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Indore News: ठगों ने बातों का बुना ऐसा जाल... सब जानते हुए भी उलझ गईं रिटायर्ड शिक्षिका; बैंक मैनेजर ने बचाया

Mon, 02 Jun 2025 03:55 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अभिषेक चेंडके Updated Mon, 02 Jun 2025 03:55 PM IST
सार

इंदौर में साइबर ठगों ने केन्द्रीय विद्यालय से सेवानिवृत प्रिंसिपल को शिकार बनाना चाहा। जब ठगों की बात मानकर प्रिंसपल बैंक पहुंची तो मैनेजर की सूझबूझ काम आई और ये ठगी होने से बच गई।

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Indore: The thugs had told the retired teacher that if you do not give us the money, the government will confi
साइबर ठगी का शिकार होते-होते बची रिटायर्ड प्रिसिंपल। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इंदौर के केन्द्रीय विद्यालय से सेवानिवृत 81 वर्षीय नंदनी चिपलूणकर साइबर ठगी का शिकार होते-होते बच गईं। उन्होंने डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी के बारे में पहले से काफी कुछ सुन रखा था। जब उनके पास ठगों का काॅल आया तो बहुत डर गईं। ठगों ने मनोवैज्ञानिक तरीके से इस तरह का माहौल रचा कि वे जैसा बोल रहे थे, वैसा नंदनी करने के लिए तैयार होती चली गईं।

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डर के साथ नंदनी को उन पर विश्वास होने लगा, क्योंकि पुरुष ठग उन्हें कानून, अपराध की धाराएं बताकर डरा रहा था तो एक महिला ठग उनसे बड़े प्यार से बातें कर इस केस से बाहर निकलने के उपाय बता रही थी। वह यह भी बोल रही थी कि यदि आप अपराध में शामिल नहीं हैं तो फिर कुछ नहीं होगा, लेकिन बैंक में जमा आपका पैसा जब्त हो जाएगा। फिर मुंबई कोर्ट के चक्कर भी काटने होंगे। इससे अच्छा है कि बैंक में जमा राशि आप हमारे खाते में ट्रांसफर कर दो। इसके लिए नंदनी तैयार हो गईं।
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मुंबई में बैंक खाता होने की बात पर अचरज हुआ

नंदनी ने 'अमर उजाला' से चर्चा में बताया कि ठगों ने कहा कि आपका मुंबई के एक बैंक में खाता चल रहा है। मैंने कहा कि मेरा इंदौर के अलावा दूसरे किसी भी शहर के बैंक में कोई खाता नहीं है। नंदनी को ठगी की शंका न हो, इसलिए फिर ठगों ने बात संभालते हुए कहा कि आपके नाम का फर्जी खाता मनी लांड्रिंग के लिए खोला होगा। इसके बाद मुंबई के कोलावा के पुलिस अधिकारी बनकर एक ठग अंनत कुमार ने नंदनी से बात की। फिर रश्मि शुक्ला नाम बताकर एक महिला ठग ने खुद को अधिकारी बताया। इसने नंदनी से बात भी की। वह अंग्रेजी में बातें कर रही थी। 36 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट रहने के बाद नंदनी 52 लाख की एफडी बैंक से तुड़वाने के लिए राजी हो गई थीं।

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पीएफ में मिली राशि की कराई थी एफडी

नंदनी के नौकरी से सेवानिवृृत होने के बाद पीएफ का जो पैसा मिला था। उसकी उन्होंने एफडी कराई थी। ठग ने पुलिस अधिकारी बनकर पहले उनका अकाउंट नंबर मांगा था। फिर एक करोड़ रुपये की मांग की, लेकिन बाद में उन्होंने 52 लाख की एफडी तुड़वाने के लिए नंदनी को राजी कर लिया था। एफडी की राशि ठगों ने अपने खाते में डालने के लिए बोला था। जब वे बैंक में हैरान-परेशान होकर एफडी तुड़वाने पहुंची तो बैंक मैनेजर पुष्पांजलि कुमारी को शंका हुई। उन्होंने एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया को इसकी जानकारी दी। इसके बाद सायबर फ्राड का शिकार होने से रिटायर्ड प्रिंसिपल को बचा लिया गया।  

इस तरह बचे डिजिलट अरेस्ट से

  • अनजान लिंक या अटैचमेंट पर क्लिक न करें। अनजान नंबरों से आए काॅल पर शंका करें और उन्हें अपनी निजी जानकारी, बैंक खाते के बारे में न बताएं।
  • यदि कोई ठग डिजिटल अरेस्ट करने की कोशिश करता है तो साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर काॅल करें।
  • अनजान एप डाउनलोड न करें। सोशल मीडिया पर अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट सोंच समझ कर मंजूर करें।
  • पुलिस विभाग या सुरक्षा एजेंसी कभी भी डिजिटल अरेस्ट नहीं करती हैं। इस तरह के काॅल आने पर डरे नहीं, ठगों से सवाल करें। फिर उनका नंबर ब्लाॅक कर दें।
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