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Election: आरएसएस और भाजपा ने ही मुझे कांग्रेस से विधायक चुनाव लड़वाया, मैंने हारकर उषा ठाकुर को जिताया
Wed, 10 Apr 2024 10:35 PM IST
अर्जुन रिछारिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Wed, 10 Apr 2024 10:35 PM IST
सार
महू के भाजपा नेता रामकिशोर शुक्ला ने चौंकाने वाला खुलासा किया है, उन्होंने बताया कि अंतरसिंह दरबार ने निर्दलीय और उन्होंन कांग्रेस से चुनाव भाजपा के कहने पर ही लड़ा था।
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शुक्ला के साथ उषा ठाकुर।
- फोटो : अमर उजाला, इंदौर
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विस्तार
कांग्रेस से भाजपा में आए महू के नेता रामकिशोर शुक्ला ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने बुधवार को कहा कि वे आरएसएस और भाजपा नेताओं के कहने पर ही कांग्रेस में गए थे। शुक्ला ने कहा चुनाव से पहले मुझे संघ के पदाधिकारी मित्र ने कहा था कि आपको कांग्रेस ज्वाइन करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उषा ठाकुर दीदी का महू में भाजपा वाले ही विरोध कर रहे हैं। इस बार भितरघात के कारण उनकी जीत मुश्किल लग रही है। इसलिए आप कांग्रेस में चले जाओ और वहां से चुनाव लड़ो। कांग्रेस के नेता नाराज होकर निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे और कांग्रेस के वोट बंटने से उषा ठाकुर जीत जाएंगी। शुक्ला ने कहा इसी रणनीति का लाभ उठाकर दीदी इस बार महू से रिकॉर्ड मतों से जीत गईं थी।
अंतरसिंह दरबार भी भाजपा की रणनीति से निर्दलीय चुनाव लड़े
गौरतलब है कि शुक्ला ने विधानसभा चुनाव के ठीक पहले भाजपा छोड़कर कांग्रेस ज्वाइन कर ली थी। इसके बाद कांग्रेस ने उन्हें टिकट भी दे दिया था। इस पर टिकट कटने से नाराज कांग्रेस के नेता अंतरसिंह दरबार भड़क गए और निर्दलीय चुनाव में उतर गए। त्रिकोणीय मुकाबले में उषा ठाकुर 25 हजार मतों से चुनाव जीत गईं। निर्दलीय अंतरसिंह दरबार दूसरे नंबर पर और कांग्रेस से उतरे शुक्ला तीसरे नंबर पर रहे। अब शुक्ला कुछ दिनों पहले ही वापस भाजपा में वापस लौट आए हैं।
मुझे वीरगति मिली
शुक्ला ने कहा कि उषा ठाकुर को विधायक बनाने के लिए भाजपा ने यह रणनीति की। कांग्रेस के पूर्व विधायक अंतर सिंह दरबार निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ेंगे, इसकी व्यवस्था भी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के द्वारा की गई। शुक्ला ने कहा कि मुझे चुनावी महाभारत में कांग्रेस के चक्रव्यूह में लड़ने के लिए भेजा, इसमें मैं वीरगति को प्राप्त हुआ। पांडवों की विजय हुई। इसी कारण विधायक उषा ठाकुर 34 हजार मतों से दूसरी बार महू से जीतीं। इसकी कल्पना स्वयं उषा दीदी को भी नहीं थी, यह बात उन्होंने भी स्वीकार की है। चुनाव में उषा ठाकुर को 1 लाख 02 हजार 989, कांग्रेस के बागी निर्दलीय प्रत्याशी अंतरसिंह दरबार को 68 हजार 597 और भाजपा से बगावत कर कांग्रेस प्रत्याशी बने रामकिशोर शुक्ला को 29 हजार 144 वोट ही मिले थे।
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अंतरसिंह दरबार भी भाजपा की रणनीति से निर्दलीय चुनाव लड़े
गौरतलब है कि शुक्ला ने विधानसभा चुनाव के ठीक पहले भाजपा छोड़कर कांग्रेस ज्वाइन कर ली थी। इसके बाद कांग्रेस ने उन्हें टिकट भी दे दिया था। इस पर टिकट कटने से नाराज कांग्रेस के नेता अंतरसिंह दरबार भड़क गए और निर्दलीय चुनाव में उतर गए। त्रिकोणीय मुकाबले में उषा ठाकुर 25 हजार मतों से चुनाव जीत गईं। निर्दलीय अंतरसिंह दरबार दूसरे नंबर पर और कांग्रेस से उतरे शुक्ला तीसरे नंबर पर रहे। अब शुक्ला कुछ दिनों पहले ही वापस भाजपा में वापस लौट आए हैं।
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मुझे वीरगति मिली
शुक्ला ने कहा कि उषा ठाकुर को विधायक बनाने के लिए भाजपा ने यह रणनीति की। कांग्रेस के पूर्व विधायक अंतर सिंह दरबार निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ेंगे, इसकी व्यवस्था भी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के द्वारा की गई। शुक्ला ने कहा कि मुझे चुनावी महाभारत में कांग्रेस के चक्रव्यूह में लड़ने के लिए भेजा, इसमें मैं वीरगति को प्राप्त हुआ। पांडवों की विजय हुई। इसी कारण विधायक उषा ठाकुर 34 हजार मतों से दूसरी बार महू से जीतीं। इसकी कल्पना स्वयं उषा दीदी को भी नहीं थी, यह बात उन्होंने भी स्वीकार की है। चुनाव में उषा ठाकुर को 1 लाख 02 हजार 989, कांग्रेस के बागी निर्दलीय प्रत्याशी अंतरसिंह दरबार को 68 हजार 597 और भाजपा से बगावत कर कांग्रेस प्रत्याशी बने रामकिशोर शुक्ला को 29 हजार 144 वोट ही मिले थे।
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