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Indore: डबलडेकर ब्रिज की 800 टन वजनी धनुषाकार बो-स्ट्रिंग गर्डर को दूसरे सिरे से जोड़ने का काम शुरू
Mon, 23 Mar 2026 11:10 AM IST
Abhishek Chendke
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Abhishek Chendke
Updated Mon, 23 Mar 2026 11:10 AM IST
सार
175 करोड़ की लागत से इंदौर में बन रहा यह ब्रिज सबसे ऊंचाई वाला है। जमीन की सतह से इसकी ऊंचाई 65 मीटर से अधिक है। इस ब्रिज की लंबाई भी एक किलोमीटर से ज्यादा है। यह प्रदेश का पहला डबलडेकर ब्रिज है।
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डबलडेकर ब्रिज।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
उज्जैन रोड स्थित लवकुश चौराहे पर बन रहे प्रदेश के पहले डबल डेकर ब्रिज के मध्य हिस्से का काम अब रफ्तार पकड़ेगा। रविवार रात को ट्रैफिक रोककर 800 टन वजनी बो-स्ट्रिंग को स्थापित करने की कोशिश की गई। इसका थोड़ा सा हिस्सा खिसकाकर काम रोक दिया गया। इसे पुल पर स्थापित करने के लिए ट्रैफिक विभाग ने इंदौर-सांवेर रोड का ट्रैफिक भी डायवर्ट किया था। अब फिर इसके लिए कवायद शुरू की जाएगी।
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विशालकाय क्रेनों की ली जा रही मदद
दोनों लेन पर 400-400 टन की बो-स्ट्रिंग गर्डर लगाई जाएगी। फिर उस पर ट्रैक बनेगा और ट्रैफिक गुजरेगा। यह काम जमीन से 65 मीटर ऊंचाई पर होना है, इसलिए निर्माण एजेंसी ने विशालकाय क्रेनों की मदद ली। रविवार रात को इंदौर विकास प्राधिकरण के अधिकारी मौके पर पहुंचे। पहले मार्ग का ट्रैफिक रोका गया और दोनों तरफ क्रेनों ने मध्य हिस्से को आगे खिसकाना शुरू कर दिया। दो-तीन मीटर का हिस्सा खिसकाने के बाद काम रोक दिया गया।
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तीन साल पहले शुरू हुआ था ब्रिज निर्माण
इंदौर में 175 करोड़ रुपये की लागत से यह ब्रिज तीन साल पहले बनना शुरू हुआ था। इसकी लंबाई एक किलोमीटर से ज्यादा है। फरवरी में ही इसे पूरा हो जाना था, लेकिन काम की गति धीमी होने से देरी हो रही है। ब्रिज का 85 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और 800 टन वजनी स्टील की बो-स्ट्रिंग चंडीगढ़ से बनकर आई है। अब उसे मध्य हिस्से में रखा जाएगा।
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इस मार्ग के मध्य हिस्से में मेट्रो का ट्रैक भी है। इस कारण विशेष सावधानी बरती जा रही है, ताकि कोई परेशानी न हो। मध्य हिस्से के दोनों सिरे जुड़ने के बाद ब्रिज वर्षाकाल से पहले ट्रैफिक के लिए खोला जा सकता है। इसके निर्माण का सबसे ज्यादा फायदा ढाई साल बाद उज्जैन में लगने वाले सिंहस्थ मेले के दौरान होगा। उज्जैन की ओर सबसे ज्यादा ट्रैफिक इंदौर से होकर गुजरेगा।
धनुषाकार होती है बो-स्ट्रिंग गर्डर
दरअसल, बो-स्ट्रिंग ब्रिज एक विशेष प्रकार का धनुषाकार पुल होता है। इसका ऊपरी हिस्सा एक धनुष की तरह मुड़ा हुआ होता है और नीचे का हिस्सा एक सीधी रस्सी या स्ट्रिंग की तरह होता है। इसके जरिए पुल के ऊपर से गुजरने वाले वाहनों का भार इसके झुके हुए मेहराबों द्वारा संभाला जाता है। यह 50-150 मीटर की दूरी के लिए बहुत उपयुक्त है और मुख्य रूप से वहां इस्तेमाल होता है। जहां जमीन कमजोर हो या जहां खंभे लगाना मुश्किल हो। ये पुल देखने में आकर्षक, भूकंप-रोधी, और टिकाऊ होते हैं। इनका निर्माण दूसरी जगह करवा कर निश्चित स्थान पर इन्हें स्थापित जा सकता है। भारत में इनका उपयोग रेलवे ओवर ब्रिज और मुंबई व चेन्नई जैसे तटीय शहरों में सड़कों पर किया जा रहा है।
