर जनसहयोग करते हैं। वर्ष 1994 में मैं इंदौर कलेक्टर था। सूरत में प्लेग फैलने पर हमने इंदौर को साफ करना शुरू कर दिया था। तब अभिलाष खांडेकर ( वरिष्ठ पत्रकार) ने मुझसे कहा कि सबसे ज्यादा चूहे एमवाय अस्पताल में हैं। अस्पताल को चूहों से मुक्त कराएं। 31 साल पहले एमवाय के ऑपरेशन कायाकल्प में लाखों रुपये खर्च हुए, लेकिन शासन का एक रुपया खर्च नहीं हुआ था। जनसहयोग से ऑपरेशन कायाकल्प को अंजाम दिया गया। 35 दिन तक अस्पताल पूरी तरह खाली रहा। निजी अस्पतालों ने मरीजों का मुफ्त इलाज किया था। ऑपरेशन कायाकल्प के बाद वर्षों तक चूहों की समस्या अस्पताल में नहीं रही।


-सुधि रंजन मोहन, पूर्व मुख्य सचिव

बेड पर नजर आते थे चूहे

वर्ष 1994 में एमवाय अस्पताल की व्यवस्था काफी खराब थी। चूहे मरीजों के पलंग तक नजर आते थे। मैंने अखबार में चूहों का फोटो छापा था। मैंने तब कलेक्टर रहे सुधि रंजन मोहंती को कहा था कि एमवाय अस्पताल को चूहों से मुक्त करना जरूरी है। इंदौर में वहीं से प्लेग फैलेगा। पूरे अस्पताल को खाली करकर उसे चूहों से मुक्त करना कठिन था, लेकिन इस चुनौती को मोहंती ने स्वीकारा था।
- अभिलाष खांडेकर, वरिष्ठ पत्रकार

इस तरह दिया था ऑपरेशन कायाकल्प को अंजाम

  • ऑपरेशन कायाकल्प को पूरा करने में 35 दिन का समय लगा। छोटा नेहरू स्टेडियम में अस्पताल के कबाड़ को एकत्र किया गया। सैकड़ों टन कचरा ट्रकों से फेंका गया।

  • शहर के उद्योगपति, दानदाता आगे आए। जनसहयोग से पैसा एकत्र कर अस्पताल को चूहों से मुक्त करने की मुहिम छेड़ी गई।

  • रोगियों को दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट किया। निजी अस्पतालों ने एक माह तक रोगियों को मुफ्त इलाज किया।

  • 16 दिन पूरे अस्पताल को सील कर पेस्ट कंट्रोल किया गया। मारे गए चूहों को फार्मेलिएन में भरकर ड्रमों में रखा गया। फिर उन्हें पंचकुइया मुक्तधाम के इलेक्ट्रानिक शवदाह गृह में जलाया गया था।

  • अस्पताल की नालियों, पाइपों में घुसे चूहों को मारने के लिए गैस छोड़ी गई। लाइनों में प्रेशर से पानी छोड़ने पर सैकड़ों चूहे पाइपों में से मृत निकले। 

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